Corruption मप्र:क्लर्क से खनिज अफसर बन हुआ फैक्ट्री मालिक:बेटे को बनाया सरकारी ठेकेदार

” जोड़ तोड़ कर वह खनिज अधिकारी बन बैठा। लंबा समय धार जिले में गुजारा। चंद माह पहले ही उसे देवास पदस्थ किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उसने बेजा संपत्ति जुटाई और बेटे को भी सरकारी ठेकेदार बनाकर अपने गोरखधंधे में शामिल कर लिया।”

 

देवास। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार Corruption चरम पर है। देवास के खनिज अफसर पर पडे लोकायुक्त छापे में मिली अकूत संपत्ति इसका उदाहरण है। खास बात यह कि आरोपी करीब 32 साल पहले विभाग में जियालॉजिस्ट सहायक ग्रेड 3 के पद पर भर्ती हुआ था।

जोड़ तोड़ कर वह खनिज अधिकारी बन बैठा। लंबा समय धार जिले में गुजारा। चंद माह पहले ही उसे देवास पदस्थ किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उसने बेजा संपत्ति जुटाई और बेटे को भी सरकारी ठेकेदार बनाकर अपने गोरखधंधे में शामिल कर लिया।

प्राप्त जानकारी अनुसार, लोकायुक्त की टीम ने उनके चार ठिकानों पर मंगलवार को दबिश दी। टीम ने देवास के अलावा इंदौर के तुलसीनगर में स्थित मकान, उज्जैन के मकान और पीथमपुर की क्रेशर प्लांट में सर्चिंग की। सुबह से शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक चली। उनके पास आलीशान मकान, लग्जरी कारों के साथ नकदी और लाखों के जेवर मिले हैं।

लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में केस दर्ज किया है। अधिकारी ने नौकरी से करीब सवा करोड़ रुपए वेतन के रूप में लिए, जबकि जांच में आय से करीब छह गुना अधिक मूल्य की अचल और चल संपत्ति मिली है।

इंदौर में दो टीम, एक टीम पीथमपुर Pithampur और एक टीम ने उज्जैन ने सर्चिंग की। सुबह 5:30 बजे से लोकायुक्त के अधिकारी ठिकानों पर पहुंचे और दस्तावेजों को खंगाला।

डीएसपी लोकायुक्त, इंदौर आनंद कुमार यादव ने बताया कि डॉ. मोहन सिंह खतेड़िया के यहां से काफी दस्तावेज मिले हैं। वर्तमान में इनका वेतन करीब डेढ़ लाख रुपए है। ये इंदौर के अलावा धार, देवास में पदस्थ रहे हैं। इनकी संपत्तियां उज्जैन, इंदौर, धार जिले में हैं।

उज्जैन में मकान, पीथमपुर के ग्राम खंडवा के खेड़ा में RMC प्लांट है। यह बेटे के नाम पर है। इंदौर का तुलसी नगर स्थित मकान भाई के नाम पर है। पिछले पांच महीने से देवास में पदस्थ हैं। इसके पहले वे धार में पदस्थ थे।

सर्चिंग में मिली अचल संपत्ति

– इंदौर में तुलसी नगर स्थित तीन मंजिला भवन
– उज्जैन में महाकाल वाणिज्यिक सेक्टर-सी में तीन मंजिला एक अन्य भवन।
– देवगुराड़िया में व्यावसायिक उपयोग का भूखंड।

– नायता मुंडला इंदौर में जमीन।

– दाहोद (गुजरात) में पत्नी के नाम भूखंड।

– पुत्र के प्रोपराइटरशिप में स्वयं के नाम से बनाई कंपनी एमएस कंस्ट्रक्शंस (मोहन सिंह कंस्ट्रक्शंस) के नाम से एक रेडी मिक्स क्रेशर प्लांट पीथमपुर में।

चल संपत्ति में यह मिला

– स्वयं के नाम की उपरोक्त कंपनी के टाटा बल्कर(22-व्हीलर) डंपर ट्रक : कुल 3 ट्रक।
– स्वयं के नाम की उपरोक्त कंपनी के ट्रांजिट-मिक्सर (10-व्हीलर) ट्रक : कुल 4 ट्रक (2 टाटा कंपनी,1 आइशर,1 महिंद्रा)।
– एक महिंद्रा थार एसयूवी, एक मारुति ब्रेजा कार।
– घर से करीब साढ़े तीन लाख रुपए नकदी। इतनी ही राशि के आभूषण।
– 5 बैंक खाते और एक बैंक लॉकर की जानकारी मिली।

जियोलॉजिस्ट से भर्ती , बने अधिकारी

डॉ. मोहन सिंह खतेड़िया 1991 में खनिज विभाग में जियोलॉजिस्ट सहायक ग्रेड-2 के रूप में भर्ती हुए थे, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों से सांठ-गांठ कर प्रभारी खनिज अधिकारी बन गए।

धार जिले में भी खतेड़िया लंबे तक पदस्थ रहे। यहां से एक बार ट्रांसफर हुआ तो कुछ समय बाद फिर से वापस धार में पोस्टिंग करवा ली।

पांच महीने पहले ही धार से देवास उनका ट्रांसफर हुआ था।

पिता माइनिंग अधिकारी, बेटा ठेकेदार
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला खनिज अधिकारी रहते हुए खतेड़िया ने अपने बेटे नयन को सरकारी ठेकेदार बनाया। जिस जिले में खतेड़िया पदस्थ रहते थे, उस क्षेत्र के सरकारी काम अपने बेटे को दिला दिया करते थे।

इसके अलावा खदान वालों से औने-पौने दाम पर गिट्टी और रेत के ट्रक सस्ते दाम पर दिलाने का दबाव भी बनाते थे। पहले बेटे नयन द्वारा इंदौर के पास ग्राम सनावदिया में आरएमसी प्लांट डाला गया था,

लेकिन जब पिता को धार में पदस्थापना मिली तो बेटे ने जुगाड़ लगाकर प्लांट भी पीथमपुर में स्थानांतरित कर लिया था। ठेकेदार बेटे की कंपनी में 4 बल्कर जैसे बड़े वाहन हैं, इन वाहनों से बड़े प्लांट से राख लाकर सीमेंट फैक्ट्री में डाली जाती है।

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