वोटिंग से ठीक पहले अमेरिका ने किया ईरान के क़ेश्म द्वीप पर किया गुप्त हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव

अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित रक्षात्मक हमले किए हैं। इस घटना के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) पर सीमित सैन्य हमले किए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों की जानकारी दी है। अधिकारियों ने इन्हें रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। खास बात यह है कि अमेरिका ने इन हमलों को सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया था और इन्हें हाल के हफ्तों में की गई गुप्त सैन्य कार्रवाइयों की श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित समझौते की उम्मीद जता रहे थे। वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने क़ेश्म द्वीप पर कई धमाकों की खबर दी है। इस घटनाक्रम ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।

अमेरिका ने क़ेश्म द्वीप पर क्यों किया हमला?

रॉयटर्स और CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने हमलों को रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरानी बल अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी खतरे को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने सीमित हमले किए।

CNN की रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी ने यह भी कहा कि कार्रवाई ईरान की ओर से एक अमेरिकी विमान पर गोलीबारी के जवाब में हुई थी। हालांकि, इन घटनाओं के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य बड़े पैमाने पर युद्ध दोबारा शुरू करना नहीं था। वाशिंगटन ने कार्रवाई को सीमित रखने और सार्वजनिक रूप से इसका प्रचार नहीं करने का फैसला किया, ताकि इसे बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के रूप में न देखा जाए।

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ईरानी मीडिया ने क़ेश्म द्वीप पर धमाकों की खबर दी

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने सोमवार शाम क़ेश्म द्वीप पर कई धमाकों की जानकारी दी थी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, द्वीप के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। ईरानी मीडिया ने बंदर लेंगेह इलाके में भी समुद्र की दिशा से धमाकों की आवाज आने की खबर दी।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने क़ेश्म द्वीप के ऊपर दो विमानों को उड़ते देखने की बात कही। हालांकि, धमाकों से हुए नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर तत्काल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर पूछे गए सवालों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर भेजा था। शुरुआती रिपोर्टों के समय CENTCOM की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास क्यों अहम है क़ेश्म द्वीप?

क़ेश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने के पास स्थित है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं।

क़ेश्म द्वीप की रणनीतिक अहमियत के पीछे कई कारण हैं:

  • यह होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र के पास स्थित है।
  • यहां ईरान की सैन्य और नौसैनिक गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं मौजूद हैं।
  • वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यहां भूमिगत मिसाइल ठिकाने और नौसैनिक अड्डे का भी उल्लेख किया गया है।
  • इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से समुद्री जहाजों और तेल परिवहन पर असर पड़ सकता है।
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इसी वजह से क़ेश्म द्वीप पर किसी भी सैन्य कार्रवाई को केवल स्थानीय घटना नहीं माना जा रहा। इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप ने हमले से पहले समझौते की जताई थी उम्मीद

अमेरिकी हमलों की खबर ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकलने की संभावना जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि ईरान के साथ समझौता हो सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति और उन्हें संभावित समझौते की उम्मीद नजर आ रही है।

2 नवंबर को पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा था कि क्या वह 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा हमला करने पर विचार कर रहे हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया था- ‘नहीं’।

हालांकि, इसी दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि प्रशासन के पास ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के विकल्प मौजूद हैं। इनमें हवाई हमले, आर्थिक प्रतिबंध और ईरान के व्यापार पर नाकेबंदी को और सख्त करना शामिल हो सकता है।

ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान के अधिकारियों ने पहले भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की तो तेहरान जवाब देगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बातचीत के दौरान कहा था कि समझौते को लेकर ईरान की शर्तें स्पष्ट हैं और अब अगला कदम अमेरिका को उठाना है।

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ईरानी नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकती। हालांकि, क़ेश्म द्वीप पर ताजा हमले के बाद ईरान की ओर से किसी बड़े जवाबी सैन्य अभियान की पुष्टि शुरुआती रिपोर्टों में नहीं हुई थी।

क्या फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं अमेरिका और ईरान?

क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले ऐसे समय हुए हैं, जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कार्रवाई को सीमित और रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरानी मीडिया ने द्वीप पर धमाकों की खबर दी है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस घटना के बाद ईरान किस तरह प्रतिक्रिया देगा। साथ ही, अमेरिका की ओर से आगे किसी बड़े सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। यहां तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।