मप्र: बिना टीम के मैच जीतने का जतन

सत्ता के गलियारे से..रवि अवस्थी    ** अपनों को भी नहीं बख्शा
स्कॉटलैंड के फुटबॉलर टॉम बॉयड व ब्राजील के मार्सेलो में एक समानता है। वह,फुटबॉल वर्ल्ड कप के पहले ही मैच(क्रमश:1998 व 2014) में सेल्फ गोल दागना। ब्रिटिश बॉयड खेलों से संन्यास ले चुके हैं। वहीं, ब्राजील के लेफ्ट-बैक मार्सेलो अभी सक्रिय हैं। उन्हें साथी खिलाड़ियों को चोटिल करने के लिए भी जाना जाता है।
कुछ ऐसी ही समानता कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा व मणिशंकर अय्यर में है। दोनों ही लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के लिए ‘आत्मघाती’ गोल दागते रहे हैं। अलबत्ता,पित्रोदा ने इस बार जो दूसरा गोल दागा;उसमें अपनों को भी नहीं बख्शा। यानी,नस्लीय भेदभाव का शिकार कांग्रेसी भी हो गए। शायद यही वजह है कि पित्रोदा के दूसरे गोल पर पार्टी को ज्यादा गुस्सा आया व उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा।
** बच्चों से बड़े नादान
पिछले लोकसभा चुनाव में हरसूद कन्या माध्यमिक शालाओं की छात्राओं ने ‘बाल हठ’ नामक एक अनूठा अभियान चलाया था। इसमें उन्होंने अपने पालकों को पत्र लिखकर,उनसे वोटिंग का दायित्व निभाने का आह्वान किया। इस बार के चुनाव में पहले दो चरण में कम वोटिंग के बावजूद ऐसा कोई अभियान तो सामने नहीं आया।
अलबत्ता,कुछ बच्चों की हठ उनके राजनेता पालकों की किरकिरी करा बैठी। इनमें पूर्व मंत्री कमल पटेल,भोपाल जिला पंचायत के सदस्य विनय मेहर व भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद शामिल हैं। बच्चों से बड़ी नादानी इन नेताओं की सामने आई। जिन्होंने बच्चों के संग वोटिंग तो की ही,इनके फोटो भी सोशल मीडिया में वायरल कर डाला। खुद तो उलझे, मतदान कर्मियों को भी मुसीबत में डाल दिया।
** बढ़ेगा ‘चुनरिया’ का दायरा
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता छोड़ते समय इस बात पर संतुष्टि जताई थी कि उन्हें जो बहुमत पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर मिला था,वही वह देकर जा रहे हैं। साल 2003 में बीजेपी को 165 सीट मिली थी तो शिवराज सिंह ने पांचवी बार में इस संख्या में वन प्लस ही किया। यानी,’जस की तस धर दीन्हीं चुनरिया..’और अब प्रदेश बीजेपी के शुभंकर अध्यक्ष वीडी शर्मा व मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस चुनरिया का दायरा और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। कांग्रेस के तीन विधायकों के बाद अगला नंबर सैलाना से’भाप’पार्टी विधायक कमलेश डोंडियार का है। जो सही वक्त के इंतजार में बताए जाते हैं।
** खाली मैदान में नेट प्रेक्टिस
खिलाड़ी की नेट प्रेक्टिस मैच से पहले होती है,लेकिन इंदौर की सियासत में सब कुछ उल्टा-पुल्टा है।कांग्रेस के लिए यहां मैदान खाली है। बावजूद इसके एक जिम्मेदार युवा नेता मालवा,निमाड़ की आठ सीटों पर चुनाव के दौरान इंदौर में बैठक कर रहे हैं। ऐन चुनाव के मौके पर इनके इंदौर में केंप की बड़ी वजह पार्टी को पहले तीन चरणों के लिए मिले इकलौते उड़न खटोले की वापसी बताई जाती है। इसके चलते बाकी के ज्यादातर नेताओं को भी अपने—अपने इलाके में रहते हुए ही मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
** मन समझाने की कवायद
आमतौर पर राजनेता अपनी बात सार्वजनिक करने के​ लिए मीडिया का सहारा लेते है,न कि परस्पर इं​टरव्यू कर इनके वीडियो को वायरल करने का। लेकिन प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल के दो शीर्ष युवा नेताओं ने दूसरा तरीका चुना।बताया जा रहा है कि यह नेतृत्व को सफाई देने का एक जतन है। जो ऐन चुनाव के मौके पर तीन विधायकों व परिणाम से पहले दो सीटों के गंवा देने से खफा है।टिकट वितरण को लेकर तो पहले ही कई तरह की बात सामने आ चुकी हैं।
** बिना टीम के मैच जीतने का जतन
कहते हैं,काम को टीम भाव से किया जाए तो सफलता के चांस ज्यादा होते है,लेकिन टीम ही न हो तो? यह भी हैरत की बात है कि मप्र में कांग्रेस लोकसभा चुनाव अपनी कार्यकारिणी बिना ही लड़ रही है।संभवतया,अपने तरह का यह अनोखा प्रयोग है।

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