भोपाल।
मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गोशालाओं के चयन और बजट आवंटन को लेकर सामने आई शिकायतों का असर आखिरकार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल पर पड़ गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उनसे पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया। सरकार के इस फैसले के पीछे गोशालाओं के चयन में कथित अनियमितताओं और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, स्वावलंबी गोशालाओं के लिए जिन संस्थाओं का चयन किया गया था, उनमें कई की पात्रता और कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर उन्हें जमीन और बजट आवंटित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री पिछले तीन-चार महीनों से इस मामले में मंत्री और विभागीय अधिकारियों को लगातार सतर्क कर रहे थे, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
संघ और भाजपा नेतृत्व तक पहुंचा मामला
सूत्रों का कहना है कि गोशालाओं के चयन, जमीन आवंटन और बजट वितरण को लेकर शिकायतें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंची थीं। इसके बाद सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जिम्मेदारी में बदलाव का निर्णय लिया।
जानकारी के अनुसार, विभाग वापस लेने से पहले मुख्यमंत्री ने मंत्री लखन पटेल को अपने आवास पर बुलाकर चर्चा की और निर्णय से अवगत कराया। हालांकि विभागीय फेरबदल की अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी थी।
मुख्यमंत्री के पास पहुंचे 12 विभाग
