ग्वालियर।
शीतला माता मंदिर हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हादसे को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए
ग्वालियर कलेक्टर और एसपी को हटाने की मांग की है।
बुधवार को ग्वालियर पहुंचे पटवारी ने घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद केवल जांच का भरोसा देना पर्याप्त नहीं है।
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि
निलंबन और लाइन अटैच करने जैसी कार्रवाई कई बार जवाबदेही तय करने के बजाय औपचारिकता बनकर रह जाती है।
उन्होंने हादसे की परिस्थितियों और राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की मांग ऐसे समय आई है, जब जिला प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
जिस रास्ते पर साइकिल नहीं जा सकती, वहां ट्रक कैसे पहुंचे?

(हादसे में मृतक के परिजनों का सांत्वना देते मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी।)
पटवारी ने हादसे के सबसे अहम सवाल को उठाते हुए कहा कि जिस रास्ते पर साइकिल तक
नहीं जा सकती, वहां दो भारी ट्रक कैसे पहुंच गए?
उनका सवाल है कि जब मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था,
तो ट्रकों को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी और बैरिकेडिंग के बावजूद वे आगे कैसे निकल गए?
18 अक्टूबर की रात शीतला माता मंदिर के पास श्रद्धालुओं की भीड़ में धान से भरा ट्रक घुस गया था।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं और सड़क किनारे लगी प्रसाद
की दुकानों से टकराया और मंदिर के प्रवेश द्वार से जा भिड़ा।
हादसे में कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए।
शुरुआती जांच में वाहन के नियंत्रण से बाहर होने और तकनीकी खराबी की आशंका भी सामने आई थी।
पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी,
तो केवल चालक की गलती की जांच से काम पूरा नहीं होगा।
यह भी देखना होगा कि प्रवेश रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे,
मौके पर कौन तैनात था और नियमों का पालन क्यों नहीं कराया जा सका।
घायलों को समय पर इलाज नहीं मिलने का आरोप
मुख्यमंत्री जी,
आप ग्वालियर आए, लेकिन महज़ मुंह दिखाई की रस्म निभाकर चले गए! हादसे के पीड़ितों का दर्द महसूस करना तो दूर, आप उनकी वेदना से रूबरू तक नहीं हुए!आपकी सरकार हादसे के बाद घंटों तक न एंबुलेंस पहुँचा पाई, न मलबे में फंसे लोगों को समय पर निकाल पाई और न ही घायलों को तत्काल उपचार मुहैया करा पाई! यह हादसा आपकी सरकार की बदहाल व्यवस्था, संवेदनहीनता और घोर लापरवाही का कलंक है।
अगर ज़रा भी शर्म और जवाबदेही बाकी है, तो वास्तविक दोषियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई का साहस कीजिए।
📍रिम्स हॉस्पिटल, ग्वालियर
@DrMohanYadav51
@CMMadhyaPradesh— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 21, 2026
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राहत और चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
उनके आरोपों के मुताबिक, कुछ घायलों को एंबुलेंस और उपचार मिलने में देरी हुई।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग कई घंटे तक गंभीर हालत में मदद का इंतजार करते रहे।
उन्होंने एक घायल को कथित तौर पर 24 घंटे तक डॉक्टर नहीं मिलने
और बाद में उसके दोनों पैर काटने पड़ने का भी दावा किया।
पटवारी ने पीड़ित परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने
अपने कई सदस्यों को खो दिया, उनकी स्थिति को समझना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ओर से घायलों को एयरलिफ्ट कराने की
पहल के बावजूद कुछ मरीजों को उचित इलाज मिलने में परेशानी हुई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अस्पतालों का पक्ष सामने आना बाकी है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार की समय-सीमा, मरीजों की स्थिति
और चिकित्सा सहायता के रिकॉर्ड सामने आने से इस पहलू की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
हादसे में 16 लोगों की मौत, 41 घायल
शीतला माता मंदिर के पास हुए इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।
हादसे के बाद घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
गंभीर रूप से घायल कुछ मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भोपाल भी भेजा गया।
इस हादसे ने मंदिर मेले में भीड़ प्रबंधन, भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और
आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खासकर ऐसे धार्मिक आयोजनों में, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल पहुंचते हैं,
वहां प्रवेश मार्गों की निगरानी और सुरक्षा इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
कलेक्टर ने ADM सीबी प्रसाद को सौंपी जांच

(ADM सीबी प्रसाद)
हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के लिए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने
अपर कलेक्टर(ADM) सीबी प्रसाद को जिम्मेदारी सौंपी है।
उन्हें सात दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
बुधवार से घटना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
प्रतिबंधित मार्ग पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे?
प्रवेश रोकने के लिए बैरिकेडिंग और सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
घटना के समय किस अधिकारी और कर्मचारी की कहां ड्यूटी थी?
भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए जारी निर्देशों का पालन हुआ या नहीं?
हादसे के बाद राहत, बचाव और चिकित्सा सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध कराई गई?
जांच का उद्देश्य दुर्घटना की परिस्थितियों और संभावित लापरवाही का पता लगाना तथा जिम्मेदारी तय करना है।
रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
पटवारी की मांग—सिर्फ निलंबन नहीं, जवाबदेही भी तय हो
जहाँ साइकिल ले जाने तक पर प्रतिबंध था, वहाँ ट्रक कैसे पहुँच गए? दर्दनाक हादसे में घायल लोग 4-4 घंटे तक इलाज के लिए इंतज़ार करते रहे, फिर भी जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं!
आखिर इस सरकार में संवेदनशीलता बची भी है या नहीं?
📍ग्वालियर https://t.co/pc7rIVRuyw
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 21, 2026
जीतू पटवारी ने कहा कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद कलेक्टर और एसपी को हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना
और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने प्रदेश में लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला।
पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में कठोर जवाबदेही तय नहीं हो रही है।
ये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; मामले में अधिकारियों की वास्तविक जिम्मेदारी जांच
के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
सबसे बड़ा सवाल: प्रतिबंधित रास्ते पर ट्रक को किसने पहुंचने दिया?
ग्वालियर हादसे के बाद अब जांच का केंद्र केवल ट्रक की गति या तकनीकी स्थिति नहीं,
बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की पूरी श्रृंखला है। यदि भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था,
तो बैरिकेडिंग, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और प्रवेश नियंत्रण की व्यवस्था की पड़ताल जरूरी है।