भोपाल में 5 एकड़ हरियाली पर संकट! पेड़ काटकर बनेगा राजस्व भवन, शहर के बीच निर्माण की तैयारी पर उठे सवाल

भोपाल में पांच एकड़ हरियाली हटाकर राजस्व कार्यालय बनाने की योजना की खबर सामने आई है। इससे पेड़ों के संरक्षण और शहरी विकास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सरकारी भवन के निर्माण को लेकर पर्यावरण और विकास के बीच बहस तेज हो सकती है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के बीच करीब 5 एकड़ में फैली हरियाली को हटाकर राजस्व कार्यालय बनाने की तैयारी है। इस योजना के सामने आने के बाद पेड़ों की कटाई, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भोपाल को झीलों और हरियाली के लिए जाना जाता है। ऐसे में शहर के बीच मौजूद हरित क्षेत्र में निर्माण की योजना पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, परियोजना की पूरी आधिकारिक जानकारी, पेड़ों की संख्या और निर्माण के लिए जरूरी अनुमतियों का विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना अभी बाकी है।

पांच एकड़ जमीन पर बनेगा राजस्व कार्यालय

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में करीब पांच एकड़ के हरित क्षेत्र में राजस्व कार्यालय बनाने की योजना है। इसके लिए मौजूदा पेड़-पौधों और हरियाली को हटाने की आशंका जताई गई है।

राजस्व विभाग के कार्यालय में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन, राजस्व प्रकरणों और आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं से संबंधित काम होते हैं। ऐसे कार्यालय के लिए पर्याप्त जगह और सुविधाओं की जरूरत होती है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस निर्माण के लिए शहर के बीच मौजूद हरित क्षेत्र का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए या किसी वैकल्पिक सरकारी जमीन पर भी विचार किया जा सकता है?

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भोपाल में पहले भी पेड़ों की कटाई को लेकर हुआ विरोध

भोपाल में सरकारी परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। जनवरी 2026 में एमपी नगर में प्रस्तावित खाद्य भवन के निर्माण को लेकर करीब 150 पुराने पेड़ों पर खतरे की बात सामने आई थी।

इस परियोजना के विरोध में विभागीय कर्मचारियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पेड़ों से चिपककर चिपको आंदोलन किया था। विरोध करने वालों का कहना था कि कई पेड़ 40 से 50 साल या उससे अधिक पुराने हैं और उन्हें बचाने के लिए निर्माण की योजना पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

इस प्रस्तावित खाद्य भवन के लिए छह मंजिला इमारत बनाने की योजना बताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, भवन निर्माण पर करीब 64 करोड़ रुपये और अन्य सुविधाओं सहित कुल खर्च 90 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था।

यह मामला दिखाता है कि भोपाल में सरकारी भवनों के निर्माण और पुराने पेड़ों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पहले से मौजूद है।

भोपाल की हरियाली पर पहले से उठते रहे हैं सवाल

भोपाल की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों और हरित क्षेत्रों से जुड़ी रही है। लेकिन शहरी विस्तार, सड़क निर्माण, मेट्रो और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण पेड़ों की कटाई को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है।

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पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पुराने पेड़ केवल छाया नहीं देते, बल्कि शहर के तापमान को नियंत्रित करने, प्रदूषण कम करने और पक्षियों तथा दूसरे जीवों को आश्रय देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

पेड़ों की कटाई के बाद नए पौधे लगाने की व्यवस्था जरूर की जाती है, लेकिन पुराने और बड़े पेड़ों की पर्यावरणीय भूमिका को नए पौधे तुरंत पूरा नहीं कर सकते। इसलिए किसी भी निर्माण परियोजना में पेड़ों को बचाने के विकल्पों पर पहले विचार करना जरूरी माना जाता है।

पेड़ काटने के लिए क्या हैं कानूनी नियम?

मध्य प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को लेकर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। मध्य प्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 के तहत शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और उनके संरक्षण से जुड़े नियम लागू होते हैं।

किसी परियोजना के लिए पेड़ काटने की जरूरत पड़ने पर संबंधित अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसके साथ ही क्षतिपूरक पौधरोपण और लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है।

भोपाल में पेड़ों की कटाई और हरित क्षेत्र के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में भी मामले उठ चुके हैं। ऐसे मामलों में हरित क्षेत्र के वैज्ञानिक आकलन, पेड़ों की गणना और क्षतिपूरक पौधरोपण की निगरानी जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

राजस्व कार्यालय का निर्माण सरकारी कामकाज को व्यवस्थित करने और आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए शहर के हरित क्षेत्र को प्रभावित करने से पहले कुछ अहम सवालों के जवाब जरूरी हैं।

  • क्या निर्माण के लिए कोई वैकल्पिक सरकारी जमीन उपलब्ध है?
  • प्रस्तावित स्थल पर कितने पुराने और बड़े पेड़ मौजूद हैं?
  • क्या पेड़ों को बचाते हुए भवन का डिजाइन तैयार किया जा सकता है?
  • पेड़ों की कटाई के लिए जरूरी अनुमति ली गई है या नहीं?
  • क्षतिपूरक पौधरोपण कहां होगा और उनकी देखभाल कौन करेगा?
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इन सवालों का जवाब मिलने से परियोजना की पर्यावरणीय लागत और सार्वजनिक उपयोगिता का आकलन करना आसान होगा।

अब परियोजना की आधिकारिक जानकारी पर नजर

भोपाल में प्रस्तावित राजस्व कार्यालय को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्माण की जरूरत और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का पारदर्शी आकलन किया जाए। पेड़ों की संख्या, जमीन का आधिकारिक क्षेत्रफल, निर्माण की लागत, स्वीकृत नक्शा और पर्यावरण संबंधी अनुमतियों की जानकारी सामने आने के बाद ही परियोजना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

शहर के विकास के लिए सरकारी भवन और बेहतर नागरिक सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ मौजूदा हरियाली को बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भोपाल के सामने चुनौती यही है कि विकास की योजना ऐसी हो जिसमें सरकारी जरूरतें भी पूरी हों और शहर की प्राकृतिक पहचान भी सुरक्षित रहे।