सिंगरौली में अवैध रेत खनन:सिया सदस्य ने जांच से पल्ला झाड़ा,अध्यक्ष,सचिव भी खामोश
सिंगरौली में अवैध रेत खनन की जांच 51 दिन बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। मानसून के बीच सबूत मिटने की आशंका बढ़ गई है, जबकि केंद्र के निर्देशों पर भी कार्रवाई अटकी हुई है।
ऊर्जा नगरी सिंगरौली में नदियों का सीना छलनी कर अवैध रेत खनन और परिवहन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं और जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। स्थिति यह है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद गठित जांच समिति भी तय समय सीमा में काम नहीं कर सकी।
मामला जिले में रेत खनन का काम कर रही सहकार ग्लोबल लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी पर जीवनदायिनी नदियों से निर्धारित मानकों से अधिक रेत खनन और परिवहन करने के आरोप लगे हैं। शिकायत के बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य के पर्यावरण विभाग को जांच के निर्देश दिए थे।
51 दिन बाद भी मौका मुआयना नहीं
राज्य पर्यावरण विभाग के निर्देश पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के सचिव ने विगत 11 मई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति की अध्यक्षता सिया सदस्य डॉ. सुनंदा सिंह रघुवंशी को सौंपी गई थी। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। हैरत की बात यह कि समिति ने अब तक न तो स्थल निरीक्षण किया और न ही जांच पूरी की।
करीब पखवाड़े भर पहले समिति अध्यक्ष ने जल्द सिंगरौली पहुंचकर जांच करने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने स्वयं जांच से अलग होने की जानकारी दी है।
उनका कहना है कि नई समिति गठित की गई है, हालांकि वे उसके सदस्यों की जानकारी नहीं दे सकीं। वहीं, सिया सचिव सुधीर कोचर(In center photo) का अधिक फोकस अपने दूसरे दायित्वों पर है।
जबकि सिया अध्यक्ष एस.एन.एस. चौहान(In Photo,right)ने भी किसी तरह की प्रतिक्रिया देने में असमर्थता जताई।
सबूत मिटने का खतरा पैदा
अवैध रेत खनन के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच की टाइमिंग को लेकर उठ रहा है। शिकायत वर्ष की शुरुआत में हुई थी और मई में जांच समिति गठित कर दी गई, लेकिन कार्रवाई मानसून तक टाली जाती रही। मानसून अब सिर पर है। प्रदेश में यह सक्रिय हो चुका है। ऐसे में जिन स्थानों पर अवैध खनन के आरोप हैं, वे जल्द ही जलमग्न हो सकते हैं। इससे संभावित साक्ष्य नष्ट होने और जांच प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
शिकायतकर्ता विश्वमित्र शाहने गत 15 मई को ही सिंगरौली एडीएमको आवेदन देकर मानसून से पहले जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने भुड़ाखुद, राजामिलन और हर्राहवा क्षेत्र के खसरा क्रमांक 412 और 413 में मशीनों से निर्धारित सीमा से अधिक खनन किए जाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने यह भी बताया कि मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में भी विचाराधीन है। ट्रिब्यूनल की स्वतंत्र जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो विभागीय जांच में सहायक हो सकते हैं लेकिन उनकी शिकायत पर स्थानीय प्रशासन ने गौर नहीं किया।
प्रशासनिक सुस्ती से बेखौफ हुआ रेत माफिया
सिंगरौली जिले की सोन, रिहंद, महान और गोपद जैसी प्रमुख नदियों में अवैध रेत खनन के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। बैढ़न थाना क्षेत्र के बलियरी गांव में रेण नदी से अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रेत की ढुलाई कर रही हैं। प्रशासनिक ढिलाई से रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं और रात के अंधेरे में खनन व परिवहन जारी है।
मानसून से पहले अवैध भंडारण की होड़
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश शुरू होने से पहले रेत के अवैध भंडारण का खेल भी तेज हो गया है। पूरी रात गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे लोगों की नींद और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में एक ट्रॉली रेत 4000 से 5,000 रुपये तक बेची जा रही है। आशंका है कि बारिश के मौसम में बढ़ती मांग और ऊंचे दामों का फायदा उठाने के लिए अभी से बड़े पैमाने पर रेत का स्टॉक तैयार किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने पकड़ीं ट्रॉलियां, कार्रवाई फिर भी अधूरी
खनन गतिविधियों से परेशान ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाला और रेत से भरी चार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़कर प्रशासन के हवाले कर दीं। इसके बाद खनिज विभाग ने जेसीबी से नदी के पहुंच मार्ग पर अवरोधक खड़े कर औपचारिक कार्रवाई की, लेकिन न तो कथित अवैध भंडारण जब्त किया गया और न ही माफिया के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई। सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा है, हालांकि संबंधित विभागों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।