नई रिसर्च में बड़ा दावा: भारत में हर साल बच सकती हैं 4 लाख जानें, साधारण नमक की जगह इस्तेमाल करें लो-सोडियम नमक!

नई स्टडी के मुताबिक पोटैशियम युक्त नमक से भारत में दिल और किडनी की बीमारियों का खतरा घट सकता है, लेकिन किडनी मरीजों को सावधानी जरूरी है।

नई दिल्ली: भारतीय रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाला साधारण नमक अब स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। एक नए वैश्विक अध्ययन के मुताबिक, अगर सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त लो-सोडियम नमक का इस्तेमाल किया जाए, तो भारत में हर साल करीब 4 लाख मौतों और दिल व किडनी की बीमारियों के 15 लाख से ज्यादा नए मामलों को संभावित रूप से रोका जा सकता है।

यह अध्ययन 4 नवंबर 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल Nature Health में प्रकाशित हुआ है। इसमें 193 देशों में सामान्य नमक की जगह पोटैशियम से भरपूर नमक इस्तेमाल करने के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दुनिया भर में इस बदलाव से हर साल करीब 29.6 लाख मौतें और हृदय एवं किडनी की बीमारियों के 1.017 करोड़ नए मामले रोके जा सकते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पोटैशियम युक्त नमक हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं है। खासकर गंभीर किडनी रोग से पीड़ित लोगों और कुछ विशेष दवाएं लेने वालों को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

क्या है लो-सोडियम नमक और सामान्य नमक से कैसे अलग है?

सामान्य खाने वाले नमक को सोडियम क्लोराइड कहा जाता है। इसमें सोडियम और क्लोराइड मुख्य घटक होते हैं। शरीर को सोडियम की जरूरत होती है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है।

लो-सोडियम नमक में सामान्य नमक के कुछ हिस्से की जगह पोटैशियम क्लोराइड मिलाया जाता है। इससे नमक में सोडियम की मात्रा कम और पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाती है।

अध्ययन में इस्तेमाल किए गए एक मॉडल में सामान्य नमक के 75 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड की जगह 25 प्रतिशत पोटैशियम क्लोराइड वाला मिश्रण शामिल था। इस तरह के नमक का स्वाद सामान्य नमक जैसा हो सकता है, इसलिए रोजमर्रा के खाने में बदलाव करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

नई रिसर्च में भारत के लिए क्या सामने आया?

Nature Health में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पांच अलग-अलग स्थितियों के आधार पर अनुमान लगाया कि सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त नमक इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है।

See also  महिलाओं को सिर्फ मेनोपॉज के बाद होता है हार्ट अटैक? जानिए क्या है इस दावे का सच

अध्ययन के मुताबिक, अगर भारत में इस्तेमाल होने वाले सभी सामान्य नमक को पोटैशियम युक्त विकल्प से बदल दिया जाए, तो हर साल:

  • करीब 3,99,884 मौतों को रोका जा सकता है।
  • हृदय और किडनी की बीमारियों के लगभग 15,28,494 नए मामलों को रोका जा सकता है।
  • सबसे ज्यादा संभावित फायदा उन बीमारियों में हो सकता है, जिनका संबंध हाई ब्लड प्रेशर से है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े कंप्यूटर मॉडल और उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों पर आधारित अनुमान हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि नमक बदलने भर से निश्चित रूप से इतनी मौतें रुक जाएंगी। वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने लोग इसे अपनाते हैं और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

सिर्फ घर का नमक बदलने से भी हो सकता है फायदा

अध्ययन में घरों में खाना पकाने और खाने के समय इस्तेमाल होने वाले नमक को अलग से भी देखा गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर केवल घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त नमक अपनाया जाए, तो दुनिया भर में हर साल करीब 18.5 लाख मौतों और 61.9 लाख नए हृदय एवं किडनी रोगों के मामलों को रोका जा सकता है।

भारत के लिए यह रणनीति विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां खाना पकाने के दौरान नमक का इस्तेमाल काफी अधिक होता है। अचार, पापड़, चटनी, नमकीन और दूसरे खाद्य पदार्थों से भी शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है।

ज्यादा नमक खाने से दिल और किडनी को कैसे नुकसान होता है?

