वह सर्वस्पर्शी हैं, ‘तो सबका साथ,सबका विकास व सबका विश्वास’ पर भी उनका भरोसा है। मुसीबत के वक्त पीड़ितों की बीच खड़े रहने की बात हो या आनंद के मौके पर अपनी खुशी बांटने की,शिवराज ने एक कुशल राजनेता की भांति इस काम को अब तक बखूबी अंजाम दिया है।” .…रवि अवस्थी ➤
किसी शायर ने कहा— हुकूमत वही करते हैं जो दिलों पर राज करते हैं। शिवराज ऐसे ही विरले राजनेताओं में एक हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण हों या राजधानी के वाशिंदे,वह सबके दिलों में बसे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनके मंत्रिमंडल सहयोगी, बतौर मुख्यमंत्री शिवराज के कामकाज व प्रदेश के विकास में उनके योगदान की सराहना करना नहीं भूलते।
सीहोर जिले के ग्राम जैत के सामान्य परिवार में जन्मे शिवराज के मन में पीड़ितों की सेवा का भाव बाल्यकाल से ही रहा। गरीबी को उन्होंने नजदीक से देखा। इनकी पीड़ा को भी समझा।
सूबे के मुखिया के लिए प्रदेश एक परिवार है तो स्वाभाविक है,राज्य की महिलाएं इसकी धुरी हैं। अपने 64वें जन्मदिन पर जो सौगात लाड़ली बहना योजना के माध्यम से शिवराज एक करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को देने जा रहे हैं ,वह इन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
सिर्फ गरीब महिलाओं की चिंता ही नहीं बल्कि उन बेटियों की भी उतनी ही फिक्र जिन्हें पढ़ा -लिखा कर आत्मनिर्भर बनाना है।मुख्यमंत्री शिवराज की इसी सोच ने लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजना को ईजाद किया।
कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने यानी अंतिम पंक्ति तक के व्यक्ति को इसका लाभ पहुंचाने को लेकर भी शिवराज गंभीर रहे हैं।
बीते दस वर्षों में प्रदेश की विकास दर में 319 प्रतिशत की छलांग,पिछले वित्तीय वर्ष में इसका 16.43 प्रतिशत बने रहना व प्रति व्यक्ति आय में साल दर साल हो रही बढ़ोतरी,देश की जीडीपी में मप्र की 4.8 प्रतिशत की भागीदारी दर्शाती है कि मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की और बढ़ रहा है।
ईंधन विकल्प के तौर पर मध्य प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की शुरुआत,एक जिला-एक उत्पाद अंतर्गत महुआ सहित अनेक लघु वनोपज के निर्यात को बढ़ावा,स्टार्टअप के क्षेत्र में युवा पीढ़ी के बढ़ते कदम व पहली बार जिला कलेक्टरों का गांव तक पहुंचकर जन समस्याओं की सुनवाई व निराकरण करना अनेक ऐसे उदाहरण हैं।
शिवराज का व्यक्तित्व उदारता का रहा है,लेकिन चौथे कार्यकाल में वक्त की मांग के लिहाज से उन्होंने स्वयं को बदला। एक और प्रदेश में अतिक्रमणकारियों व माफिया के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए तो गरीबों को सताने वालों के आशियाने ध्वस्त कर उन्हें सबक भी सिखाया।
जरूरतमंद के काम बिना लेनदेन के समय पर हो जाएं ,यह सुशासन है। मुख्यमंत्री सुशासन की यह परिभाषा समय-समय पर बताते भी रहे हैं।