अयोध्या बायपास: पहले कुल्हाड़ी चली,अब पौधों पर दो विभागों की लड़ाई !

अयोध्या बायपास पर 7 हजार पेड़ों की कटाई के बाद 70 हजार पौधों के रोपण के लिए NHAI और पर्यटन निगम की अलग-अलग टेंडर प्रक्रिया

भोपाल(9826019364)।

राजधानी के अयोध्या बायपास को सिक्स लेन बनाने के लिए करीब 7 हजार पेड़ों की कटाई हुई।

स्थानीय रहवासियों ने इसका तीखा विरोध किया और कई दिनों तक चिपको आंदोलन भी चला।

अब इन्हीं पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए 70 हजार पौधे लगाने का मामला नए विवाद में फंस गया है।

एक ही  कार्य के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPT) आमने-सामने हैं।

एक टेंडर निरस्त हुआ, दूसरी प्रक्रिया चलती रही और फिर पर्यटन निगम ने री-टेंडर जारी कर दिया।

इस पूरी प्रक्रिया ने न सिर्फ विभागीय समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं,

बल्कि टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों को भी असमंजस में डाल दिया है।

घटनाक्रम समझिए—

पहले अनुबंध, फिर टेंडर और फिर टकराव

                                                                                                                                              प्रतीकात्मक फोटो

अयोध्या बायपास के चौड़ीकरण के लिए काटे गए करीब 7 हजार पेड़ों के बदले 70 हजार पौधे लगाए जाने थे।

इसके लिए NHAI और मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के बीच पहले अनुबंध/MOU के तहत काम कराने की व्यवस्था की गई।

पौधरोपण के लिए MPT ने टेंडर जारी किया। बताया गया कि यह टेंडर खोला गया,

लेकिन कोई भी निविदाकार निर्धारित शर्तों पर खरा नहीं उतर सका।

इसके कारण पर्यटन निगम को टेंडर प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी।

इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।

NHAI का कहना है कि पौधरोपण का काम समय पर शुरू नहीं होने के कारण पर्यटन निगम के साथ पूर्व अनुबंध निरस्त कर दिया गया।

इसके बाद NHAI ने स्वयं पौधरोपण के लिए निविदाएं बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

18 अगस्त को ई-मेल, 22 को पत्र

NHAI के भोपाल परियोजना अधिकारी देवांशु नोयल के अनुसार,

पूर्व अनुबंध निरस्त करने की सूचना पर्यटन निगम को 18 अगस्त को ई-मेल से दी गई।

इसके बाद 22 अगस्त को पत्र भी भेजा गया।

लेकिन  इसके बावजूद 27 अगस्त को पर्यटन निगम ने उसी पौधरोपण कार्य के लिए दोबारा निविदाएं बुला लीं।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ है।

27 अगस्त को री-टेंडर क्यों?

NHAI का कहना है कि अनुबंध निरस्त करने और खुद टेंडर जारी करने की जानकारी पर्यटन निगम को दी जा चुकी थी।

ऐसे में 27 अगस्त को MPT की ओर से दोबारा निविदाएं जारी किए जाने पर NHAI ने हैरानी जताई है।

NHAI भोपाल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर  देवांशु नोयल के अनुसार, उन्होंने स्वयं पर्यटन निगम कार्यालय पहुंचकर

संबंधित अधिकारियों से टेंडर कॉल वापस लेने का आग्रह भी किया है।

अब सवाल यह है कि यदि NHAI और MPT एक ही कार्य के लिए पहले से समन्वय में थे,

तो बाद में दोनों की प्रक्रियाएं समानांतर कैसे चलती रहीं?

कंपनियां भी असमंजस में

एक ही काम के लिए अलग-अलग एजेंसियों की टेंडर प्रक्रिया से ठेकेदार और कंपनियां भी पसोपेश में हैं।

उनके सामने सवाल है कि आखिर किस एजेंसी के टेंडर में भाग लिया जाए?

यदि दोनों प्रक्रियाओं का कार्यक्षेत्र वास्तव में एक ही है,

तो बाद में एक टेंडर रद्द होने की स्थिति में कंपनियों का समय, संसाधन और टेंडर प्रक्रिया में लगा खर्च प्रभावित हो सकता है।

हालांकि यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि क्या दोनों टेंडरों का कार्यक्षेत्र, पौधों की संख्या,

स्थान या भुगतान व्यवस्था पूरी तरह समान थी या उनमें कोई अंतर था।

पर्यटन निगम से जवाब का इंतजार

इस संबंध में पर्यटन निगम के ईएनसी राजीव श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया।

वॉइस मैसेज और कॉल के बाद भी खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

मामला केवल दो टेंडरों का नहीं

यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अयोध्या बायपास पर पेड़ों की कटाई पहले ही बड़ा जनमुद्दा बन चुकी है।

हजारों पेड़ों को बचाने के लिए रहवासियों ने चिपको आंदोलन तक किया।

अब उन्हीं पेड़ों की भरपाई के लिए प्रस्तावित 70 हजार पौधों के रोपण में

एजेंसियों के बीच खींचतान का आरोप सामने आने से कई सवाल उठ रहे हैं।

अब इन सवालों के जवाब जरूरी

क्या NHAI और MPT के बीच हुआ पूर्व अनुबंध विधिवत समाप्त हो चुका था?

यदि हां, तो पर्यटन निगम ने 27 अगस्त को री-टेंडर क्यों जारी किया?

क्या दोनों एजेंसियों के टेंडर का कार्यक्षेत्र पूरी तरह एक जैसा है?

NHAI की ओर से भेजे गए 18 अगस्त के ई-मेल और 22 अगस्त के पत्र पर MPT की क्या स्थिति है?

क्या पौधरोपण कार्य में देरी से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति प्रभावित हुई?

विभागीय समन्वय की कमी का असर आखिर किस पर पड़ेगा?

कटे 7 हजार पेड़ों की भरपाई होनी है, लेकिन पहले यह तय होना बाकी है कि 70 हजार पौधे लगाएगा कौन?

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