Narsinghgarh Constituency: ‘शेर’ ने नरसिंहगढ़ ही नहीं आसपास की 3 सीटों पर भी दिलवाई थी निर्दलियों को जीत

रविअवस्थी,भोपाल। Narsinghgarh Constituency: “नरसिंहगढ़ मप्र के राजगढ़ जिले की एक अहम विधानसभा सीट..जहां छह सौ साल पुरानी रियासत का दबदबा अब भी कायम है..एक दौर ऐसा था जब इस रियासत के वारिस ने न केवल विधानसभा बल्कि लोकसभा में भी निर्दलीय ताल ठोंकी..चुनाव चिन्ह मिला शेर..

यह चिन्ह जिले में लोगों के मन मस्तिष्क पर ऐसा छाया कि न केवल नरसिंहगढ़ के उक्त पूर्व रियासतदार बल्कि यह चुनाव चिन्ह पाने वाले आसपास की तीन सीटों के निर्दलीय भी चुनाव जीत गए…तो ऐसी है नरसिंहगढ़ विधानसभा..जहां आज भी इसी रियासत परिवार के राजवर्धन सिंह भाजपा के विधायक हैं। ” .—-आइए जानते हैं कैसा रहा इस सीट का अब तक का सियासी मिजाज..

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मंत्री राजवर्धन सिंह इसी राज परिवार से
देश आजादी का अमृतकाल मना रहा है…राजशाही अब बीते दिनों की बात हो गई..बावजूद इसके पुराने राजघरानों व रियासतदारों का दबदबा व जनता के प्रति उनका स्नेह,सम्मान अब भी देखा जा सकता है..

राजधानी भोपाल के समीपस्थ नरसिंहगढ़ ऐसी ही विधानसभा सीट है..जहां सात सौ पूर्व स्थापित रियासत का असर अब भी देखा जा सकता है…नरसिंहगढ़ के मौजूदा भाजपा विधायक  राजवर्धन सिंह Rajyawardhan singh  इसी राजपरिवार से हैं…

जिनकी सरलता,सादगी व विकास के प्रति उनके जुनून से मतदाता उनके आज भी मुरीद हैं….जी हां हम बात कर रहे हैं राजगढ़ जिले Rajgarh district of MP की नरसिंहगढ़ विधानसभा सीट की…यहां का किला व इसके समीप बना सुंदर तालाब को मालवा के मिनी कश्मीर कहा जाता है..
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नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर है नरसिंहगढ़ की फिजा
अनूठे किला,झील से मिला मिनी कश्मीर का दर्जा
पुरानी रियासत का विस चुनाव में भी रहा दबदबा
नरसिंहगढ़ रियासत का 600 साल पुराना इतिहास
मप्र गठन के साथ नरसिंहगढ़ बनी विधानसभा सीट
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किले की धमक आज भी बरकरार
नरसिंहगढ़ का किला आज भले ही वीरान हो लेकिन उसकी धमक आज भी वहां होने वाले चुनाव में देखी जा सकती है… क्या कभी आपने सुना है कि एक सीट के निर्दलीय प्रत्याशी को मिले चुनाव चिन्ह से आसपास की तीन चार सीटों के अन्य निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव जीत जाएं..लेकिन नरसिंहगढ़ यह इतिहास रच चुका है…मौजूदा भाजपा विधायक राजवर्धन सिंह के पिता भानु प्रकाश सिंह ने 1962 में निर्दलीय चुनाव लडा..चुनाव चिन्ह मिला शेर..यह चिन्ह जिले की अन्य तीन विधानसभा सीट खिलचीपुर,राजगढ़ और ब्यावरा के निर्दलीय उम्मीदवारों को भी मिला..

हैरत की बात यह कि भानुप्रकाश सिंह का यह चुनाव चिन्ह जिलेभर के लोगों के मन मस्तिष्क में ऐसा रच बस गया कि न केवल भानुप्रकाश बल्कि अन्य तीनों सीटों के निर्दलीय भी विधायक चुन लिए गए…तब देश में कांग्रेस का दौर था…लेकिन ‘शेर’ ने जिले की चारों सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों को चित्त कर दिया था… इसी चुनाव चिन्ह पर भानु प्रकाश ने बाद में लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने..तब विधायक पद से इस्तीफा दे दिया…इसके बाद 1967 के चुनाव में जनसंघ के कृष्ण मोहन विधायक चुने गए…

