एनआरआई कोटे की सीटें पाने के लिए किन रिश्तेदारों को माना जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बढ़ाते हुए एनआरआई कोटे की सीटें पाने के लिए छात्रों को अपने परिवारिक सदस्यों के नाम बताने होंगे। इससे फर्जी प्रमाण पत्र के मामले कम होंगे। मध्य प्रदेश में 6 निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटें आरक्षित हैं। ये सीटें कुल सीटों का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा है।
इन सीटों पर एडमिशन लेना काफी महंगा भी है। एक सीट की सालाना फीस करीब 30 लाख रुपए तक होती है। इतनी बड़ी रकम की वजह से ही फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए एडमिशन के मामले सामने आते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के नए नियम
सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बढ़ाते हुए एनआरआई कोटे की सीटें पाने के लिए छात्रों को अपने परिवारिक सदस्यों के नाम बताने होंगे। इससे फर्जी प्रमाण पत्र के मामले कम होंगे। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक एनआरआई कोटे का फायदा तीन स्थितियों में मिलेगा। पहला, अगर छात्र के माता या पिता खुद एनआरआई हों। दूसरा, अगर सगा भाई या सगी बहन एनआरआई हो। तीसरी स्थिति में चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी या चचेरे-ममेरे भाई-बहन भी आधार बन सकते हैं।
लेकिन शर्त यह है कि वह व्यक्ति खुद एनआरआई हो, विदेश में सामान्य रूप से रहता हो, और असल में छात्र का कानूनी अभिभावक हो। यह नियम ओसीआई (OCI – Overseas Citizen of India) श्रेणी और भारतीय से एनआरआई श्रेणी में राष्ट्रीयता बदलने वाले छात्रों पर भी लागू होगा। यानी हर मामले की गहराई से जांच होगी।
मध्य प्रदेश में नए नियम की स्थिति
मध्य प्रदेश में नए नियम लागू होंगे या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की डीएमई डॉ. अरुणा कुमार ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है। उनके मुताबिक मध्य प्रदेश में काउंसलिंग अभी भी 2018 के पुराने नियमों से होती है। अगर नए नियम जारी हुए हैं तो पहले गजट में संशोधन करना जरूरी होगा। इसके बाद ही राज्य में यह व्यवस्था लागू हो पाएगी।
मध्य प्रदेश के 6 निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटें आरक्षित हैं। यह कुल सीटों का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा है, यानी लगभग 100 से 110 सीटें। इन सीटों पर एडमिशन लेना काफी महंगा भी है। एक सीट की सालाना फीस करीब 30 लाख रुपए तक होती है।
फर्जी प्रमाण पत्र के मामले
इंदौर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र लगाया गया था। जांच में दूतावास ने साफ कहा कि यह सर्टिफिकेट असली नहीं है। इसके अलावा नीट-पीजी में भी 48 डॉक्टरों ने फर्जी एनआरआई प्रमाण पत्र लगाए थे। इन मामलों के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने सख्ती बढ़ाने का फैसला लिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बढ़ाते हुए एनआरआई कोटे की सीटें पाने के लिए छात्रों को अपने परिवारिक सदस्यों के नाम बताने होंगे।
- मध्य प्रदेश में 6 निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटें आरक्षित हैं।
- इन सीटों पर एडमिशन लेना काफी महंगा भी है। एक सीट की सालाना फीस करीब 30 लाख रुपए तक होती है।
नए नियम का प्रभाव
नए नियम के कारण फर्जी प्रमाण पत्र के मामले कम होंगे। इससे मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया पारदर्शी होगी। छात्रों को अपने परिवारिक सदस्यों के नाम बताने से उनकी पात्रता की जांच होगी। इससे मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्ता में सुधार होगा।
नए नियम के कारण मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया पारदर्शी होगी। छात्रों को अपने परिवारिक सदस्यों के नाम बताने से उनकी पात्रता की जांच होगी। इससे मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्ता में सुधार होगे।