सामान्य नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में सोडियम की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो शरीर पानी रोककर रखने लगता है। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है।

लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहने से दिल और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

किडनी का काम खून को छानना और शरीर से अतिरिक्त पानी व अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालना है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

See also  BMI की सच्चाई: क्या बॉडी मास इंडेक्स मोटापे को गलत माप रहा है?

पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए सामान्य नमक के कुछ हिस्से की जगह पोटैशियम क्लोराइड इस्तेमाल करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिल सकती है।

क्या लो-सोडियम नमक हर किसी के लिए सुरक्षित है?

नहीं। पोटैशियम युक्त नमक के संभावित फायदे हैं, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है।

विशेष रूप से इन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए:

1. गंभीर किडनी रोग से पीड़ित लोग

किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में खून में पोटैशियम का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है। इस स्थिति को हाइपरकलीमिया कहते हैं।

2. पोटैशियम बढ़ाने वाली दवाएं लेने वाले लोग

कुछ दवाएं शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ा सकती हैं। ऐसी दवाएं लेने वाले व्यक्ति अगर बिना सलाह पोटैशियम युक्त नमक इस्तेमाल करते हैं, तो परेशानी हो सकती है।

3. ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग जिनमें पोटैशियम बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो

इन लोगों को नमक बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए भी WHO की पोटैशियम युक्त लो-सोडियम नमक संबंधी सिफारिश सामान्य वयस्क आबादी की तरह लागू नहीं होती।

WHO ने भी दी है पोटैशियम युक्त नमक इस्तेमाल करने की सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2025 में सामान्य टेबल सॉल्ट की जगह पोटैशियम युक्त लो-सोडियम नमक के इस्तेमाल का सुझाव दिया था। यह सिफारिश सामान्य वयस्क आबादी के लिए है और इसमें उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है जिन्हें किडनी की समस्या या ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जिससे शरीर में पोटैशियम का स्तर नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है।

WHO के मुताबिक, वयस्कों को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम लेना चाहिए। यह लगभग 5 ग्राम से कम नमक के बराबर है।

इसका मतलब है कि लो-सोडियम नमक इस्तेमाल करने के बावजूद कुल नमक की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। कम सोडियम वाला नमक भी जरूरत से ज्यादा खाने पर सही विकल्प नहीं माना जा सकता।

See also  महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से होते हैं अलग, समय रहते पहचान लें ये संकेत, बच सकती है जान

भारत में नमक की खपत कम करना क्यों जरूरी है?

भारत में हाई ब्लड प्रेशर एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। खाने में अधिक नमक, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और दूसरी जीवनशैली संबंधी आदतें इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के Eat Right India अभियान में भी लोगों को रोजाना नमक का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम करने की सलाह दी जाती है।

इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • खाना बनाते समय नमक की मात्रा धीरे-धीरे कम करें।
  • सलाद, फल और दही में ऊपर से अतिरिक्त नमक न डालें।
  • चिप्स, नमकीन, पापड़ और अचार का सेवन सीमित रखें।
  • पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय सोडियम की मात्रा देखें।
  • लो-सोडियम नमक अपनाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और दवाओं के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

क्या सामान्य नमक पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?

सामान्य नमक को पूरी तरह छोड़ देना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। शरीर को सोडियम की सीमित मात्रा की जरूरत होती है। महत्वपूर्ण यह है कि कुल सोडियम का सेवन निर्धारित सीमा में रखा जाए।

अगर कोई व्यक्ति लो-सोडियम नमक अपनाना चाहता है, तो उसे यह भी देखना चाहिए कि उत्पाद आयोडीन युक्त है या नहीं। भारत में आयोडीन की कमी से बचाव के लिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।

नई रिसर्च बताती है कि पोटैशियम युक्त लो-सोडियम नमक हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का बोझ कम करने की एक उपयोगी रणनीति बन सकता है। लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित विकल्प मानना गलत होगा। खासकर किडनी के मरीज और कुछ दवाएं लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह के बिना सामान्य नमक को पोटैशियम युक्त नमक से न बदलें।

डिस्क्लेमर: यह लेख स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और प्रकाशित शोध पर आधारित है। यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। नमक या डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लें।