इंदौर। व्यावसायिक शहर इंदौर की एक बड़ी कारोबारी बहू न तो अखबार पढ़ती हैं, न ही टीवी पर समाचार देखती हैं। उन्हें डिजिटल अरेस्ट के बारे में कुछ पता नहीं। सायबर ठगों ने उनकी इस अज्ञानता का फायदा उठाते हुए उनसे 1.60 करोड़ रुपए फर्जी ईडी अधिकारी बनकर ऐंठ लिए।
यही नहीं रकम कम पड़ी तो महिला को बैंक जाकर एफडी तुड़वाने को कहा। वह भी किया,लेकिन संदेह तब हुआ जब ठगों ने गोल्ड लोन लेकर और रकम देने की बात कही।
पुलिस से मिली जानकारी अनुसार,साइबर ठगी की शिकार वंदना गुप्ता इंदौर के प्रगति विहार कालोनी में रहती हैं। वह उद्योगपति सुभाष गुप्ता की बहू हैं और शेयर खरीदने-बेचने वाले एक बड़े ग्रुप के साथ कारोबार करती हैं।
मंगलवार को साइबर सेल पहुंचीं वंदना ने बताया कि नौ नवंबर को उनके पास वाट्सएप कॉल आया। वे लोग स्वयं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताते हुए बोले- सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले में जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को गिरफ्तार किया गया है।
मनी लांड्रिंग का केस दर्ज होने की धमकी
इससे संबंधित प्रकरण की जांच के दौरान आपके खाते में काले धन की जानकारी मिली है। इसके आधार पर आपके विरुद्ध मनी लांड्रिंग का प्रकरण दर्ज हुआ है। सीबीआइ द्वारा भी इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
ठगों ने जांच की कड़ी में वंदना से उनके बैंक खातों, कारोबार और आइडी कार्ड की जानकारी ली। कहा कि खातों की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) द्वारा जांच की जाएगी। इसके लिए अपने खातों में जमा राशि उनके (ठगों) द्वारा दिए खातों में जमा करवानी होगी।
एफडी भी तुड़वाया
ठगों ने जेल भेजने की धमकी देकर वंदना से बैंक में जमा एफडी तुड़वाकर एक करोड़ 60 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इसके लिए ठगों ने तीन दिन वंदना को डिजिटल अरेस्ट किए रखा। इसके बाद भी ठगों ने वंदना से कहा कि वह गोल्ड लोन लें और उससे प्राप्त धनराशि भी उनके खातों में जमा करा दें तो वंदना को ठगी का शक हुआ।
डिजिटल अरेस्ट क्या है नहीं थी जानकारी
नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं कारोबारी वंदना गुप्ता से पुलिस कर्मियों ने कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो गई हैं तो उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में नहीं जानतीं। पुलिस कर्मियों ने कहा कि समाचार पत्र नहीं पढ़तीं। आए दिन ऐसे मामलों के समाचार प्रकाशित होते हैं। इस पर वंदना बोलीं- मैं टीवी नहीं देखती, न ही समाचार पत्र पढ़ पाती हूं। यदि जानकारी होती तो ठगी का शिकार नहीं होती।
बैंक से डेटा लीक होने का शक
साइबर सेल को संदेह है कि वंदना का डेटा बैंक से लीक हुआ है, क्योंकि वंदना के जिस मोबाइल नंबर पर कॉल आया, वह बैंक में रजिस्टर्ड है और साइबर ठगों को पहले से ही जानकारी थी कि वंदना के नाम ने एफडी है, जिसे उन्होंने तुड़वाने के लिए कहा।
साइबर अपराधियों ने वंदना से नौ नवंबर से 10 नवंबर तक वीडियो कॉल पर बात की। उनसे कहा था कि सूचना लीक हुई तो गिरफ्तार कर लेंगे। काल के बारे में किसी से बात नहीं करना है, वरना टीम घर पहुंच जाएगी। एफडी तुड़वाने के लिए बैंक गई तो बैंक के अफसरों को भी शक हुआ। वंदना ने उनसे भी घटना साझा नहीं की।
ऐसे केस की यहां करें शिकायत
www.cybercrime.gov.in ncrp 1930 क्राइम ब्रांच हेल्प लाइन नंबर- 7049124445