MP:लोकायुक्त में ‘रिश्वत कनेक्शन’ ,दो DSP हटाए गए

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भोपाल।

भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि कुछ अधिकारी-कर्मचारी आरोपियों को राहत दिलाने और जांच प्रभावित करने के बदले लेनदेन में शामिल थे।

मामले की भनक लगते ही लोकायुक्त प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दो डीएसपी स्तर के अधिकारियों को संगठन से हटाकर पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) भेज दिया है।

इससे पहले तीन पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है।

स्टिंग के बाद मचा हड़कंप

सूत्रों के अनुसार, एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका उजागर हुई, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने के लिए पैसों के लेनदेन की बातें सामने आईं।

इसके बाद लोकायुक्त एडीजी योगेश देशमुख ने हेड कॉन्स्टेबल रामदास कुर्मी, यशवंत सिंह ठाकुर और कॉन्स्टेबल गौरव साहू को तत्काल निलंबित कर दिया।

दो डीएसपी पीएचक्यू अटैच, निलंबन प्रस्ताव भी भेजा

कार्रवाई की आंच अधिकारियों तक भी पहुंची। डीएसपी बी.एम. द्विवेदी और मंजू सिंह को लोकायुक्त से हटाकर पीएचक्यू अटैच कर दिया गया है।

दोनों के निलंबन का प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं प्रधान आरक्षक बृज बिहारी पांडेय के खिलाफ निलंबन और संविदा चालक अमित विश्वकर्मा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

जांच एजेंसियों की साख पर फिर सवाल

इस घटनाक्रम ने प्रदेश की प्रमुख जांच एजेंसियों,लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों एजेंसियों का कन्विक्शन रेट कमजोर रहा है।कई चर्चित मामलों में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।

 

सौरभ शर्मा केस से भी उठे थे सवाल

बहुचर्चित सौरभ शर्मा मामले में भी लोकायुक्त की कार्रवाई को लेकर आलोचना हुई थी। आरोप लगे कि शुरुआती जांच अपेक्षित गति और गंभीरता से नहीं हुई, जिसके बाद आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हस्तक्षेप करना पड़ा।

ईओडब्ल्यू की कार्यशैली भी घेरे में

यही हाल,ईओडब्लयू का है। भोपाल के गौतम नगर स्थित साइंस हाउ का प्रकरण इसकी बानगी है।

ईओडब्लयू की रीवा इकाई ने इस केस में आरोपियों की धरपकड़ की तो आश्चचर्यजनक तरीके से इस केस को भोपाल मुख्यालय ट्रांसफर कर नए सिरे से कायमी की गई।

कांग्रेस के हेमंत कटारे ने विधानसभा के एक सत्र में ईओडब्लयू में बीते एक दशक में दर्ज प्रकरणों की जानकारी मांगी तो ब्यूरो के अफसरों ने साइंस हाउस से जुड़े केस को छिपा लिया।

सदन में दी गई जानकारी में इसका उल्लेख ही नहीं किया गया। ब्यूरो अफसर यह कहकर मामले को टालते आए कि भूल से यह केस जानकारी देने में छूट गया। हालांकि अब तक इस प्रकरण में ब्यूरो की जांच मंथर गति से जारी है।