भोपाल(9826019364)।
मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान का दायरा अब और बढ़ने जा रहा है।
कूनो और गांधीसागर के बाद अब सागर का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व भी चीतों का नया घर बनेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को दो चीतों को जंगल में विमुक्त करेंगे।
इसके साथ ही मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास तैयार हो जाएगा।
कूनो से सागर पहुंचेंगे दो चीते

वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन पर यह कार्यक्रम होगा।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक नर और एक मादा चीते को लाया जाएगा।
इनमें नर थोलो और मादा CCB-3 शामिल हैं।
दोनों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा।
इस कदम से बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सुबह उज्जैन, दोपहर में सागर जाएंगे सीएम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सागर पहुंचने से पहले उज्जैन के प्रवास पर रहेंगे।
वह सुबह पौने आठ बजे भोपाल से उज्जैन के लिए रवाना होंगे।
मुख्यमंत्री सुबह साढ़े आठ बजे वहां एक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे।
इसके बाद दोपहर करीब एक बजे हेलीकॉप्टर से सागर के लिए रवाना होंगे।
डॉ. यादव रहली विधानसभा क्षेत्र के मोहाली गांव पहुंचेंगे।
यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह वीरांगना दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व जाएंगे।
यहां मुख्यमंत्री कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे।
439 हेक्टेयर में तैयार हुआ सुरक्षित ठिकाना

चीतों के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
यहां सुरक्षित बाड़े यानी बोमा बनाए गए हैं।
चीतों की लगातार निगरानी होगी।
उनके स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जाएगी।
वन विभाग ने सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की है।
क्षेत्र में अन्य वन्यजीवों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार किया गया है।
2,339 वर्ग किमी में फैला है रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को पहले नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता था।
यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला है।
इसका क्षेत्रफल करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर है।
यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल और सांभर पाए जाते हैं।
नीलगाय और भालू भी इस क्षेत्र में हैं।
यह इलाका भारतीय गिद्धों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
चीते आएंगे तो बढ़ेगा पर्यटन

चीतों की मौजूदगी से वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सागर और बुंदेलखंड में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है।
इसका सीधा फायदा स्थानीय कारोबार को मिलेगा।
होटल और रिसॉर्ट कारोबार को नई गति मिल सकती है।
होम-स्टे, गाइड और वाहन चालकों को भी काम मिलेगा।
हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
देश में अब 60 चीते

भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में नामीबिया से आए चीतों को विमुक्त किया था।
इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए।
अब यह अभियान दूसरे उपयुक्त वन क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
5 अक्टूबर 2026 को कूनो में पांच चीता शावकों का जन्म हुआ।
इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई।
इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं।
कूनो में रहेंगे 54 चीते

दो चीतों के सागर आने के बाद कूनो में 54 चीते रहेंगे।
वहीं गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक मौजूद हैं।
मादा चीता धीरा भी वहां है।
सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता राधा भी गांधीसागर में है।
सागर से शुरू होगा नया अध्याय
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की मौजूदगी महत्वपूर्ण कदम है।
इससे मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण का विस्तार होगा।
कूनो से शुरू हुआ अभियान अब बुंदेलखंड तक पहुंच गया है।
अब सागर में चीतों की नई दुनिया बसने जा रही है।
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