सिंगरौली कोल ब्लॉक मुआवजा : ‘पुलिस अफसरों की पत्नियों के खातों में लाखों जमा !’

रवि अवस्थी,भोपाल।

सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक में मुआवजा वितरण को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासियों को पूरा मुआवजा नहीं मिला, जबकि पुलिस अधिकारियों की पत्नियों के खातों में 14 से 15 लाख रुपये तक की राशि जमा की गई।

मध्यप्रदेश विधानसभा में सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक का मुद्दा गरमा गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने रातोंरात मुआवजा राशि 500 करोड़ से घटाकर 368 करोड़ कर दी।

उन्होंने सवाल उठाया कि लगभग 150 करोड़ रुपये की राशि एक ही रात में कैसे कम हो गई।

बाहरी लोगों को दिया मुआवजा
सिंघार ने दावा किया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को 50 लाख रुपये देने की बात कही जा रही है।

जबकि वास्तविकता में कई परिवारों को 2 से 3 लाख रुपये भी नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को मुआवजा दिया गया है।

पुलिस अफसरों की पत्नियों के खाते में जमा हुई रकम

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सदन में सूची लहराते हुए कहा कि सरई थाने के प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी प्रियंका सिंह के खाते में 15 लाख 94 हजार 989 रुपये जमा हैं।

इसी तरह यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के खाते में 14 लाख 83 हजार 442 रुपये दर्ज हैं।

विपक्ष ने सवाल किया कि क्या ये लोग स्थानीय आदिवासी हैं और किस आधार पर इन्हें मुआवजा दिया गया।

बिना अधिग्रहण कैसें शुरू हुई खुदाई

विपक्ष का आरोप है कि जिन गांवों का अधिग्रहण पूरा नहीं हुआ, वहां भी खदान संचालन शुरू कर दिया गया।

आठ में से केवल पांच गांवों की भूमि अधिग्रहित होने की बात स्वीकार की गई, जबकि तीन गांवों के लोग अब भी विस्थापन और मुआवजे को लेकर असमंजस में हैं।

पंचायत मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सरकार मुआवजा सूची सदन के पटल पर रखने को तैयार है।

पटेल ने कहा कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति को राशि मिली है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

जबकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि 1,552 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है और कुल 368 करोड़ रुपये का अवॉर्ड पारित हुआ है।

जांच समिति की मांग पर अड़ा विपक्ष

विपक्ष ने विधानसभा समिति से जांच की मांग की, जबकि सरकार ने प्रशासनिक जांच का आश्वासन दिया। सदन में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

अब सवाल यह है कि क्या मुआवजा नीति का लाभ वास्तविक विस्थापितों तक पहुंचा है या प्रभावशाली लोगों के खातों में रकम पहुंची? मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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