रवि अवस्थी,भोपाल।
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मध्य प्रदेश सरकार किसानों की फसल को नमी और फफूंदी से बचाने के लिए सोलर आधारित “ग्रेन ड्रायर और डिह्यूमिडिफिकेशन सोलर सिस्टम” को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।
खासकर गेहूं, धान, मक्का और दालों जैसे अनाजों के सुरक्षित भंडारण के लिए यह तकनीक किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
केंद्र सरकार की खाद्य प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा योजनाओं के तहत सोलर ड्रायर यूनिट पर 35% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है।
डॉ मोहन यादव सरकार का नया फोकस—सौर ऊर्जा से सुरक्षित होगा अनाज
मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार का फोकस कृषि को लाभ का कारोबार बनाने पर है। इसके चलते मुख्यमंत्री डॉ यादव ने किसानों के हित में भावांतर समेत अनेक फैसले समय-समय पर लिए।
इसी क्रम में राज्य की यादव सरकार अब “ ग्रेन ड्रायर और डिह्यूमिडिफिकेशन सोलर सिस्टम” योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी में है। इसे कृषि और उद्यानिकी विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
नमी बनी किसानों की सबसे बड़ी समस्या
दरअसल,कटाई के बाद अनाज में 18% से 30% तक नमी रहती है। सही तरीके से सुखाने और भंडारण नहीं होने पर अनाज में फफूंदी लग जाती है, कीड़े पैदा हो जाते हैं।
उसकी गुणवत्ता घट जाती है। इससे किसानों को बाजार में कम दाम मिलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित भंडारण के लिए अनाज में नमी का स्तर 12% से 14% के बीच होना जरूरी है।
खराब होने से बचेगा वेयर हाउस में रखा अनाज
ग्रेन ड्रायर और डिह्यूमिडिफिकेशन सोलर सिस्टम बड़े गोदामों में रखे जाने वाले अनाज को सुरक्षित करने में भी कारगर है।
उपार्जित गेहूं का भंडारण करने वाले वेयर हाउस में इसका इस्तेमाल बढ़ने पर यहां रखे अनाज को खराब होने से बचाया जा सकेगा।
जबकि वर्तमान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने से कई जगह अनाज के अंकुरित होने व सड़ने के दृश्य सामने आते रहे हैं।
Janprachar Knowledge
क्या है सोलर ग्रेन ड्रायर सिस्टम?
सोलर ग्रेन ड्रायर एक आधुनिक तकनीक है, जो सूर्य की गर्मी और नियंत्रित हवा की मदद से अनाज की नमी निकालती है। इसमें सोलर पैनल, ह्यूमीडिटी सेंसर, एग्जॉस्ट फैन और एयर कंट्रोल सिस्टम लगाए जाते हैं।
यह तकनीक अनाज को नियंत्रित तापमान पर सुखाती है और कई मशीनें स्वतः नमी मापकर हवा का प्रवाह नियंत्रित करती हैं। इससे अनाज लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
किसानों को होंगे बड़े फायदे
1. फसल खराब होने से बचाव
नमी कम होने से अनाज में फफूंदी और कीट नहीं लगते।
2. बिजली और डीजल खर्च में कमी
पूरा सिस्टम सौर ऊर्जा से चलता है, जिससे बिजली और डीजल की बचत होती है।
3. बेहतर बाजार मूल्य
सूखा और साफ अनाज अधिक कीमत पर बिकता है। किसान ऑफ-सीजन में भी अनाज बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
4. लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण
किसानों को तुरंत फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी।
5. बारिश में भी सुरक्षित
खुले में अनाज सुखाने की तुलना में यह तकनीक अधिक सुरक्षित और स्वच्छ मानी जाती है।
केंद्र की कौन-कौन सी योजनाएं देंगी मदद?
PM-FME योजना
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME) के तहत किसानों, FPO और SHG समूहों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट और सोलर ड्रायर लगाने पर लागत का 35% तक अनुदान दिया जाता है।
MNRE की सौर ऊर्जा पहल
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर ड्रायर और सोलर डिह्यूमिडिफायर तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है।
SMAM योजना
कृषि यंत्रीकरण योजना (SMAM) के तहत कृषि उपकरणों पर 50% से 80% तक सब्सिडी उपलब्ध है। कई राज्यों में सोलर आधारित कृषि उपकरणों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में मिल सकती है भारी सब्सिडी
सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश में उद्यानिकी विभाग सोलर ड्रायर यूनिट पर करीब 40% से 50% तक अनुदान देने की संभावनाएं तलाश रहा है।
एक यूनिट की लागत लगभग 2.5 लाख से 3 लाख रुपए तक बताई जा रही है। ऐसे में किसानों को करीब 1.25 लाख से 1.40 लाख रुपए तक की सहायता मिल सकती है।
बिहार मॉडल से प्रेरणा
बिहार सरकार पहले से ही पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सोलर क्रॉप ड्रायर को बढ़ावा दे रही है। वहां सरकार का दावा है कि इस तकनीक से फसल बर्बादी 30% से 40% तक कम हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य प्रदेश में गेहूं और दलहन उत्पादन को देखते हुए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है।
किसान कहां कर सकेंगे आवेदन?
किसान इन संस्थाओं से संपर्क कर सकेंगे —
-कृषि विभाग
-उद्यानिकी विभाग
-नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग
-NABARD
-कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
-FPO और SHG समूह
कृषि भंडारण में आ सकती है नई क्रांति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मध्य प्रदेश में अनाज भंडारण और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है।
इससे किसानों की आय बढ़ेगी, फसल नुकसान कम होगा और ग्रामीण स्तर पर छोटे कृषि उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन जारी
इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारियां चल रही हैं।
अनुदान की प्रक्रिया, सोलर संयंत्र स्थापित करने वाली एजेंसियों के चयन और तकनीकी मानकों सहित विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि किसानों को पारदर्शी और आसान प्रक्रिया के तहत इस योजना का लाभ मिल सके।
