नरसिंहगढ़ से कौन कब जीता
1957: भंवरलाल जीवन,                कांग्रेस
1962: भानु प्रकाश सिंह,               निर्दलीय
1967: कृष्णमोहन,                      जनसंघ
1972: मांगीलाल भंडारी,              कांग्रेस
1977:सिद्दूमल                         जनता पार्टी
1980: सिद्दूमल                        बीजेपी
1985: राज्यवर्धन सिंह,                कांग्रेस
1990: हनुमान प्रसाद गर्ग,           बीजेपी
1993: मांगीलाल भंडारी,            कांग्रेस
1998: धूल सिंह यादव,              कांग्रेस
2003: मोहन शर्मा,                   बीजेपी
2008: मोहन शर्मा,                   बीजेपी
2013: गिरीश भंडारी,               कांग्रेस
2018: राज्यवर्धन सिंह,             बीजेपी
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अंदरूनी कलह बनी मुसीबत
नरसिंहगढ़ सीट Narsinghgarh Constituency: के लिए अब तक हुए 14 चुनाव में 6 बार कांग्रेस तो 7 बार जनसंघ व बीजेपी ने जीत का परचम फहराया.. 1962 में पहली व अंतिम बार निर्दलीय निर्वाचित भानु प्रकाश सिंह भी लोकतंत्र के प्रति आस्थावान व्यक्तित्व थे ..

उनके पुत्र व मौजूदा बीजेपी विधायक राजवर्धन सिंह ने इसे और मजबूत बनाया…राजवर्धन इससे पहले 1985 में कांग्रेस से विधायक चुने गए थे..बीते दो दशक में यहां हुए चुनाव की ही बात करें तो 2003 से 2013 तक भाजपा के मोहन शर्मा(Photo) यहां के विधायक रहे..लेकिन उनकी दबंग कार्यशैली ने जनता को नाराज किया..

वर्ष 2013 के चुनाव में इसका फायदा कांग्रेस के गिरीश भंडारी को मिला और उन्होंने शर्मा को 23 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी…इस खाई को पिछले चुनाव में काफी हद तक दो बार के विधायक राजवर्धन सिंह ने पाटा… जानकारों की मानें तो नरसिंहगढ़ पहले जनसंघ और 80 के दशक से भाजपा के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा.. 80 के बाद वह यहां चार बार हारी भी तो इसकी मूल वजह उसकी अपनी अंदरूनी कलह बताई जाती है…
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नरसिंहगढ़ के जातिगत समीकरण( जातीय आंकड़े अनुमानित )
कुल मतदाता                            2,14,582
अजजा                                      35 हजार
मुस्लिम                                     18 हजार
मीना                                        20 हजार
खाती                                      10 हजार
राजपूत                                    12 हजार
ब्राह्मण                                     तीन हजार

मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच ही
करीब 2.32लाख मतदाताओं वाली नरसिंहगढ़ विधानसभा में बडी आबादी अनुसूचित जाति एवं अल्पसंख्यक मतदाताओं की है..अनुसूचित जाति के ही यहां करीब 35 हजार मतदाता हैं..वहीं मुस्लिम करीब 18 हजार,मीना 20 हजार,खाती 10 हजार,राजपूत 12 हजार,व ब्राह्मण करीब तीन हजार हैं…यहां मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच ही रहा है..चुनाव में जातिगत समीकरण भी अधिक मायने नहीं रखते..लेकिन वोटों का विभाजन होने से टक्कर हमेशा कड़ी रही है…आगामी चुनाव को लेकर भी सत्तारूढ़ दल भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है..

लेकिन मौजूदा विधायक की दावेदारी को ही मजबूत माना जा रहा है…वहीं कांग्रेस एक बार फिर पूर्व विधायक गिरीश भंडारी पर दांव लगा सकती है..गिरीश के ताऊ जी मांगीलाल भंडारी दो बार के विधायक रहे हैं..जहां तक विकास कार्यों की बात तो भाजपा शासनकाल में न केवल नरसिंहगढ़ बल्कि समूचे राजगढ़ जिले में सिंचाई साधनों का तेजी से विकास हुआ है..इसके चलते जिले के किसान संपन्न हुए…जिले में सड़कों का जाल बिछा तो नए उद्योग भी आए..बावजूद इसके रोजगार,स्वास्थ्य ,शिक्षा के सदाबहार मुद्दे नरसिंहगढ़ में भी चुनाव प्रचार के दौरान गूंजते हैं…

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