रवि अवस्थी ,भोपाल / Basauda Constituency बासौदा का पूरा नाम गंजबासौदा है… लेकिन विधानसभा सीट की बात करें तो यह आज भी अपने पुराने नाम बासौदा से ही पहचानी जाती है…जी हां हम बात कर रहे हैं विदिशा जिले की एक और सामान्य सीट बासौदा की … जो विविधताओं से परिपूर्ण है…कुछ जातियों के मतदाताओं की बहुलता के बावजूद यहां जातिगत समीकरण में चुनाव में मायने नहीं रखते.. तो आइए जानते हैं कैसा रहा बासौदा सीट का अब तक का सियासी मिजाज…..
राजधानी भोपाल से महज 96 किमी दूर गंजबासौदा एक ऐतिहासिक नगर है… जहां 11 वीं सदी के दौरान परमार काल में स्थापित प्रसिद्ध नीलकंठेश्वर मंदिर है तो नौंवी सदी में बनी प्राचीन मस्जिद भी.. तारण तरण जैन समाज भी यहां बडी संख्या में निवास करता है.. इस तरह विविध संस्कृतियों को अपने में समेटे बासौदा सीट का सियासी मिजाज भी विविधताओं से भरा रहा है..इस सीट पर अब तक हुए 10 चुनाव में 5 बार कांग्रेस तो 5 बार भाजपा एवं इसके पूर्ववर्ती संगठन ने जीत हासिल की… आपातकाल के दौर में बनी इस सीट की खासियत यही कि इसने अब तक कांग्रेस और भाजपा दोनों को बराबर अवसर दिए हैं…
————————————————————————————- बेतवा किनारे बसे बासौदा का है ऐतिहासिक महत्व सदियों पुराने मंदिर,मस्जिद हैं इस सीट की पहचान विविधताओं भरा रहा बासौदा का सियासी मिजाज वर्ष 1977 में इस सीट पर लडा गया पहला चुनाव जेएनपी के जमुना प्रसाद चुने गए थे पहले विधायक बासौदा में बराबर रहा है,बीजेपी,कांग्रेस का पलड़ा 10 चुनाव में 5 बार कांग्रेस, 5 बार बीजेपी जीती गंजबासौदा शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की तैयारी
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करीब दो लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर मुस्लिम मतदाता भी बडी संख्या में हैं..इनका समर्थन इस सीट से चुनावी समीकरण बनाने,बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं..चुनाव में प्रचार भले ही विकास के मुद्दे से शुरु हो लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आते-आते जातिगत समीकरण चुनाव पर हावी होते हैं..बासौदा सीट पर रघुवंशी समाज के मतदाताओं की बहुलता है..दलगत आधार पर इनका विभाजन व अन्य वर्गों को साधने की कवायद में मुकाबला हमेशा कांटे का रहा..यानी यह कहा जा सकता है कि भाजपा हो या कांग्रेस,बासौदा की राह दोनों प्रमुख दलों के लिए आसान नहीं है…बासौदा में भाजपा जहां पूरी तरह हिंदू वोटों के सहारे हैं,वहीं कांग्रेस को अन्य वर्गों के साथ मुस्लिम मतदाताओं का साथ भी मिलता रहा है….
—————————————————————————————– कुल मतदाता 2,08,803 जैन करीब 25 हजार रघुवंशी करीब 32 हजार मुस्लिम करीब 22 हजार ब्राह्मण करीब 13 हजार पिछड़ा वर्ग लगभग 24 हजार अजजा लगभग 05 हजार अजा करीब 9 हजार शेष अन्य
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बासौदा सीट के लिए अब तक हुए चुनाव पर गौर करें तो वर्ष 1977 में यहां पहला चुनाव हुआ…इसमें जेएनपी के जमुना प्रसाद ने कांग्रेस के जवाहर मल को करारी शिकस्त दी…. लेकिन 1980 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी अपनी नई पार्टी और नए चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरी तो बासौदा के मतदाता भी कांग्रेस के पाले में आ गए…इस चुनाव में कांग्रेस की जया बेन ने भाजपा के कृपाराम को करीब साढ़े तेरह हजार मतों से पराजित किया… 80 के दशक के दो व नई सदी के शुरुआती दो चुनाव को अपवाद माना जाए तो बासौदा के मतदाता हर चुनाव में बदलाव पर भरोसा रखते हैं… सिर्फ 80 व 85 के चुनाव में कांग्रेस की जया बेन व 2003 व 05 के चुनाव में भाजपा के हरिसिंह रघुवंशी लगातार दो बार चुने गए… इससे पहले व बाद के चुनाव में हर बार नए विधायक चुने गए.. साल अंत में होने वाले 16वीं विधानसभा के चुनाव में बाजी किसके हाथ होगी….यह चुनाव के नतीजे बताएंगे।
——————————————————————————— चुनाव वर्ष /विजयी उम्मीदवार ,दल / पराजित उम्मीदवार, दल /मार्जिन
1977 / जमुना प्रसाद , जेएनपी / जवाहर मल ,कांग्रेस / 2457
1980 /जया बेन ,कांग्रेस / संमुखदास ,भाजपा/ 13,689
1985 /जया बेन ,कांग्रेस / कृपाराम ,भाजपा / 8345
1990 /अजय सिंह ,भाजपा / रामनारायण , कांग्रेस / 3,409
1993 /रामनारायण ,कांग्रेस/अजय सिंह ,भाजपा / 5,696
1998 / वीर सिंह रघुवंशी ,कांग्रेस/देवेंद्र वर्मा ,भाजपा / 3,675
2003 /हरिसिंह रघुवंशी ,भाजपा /वीर सिंह रघुवंशी ,कांग्रेस / 23,802
2008 /हरिसिंह रघुवंशी ,भाजपा / कंछेदीलाल, कांग्रेस /17,717
2013 निशंक जैन ,कांग्रेस /हरिसिंह रघुवंशी ,भाजपा/ 16,159
2018 /लीना जैन, भाजपा /निशंक जैन , कांग्रेस / 10,226
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