Aashta Assembly: आष्टा विधानसभा जहां 10 में से 8 बार खिला “कमल “

“कांग्रेस से तीन बार के प्रत्याशी रहे गोपाल सिंह इंजीनियर की भाजपा में आमद से आष्टा में भाजपा से टिकट चाहने वालों की संख्या बढ़ गई है।एक और तीन बार के विधायक रणजीत गुणवान के पोते सोनू गुणवान तो दो बार के मौजूदा विधायक रघुनाथ मालवीय टिकट की उम्मीद लगाए हैं।

तीनों ही इस क्षेत्र में सर्वाधिक दबदबा रखने वाले बलाई समाज से आते हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में प्रत्याशी का चयन बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इससे कहीं अधिक चुनौती टिकट से वंचित रहने वालों को साधने की होगी।”

रवि अवस्थी। Aashta Assembly भोपाल ,इंदौर मार्ग के बीच स्थित आष्टा से भला कौन स्थानीय परिचित नहीं…जहां प्रदेश की प्रमुख नदी पार्वती वर्षाकाल में यहां के प्रसिद्ध शिवालय में भगवान शिव का अभिषेक करती नजर आती है…तो समीप ही पहाड़ी पर जैन भगवान नेमिनाथ का भव्य मंदिर आष्टा वासियों की धर्म ,अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि को दर्शाता है…

आष्टा शहर ही नहीं इसके नाम पर बनी समूची विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसा ही वातावरण है.. आष्टा Ashta assembly में भी 2023 के चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है

—- आइये जानते हैं कैसा रहा अब तक अनुसूचित जाति वर्ग के लिए इस सीट का मिजाज .

यहां 46 साल में सिर्फ 2 बार जीती कांग्रेस
आष्टा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर की एक और प्रमुख सीट..वर्ष 1977 में बनी इस सीट पर अब तक 10 बार चुनाव हुए ..इनमें से 8 बार यहां ‘कमल’ खिला… कहना नहीं होगा कि यह भाजपा विशेषकर मुख्यमंत्री शिवराज CM Shivraj के प्रभाव वाली सीट है…यहाँ जीत की शुरुआत ही जनता पार्टी Janta Party से हुई..

तब इस दल के गडरुराम सोरी ने 61 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस के बद्रीनाथ जयदेव को 7676 मतों से शिकस्त दी थी..

1980 में भाजपा BJP बनी तो इस दल के देवीलाल रैकवार ने एक बार फिर कांग्रेस के राजाराम झा को करीब 14 हजार मतों से पराजित किया…कांग्रेस आष्टा में अंतिम बार 1998 में चुनाव जीती और पहली बार 1985 में.. इन दो मौकों को छोड दिया जाए तो उसे हमेशा यहां पराजय Defeat का सामना करना पड़ा …देखें आष्टा सीट का चुनावी इतिहास…
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आष्टा सीट से अब तक विजयी प्रत्याशी व उनका दल
1977 : गडरुराम सोरी                          जनता पार्टी
1980 : देवीलाल रैकवार                       बीजेपी
1985: अजीत सिंह                               कांग्रेस
1990: नंदकिशोर खत्री                        बीजेपी
1993: रणजीत गुणवान                      बीजेपी
1998: मंत्रुराम पवार                          कांग्रेस
2003: रघुनाथ मालवीय                     बीजेपी
2008:रणजीत गुणवान                      बीजेपी
2013 : रणजीत गुणवान                   बीजेपी
2018 : रघुनाथ मालवीय                    बीजेपी
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जातिगत समीकरण अधिक मायने नहीं, चेहरा व दल ही प्रभावी
आष्टा सीट पर कांग्रेस Congress प्रत्याशी के तौर पर पिछले तीन चुनाव लड़ने वाले गोपाल सिंह इंजीनियर ने हाल ही में बीजेपी का दामन थाम लिया…गोपाल ने पहले चुनाव वर्ष 2008 में लड़ा—इसमें बीजेपी के रणजीत सिंह गुणवान ने उन्हें करीब 17 हजार मतों से शिकस्त दी …

वर्ष 2013 में भी वह गुणवान से लगभग 5 हजार और 2018 में बीजेपी के रघुनाथ मालवीय से लगभग 6 हजार मतों से हारे.. हालांकि गोपाल सिंह ने हर बार कड़ी टक्कर दी — इन तीनों चुनाव में उन्हें 42 से 43 प्रतिशत वोट मिले…

लेकिन लगातार तीन बार मिली पराजय ने उन्हें बदलाव के लिए मजबूर कर दिया …अंततः उन्होंने भाजपा का दामन थामना ही बेहतर समझा..सीएम हाउस में मुख्यमंत्री शिवराज ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई…गोपाल बलाई समाज से आते हैं..इस समाज का आष्टा विधानसभा क्षेत्र में दबदबा है…. करीब 2. 69 लाख मतदाता वाले आष्टा विधानसभा में लगभग 50 हजार बलाई एवं 20 हजार अनुसूचित जाति के अन्य मतदाता हैं.. अन्य वर्ग के मतदाताओं की बात करें तो यहां मेवाड़ा ,परमार व पाटीदार यानी ओ बी सी करीब 28 हजार ,मुस्लिम 20 हजार,खाती 15 हजार,आदिवासी 10 हजार व शेष अन्य वर्ग के मतदाता हैं …

जातिगत आधार पर अनुसूचित जाति SC वर्ग के मतदाता सत्ता के समीकरण बनाने में अहम भूमिका अदा करते हैं…लेकिन जातिगत समीकरण यहां अधिक मायने नहीं रखते..बल्कि चेहरा व दल ही प्रभावी है..इसके चलते बीजेपी विगत दो दशक से यहां निरन्तर चुनाव जीतती रही है…
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आष्टा सीट के जातिगत समीकरण

मतदाता             करीब  2. 69 लाख 

अजा वर्ग                      70 हजार
अजजा वर्ग                  10 हजार
ओबीसी                      30 हजार
सेंधव                          20 हजार
खाती                         15 हजार
मुस्लिम                       20 हजार
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प्रत्याशी चयन एक बड़ी चुनौती

आष्टा में भी चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है… तीन बार के पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह गुणवान  Ranjeet singh Gunwan का बीते साल निधन हो गया…इसी क्षेत्र से दो बार के विधायक रहे रघुनाथ मालवीय को एक बार फिर टिकट मिलने की उम्मीद है..

लेकिन तीन बार के कांग्रेस प्रत्याशी रहे गोपाल सिंह इंजीनियर की भाजपा में आमद से मालवीय की दावेदारी का गणित गड़बड़ा गया है…इधर पूर्व विधायक रणजीत सिंह गुणवान के पौत्र सोनू गुणवान भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं..तीनों ही बलाई समाज से आते हैं…

देखा जाए तो करीब 40 सालों तक इस सीट से जीत हासिल करती रही बीजेपी के लिए इस बार प्रत्याशी चयन एक बड़ी चुनौती होगी… इससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होगा अंतर्कलह को थामना… वहीं कांग्रेस को दमदार प्रत्याशी की तलाश है..उसकी नजर भाजपा की अंदरूनी सियासत पर होगी…ऐसे में आष्टा सीट से इस बार ताज किसके सिर बंधेगा..इसके लिए चुनाव तक करना होगा इंतजार…

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