MP Election 2023,मप्र सिरोंज विधानसभा : …. है राष्ट्रवादी विचारधारा की गहरी पैठ

“—-1857 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए विद्रोह का भी यह शहर गवाह रहा — आजादी की लड़ाई के दौरान हिंदू महासभा और बाद में जनसंघ के तमाम दिग्गजों का गढ़ बना — इस विचारधारा ने स्वयं को यहाँ इतनी मजबूती से स्थापित किया ,कि यहां ज्यादातर समय या तो जनसंघ का ‘दीपक ‘ रोशन हुआ या ‘ कमल ‘ खिला.”

रवि अवस्थी।भोपाल // मध्यप्रदेश का एक अत्यंत प्राचीन शहर..जो आजादी मिलने तक राजस्थान की टोंक रियासत का हिस्सा रहा… तो 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए विद्रोह का भी यह शहर गवाह रहा — आजादी की लड़ाई के दौरान हिंदू महासभा और बाद में जनसंघ के तमाम दिग्गजों का गढ़ बना —

इस विचारधारा ने स्वयं को यहाँ इतनी मजबूती से स्थापित किया ,कि यहां ज्यादातर समय या तो जनसंघ का ‘दीपक ‘ रोशन हुआ या ‘ कमल ‘ खिला — — जी हां , हम बात कर रहे हैं विदिशा जिले के सिरोंज विधानसभा सीट की…जो मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही अस्तित्व में आई … आइये जानते है अब तक कैसा रहा इस सीट का सियासी मिजाज ——-
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* सिरोंज,विदिशा जिले की एक अहम सीट
* इस सीट पर अब तक हुए 14 बार चुनाव
* सिरोंज में राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रभाव
* कांग्रेस को यहाँ मिली सिर्फ 3 बार विजय
* हिन्दू महासभा,जनसंघ की रही गहरी पैठ
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कांग्रेस का कोई बड़ा नेता यहां उभर नहीं सका

सिरोंज में यूं तो ज्यादातर वक्त भाजपा या इसके पूर्ववर्ती संगठन हावी रहे..लेकिन वर्ष 1972,1985 एवं 2013 में इनके विजयी रथ को रोकने में कामयाबी पाई…हालांकि सिरोंज के मतदाताओं को यह बदलाव रास नहीं आया और अगले ही चुनाव में उन्होंने एक बार फिर राष्ट्रवादी विचारधारा पर ही भरोसा जताया…

इसके चलते वर्ष 2013 में लंबे अरसे से बाद कांग्रेस के खाते में आई यह सीट उससे एक बार फिर छिन गई..और पिछले चुनाव में यहां बीजेपी के उमाकांत शर्मा ने अपने परिवार की परंपरागत सीट पर वापसी की….सिरोंज का नाम उस वक्त और चर्चा में आया ..जब तत्कालीन विधायक लक्ष्मीकांत शर्मा प्रदेश के जनसंपर्क एवं खनिज मंत्री बने..

बाद में उनका नाम बहुचर्चित व्यापमं कांड से जुड़ा..मंत्री रहते वह जेल गए.. हालांकि इस कांड को लेकर और भी कई किस्से हैं.. इसके चलते शर्मा परिवार के प्रति लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई और वर्ष 2018 के चुनाव में इसी परिवार के उमाकांत विधायक चुने गए…लंबे अर्से तक सीट पर भाजपा या इसके पूर्ववर्ती संगठनों के काबिज रहने से कांग्रेस का कोई बड़ा नेता यहां उभर नहीं सका…

वहीं पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा रहें हो या उनके भाई उमाकांत जनता से जीवंत संपर्क एवं क्षेत्र विकास के प्रति उनके जज्बे से वह एक बार फिर सशक्त दावेदार हैं… सूबे के दोनों ही प्रमुख दलों के समक्ष यहां विकल्प का टोटा है..ऐसे में क्षेत्र की कमान एक बार फिर शर्मा परिवार के पास रहे … तो आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए…
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सिरोंज सीट से अब तक चुने गए विधायक
1957 मदनलाल ,                               हिंदू महासभा
1962 मदनलाल ,                              हिंदू महासभा
1967 एम सिंह ,                                जनसंघ
1972 खान तराजी,                           कांग्रेस
1977 शरीफ मास्टर                         जनता पार्टी
1980 राधारमण भार्गव ,                   बीजेपी
1985 गोवर्धन उपाध्याय ,                 कांग्रेस
1990 भवानी सिंह ,                        बीजेपी
1993 लक्ष्मीकांत शर्मा ,                 बीजेपी
1998 लक्ष्मीकांत शर्मा ,                  बीजेपी
2003 लक्ष्मीकांत शर्मा ,                  बीजेपी
2008 लक्ष्मीकांत शर्मा ,                   बीजेपी
2013 गोवर्धन उपाध्याय ,                कांग्रेस
2018 उमाकांत शर्मा ,                     बीजेपी
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पेयजल और सिंचाई के साधनों की कमी बड़ी समस्या

बीते तीन दशक में वर्ष 2013 में बीजेपी को करीब डेढ़ हजार मतों से पराजय का सामना करना पड़ा —- इसकी एक बड़ी वजह वोटों का ध्रुवीकरण होना बताया गया — करीब 2 .1 4 लाख मतदाता वाली सिरोंज विधानसभा के जातिगत समीकरण को देखें तो यहाँ 34 हजार मतदाता अनुसूचित जाति वर्ग से , मुस्लिम लगभग 37 हजार, कुशवाह 18 हजार, यादव 19 हजार व ब्राह्मण 15 हजार हैं— इनके एकतरफा वोटिंग चुनाव में निर्णायक साबित होते रहें हैं —- 2023 के चुनाव में इनके मतों का विभाजन होगा या इतिहास दोहराया जायेगा यह आने वाला वक्त बताएगा…

जहाँ तक मुद्दों की बात तो क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के साधनों की कमी बड़ी समस्या है—- क्षेत्र के कुछ गांवों में सालभर पानी की किल्लत बनी रहती है—विकल्प के तौर पर क्षेत्रीय विधयक ने जगह -जगह पानी की बड़ी टंकियां स्थापित कराईं —- सिरोंज को जिला बनाने व रेलवे लाइन लाए जाने की मांग लम्बे समय से उठाई जाती रहीं हैं …..
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क्षेत्र के ये हैं चुनावी मुद्दे
पेयजल और सिंचाई के साधनों की बड़ी कमी
समीपस्थ बांधों से पानी लाने के प्रयास अधूरे
सिरोंज को जिला बनाने की होती रही है मांग
क्षेत्र में रेल लाइन लाने के प्रयास भी अधर में
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की लम्बे अर्से से मांग
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