संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने स्विट्ज़रलैंड के ओब्बर्गेन रिसॉर्ट में एक नई कूटनीतिक सत्र की शुरुआत की, जो इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण मध्य पूर्वी शांति पहल माना जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस दौर में प्रमुख भूमिका निभाते हुए, नाभिकीय मुद्दे और लेबनान में संघर्ष‑समाप्ति को प्राथमिकता दी। ईरान की प्रमुख प्रतिनिधि टीम, जिसमें मोहम्मद बाख़र घालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघ़ी शामिल हैं, ने आर्थिक और सुरक्षा पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करने का इरादा जताया। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रम्प ने हार्मुज़ जलमार्ग पर संभावित टोल नीति की चेतावनी दी, जिससे वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। दोनों पक्षों के बीच तनाव के बावजूद, वार्ता के सफल होने की आशा से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बारीकी से निगरानी शुरू कर दी है।
स्विट्ज़रलैंड में नई वार्ता सत्र की शुरुआत
जेडी वेंस की भूमिका और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
जेडी वेंस ने अपने शॉर्ट‑टर्म मिशन को स्पष्ट किया, जिसमें वह केवल एक‑दो दिन के भीतर नाभिकीय समझौते और लेबनान में संघर्ष‑समाप्ति पर प्रगति करने की उम्मीद रखते हैं। वेंस के साथ अमेरिकी टीम के सदस्य स्टीव विटकोफ़ और जेरड कुश्नर भी मौजूद थे, जो तकनीकी पहलुओं को संभाल रहे थे।
ईरान की प्रमुख टीम और उनके लक्ष्य
ईरान की टीम में प्रमुख वार्ता नेता मोहम्मद बाख़र घालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघ़ी शामिल थे, साथ ही केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उनका मुख्य लक्ष्य टोल नीति को रोकते हुए, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और तेल निर्यात को सुरक्षित बनाना था।
भू-राजनीतिक तनाव और हार्मुज़ की रणनीतिक महत्ता
हार्मुज़ जलमार्ग पर संभावित टोल नीति
राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यदि वार्ता विफल रहती है तो संयुक्त राज्य हार्मुज़ पर टोल लागू करेगा, जिससे शिपिंग कंपनियों को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ेगी। यह कदम ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है और तेल की कीमतों को बढ़ा सकता है।
लेबनान संघर्ष का वार्ता पर प्रभाव
इज़राइल और इरान‑समर्थित हेज़्बोला के बीच हालिया गोलीबारी ने वार्ता के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी बढ़ी है। इस कारण लेबनान में संघर्ष‑समाप्ति को वार्ता के दो मुख्य एजेंडा में से एक माना जा रहा है।