गुना में बीजेपी नेताओं की बैठक में सुलग रही असंतोष की चिंगारी सार्वजनिक हो गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नेताओं को संगठन की मजबूती पर चर्चा कम और अपनों के खिलाफ उपेक्षा और नाराजगी का गुबार ज्यादा बाहर निकलने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नेता शिकायत करने की परंपरा को छोड़ें और याद रखें कि यह पार्टी अम्मा-महाराज (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया) के सिद्धांतों और प्रयासों से खड़ी हुई है। हम सभी का एकमात्र लक्ष्य इसे मजबूत बनाना होना चाहिए।
भाजपा नेताओं की बैठक में असंतोष की चिंगारी
गुना में तेलघानी स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में संगठन की मजबूती पर चर्चा कम और अपनों के खिलाफ उपेक्षा और नाराजगी का गुबार ज्यादा बाहर निकला। हालात इस कदर असहज हो गए कि खुद केंद्रीय मंत्री सिंधिया को कड़े लहजे में नसीहत देनी पड़ी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नेता शिकायत करने की परंपरा को छोड़ें और याद रखें कि यह पार्टी अम्मा-महाराज (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया) के सिद्धांतों और प्रयासों से खड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि हम सभी का एकमात्र लक्ष्य इसे मजबूत बनाना होना चाहिए। विधायकों और पार्षदों की दूरी चर्चा में रही इस पूरी बैठक का सबसे चौंकाने वाला पहलू कुछ प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति रही। सिंधिया जैसे कद्दावर नेता की बैठक से विधायक पन्नालाल शाक्य और प्रियंका मीना पूरी तरह गायब रहे।
सिंधिया की नसीहत के बाद भी असंतोष का गुबार
हालांकि, जब व्यापार प्रकोष्ठ और चैंबर ऑफ कॉमर्स के नेताओं ने सुझाव दिया कि यदि सिंधिया के दौरे का कार्यक्रम कुछ दिन पहले मिल जाए तो स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े कई लाभकारी कार्यक्रम जोड़े जा सकते हैं, तो केंद्रीय मंत्री ने इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि वे अब अपने संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग समय पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
लेकिन, यह साफ नहीं है कि सिंधिया की नसीहत के बाद भी असंतोष का गुबार कितना कम होगा। सूत्रों की मानें तो पार्षद नपा अध्यक्ष की कार्यशैली और मनमानी से लंबे समय से खफा हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी जब अध्यक्ष के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षदों ने विरोध स्वरूप इस बार सिंधिया से मुलाकात करने से भी दूरी बना ली।
संगठन के भीतर गुटबाजी और खींचतान
राजनीतिक जानकारों की मानें तो गुना विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्षदों का यह सामूहिक किनारा साफ संदेश दे रहा कि गुना भाजपा के भीतर अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान अब चरम पर पहुंच चुकी है, जिसे समय रहते न संभाला गया तो आगामी समय में संगठन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- गुना भाजपा के भीतर अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है।
- विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्षदों का सामूहिक किनारा साफ संदेश दे रहा है।
- संगठन को समय रहते न संभालने से बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सिंधिया की नसीहत के बाद आगे क्या होगा?
अब देखना होगा कि सिंधिया की नसीहत के बाद भी असंतोष का गुबार कितना कम होगा। सूत्रों की मानें तो पार्षद नपा अध्यक्ष की कार्यशैली और मनमानी से लंबे समय से खफा हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी जब अध्यक्ष के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षदों ने विरोध स्वरूप इस बार सिंधिया से मुलाकात करने से भी दूरी बना ली।
लेकिन, यह साफ नहीं है कि सिंधिया की नसीहत के बाद भी असंतोष का गुबार कितना कम होगा। संगठन के भीतर गुटबाजी और खींचतान को समय रहते न संभालने से बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।