ट्विशा मौत केस: रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत HC ने की खारिज, 155 दिन से जेल में बंद

भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। फॉरेंसिक रिपोर्ट और CBI जांच लंबित होने से उन्हें फिलहाल जेल में रहना होगा।

जबलपुर।

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की रिपोर्ट आना बाकी है।

ऐसे में फिलहाल उन्हें जेल से रिहा करना उचित नहीं होगा।

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया।

गिरिबाला पर बहू ट्विशा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी बेटे समर्थ सिंह का साथ देने का आरोप है।

वह 2 जून से भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं।

4 नवंबर तक उन्हें जेल में 155 दिन हो चुके हैं।

चैट और CCTV फुटेज बने अहम आधार

हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट के मुताबिक, घटना से ठीक पहले परिवार के सदस्यों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट की अनदेखी नहीं की जा सकती।

घर के CCTV फुटेज और घटना के बाद आरोपियों के व्यवहार की भी जांच जरूरी है।

अदालत ने कहा कि केवल यह दलील देना पर्याप्त नहीं है कि गिरिबाला की कोई आपराधिक मंशा नहीं थी।

इस पहलू पर केस डायरी में दर्ज दूसरे साक्ष्यों और परिस्थितियों के साथ विचार करना होगा।

आईफोन और DVR की रिपोर्ट का इंतजार

CBI ने अदालत को बताया कि जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू अभी बाकी हैं।

ट्विशा के आईफोन और घर के DVR की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है।

इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की जांच होगी।

CBI रिपोर्ट मिलने के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेगी।

एजेंसी का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य मामले की परिस्थितियों को समझने में अहम हो सकते हैं।

CBI को गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका

जमानत का विरोध करते हुए CBI ने गिरिबाला के प्रभावशाली होने का हवाला दिया।

एजेंसी ने आशंका जताई कि रिहाई मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।

सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना भी जताई गई।

डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने बताया कि CBI ने जमानत याचिका के जवाब में विस्तृत पक्ष रखा था।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राहत देने से इनकार कर दिया।

गिरिबाला की दलील- बेटे के खिलाफ हैं आरोप

करीब 64 वर्षीय गिरिबाला सिंह ने अपनी जमानत याचिका में कई तर्क दिए थे।

उनका कहना था कि व्हाट्सएप चैट में लगाए गए आरोप बेटे समर्थ से संबंधित हैं।

उनके खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप नहीं हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि ट्विशा के बैंक खाते में 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे।

यह तथ्य दहेज मांगने के आरोपों के विपरीत है।

बचाव पक्ष ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) का हवाला दिया।

कहा गया कि मौत से ठीक पहले क्रूरता का कोई प्रमाण नहीं है।

गिरिबाला अपना वॉयस सैंपल भी दे चुकी हैं।

इसलिए हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, CBI, राज्य सरकार और आपत्तिकर्ता ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

पहले मिली अग्रिम जमानत भी हो चुकी है रद्द

इस मामले में गिरिबाला को पहले निचली अदालत से राहत मिल चुकी थी।

भोपाल की अदालत ने 15 मई 2026 को उन्हें अग्रिम जमानत दी थी।

राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द कर दी।

इसके बाद CBI ने 28 मई को गिरिबाला को गिरफ्तार किया।

2 जून को उन्हें न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

 पांच महीने में टूटा रिश्ता

ट्विशा और समर्थ की मुलाकात जनवरी 2025 में एक मैट्रिमोनियल साइट पर हुई थी।

दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए। बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।

अक्टूबर 2025 में गिरिबाला पहली बार भोपाल में ट्विशा से मिलीं।

इसके बाद वह दिल्ली स्थित ट्विशा के घर भी पहुंचीं।

परिवारों की सहमति से रिश्ता तय हुआ।

9 दिसंबर 2025 को दिल्ली में ट्विशा और समर्थ की शादी हुई।

लेकिन शादी के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में ट्विशा संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर मिलीं।

पति समर्थ और सास गिरिबाला ने पुलिस को आत्महत्या की जानकारी दी थी।

इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच CBI को सौंप दी गई।

फिलहाल मामले में पति समर्थ और सास गिरिबाला दोनों जेल में हैं।

अब सबकी नजरें आईफोन और CCTV की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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