अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू करने की संभावना जताई है। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है। इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और इंटरनेट सेवाओं, डिजिटल कारोबार तथा ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका है।
ट्रंप बोले- ईरान पर फिर हो सकता है हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक और छोटे सैन्य अभियान, जिसे उन्होंने ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कहा, को अंजाम दे सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया अभियान कब शुरू हो सकता है और उसके संभावित लक्ष्य क्या होंगे।
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका चाहे तो युद्ध को बहुत जल्द समाप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या संघर्ष को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए या इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए।
ईरान ने दी इंटरनेट केबल काटने की चेतावनी
अमेरिका की ओर से संभावित नए हमले की आशंका के बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी का संकेत दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के दोबारा हमले की स्थिति में तेहरान खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना तैयार कर चुका है।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, संभावित कार्रवाई में केबलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उनकी मरम्मत में बाधा डालने की कोशिश भी शामिल हो सकती है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट और संचार सेवाओं में लंबे समय तक व्यवधान पैदा होने का खतरा है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को संभावित निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
हालांकि, इन बयानों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इंटरनेट केबलों पर हमला हो चुका है। फिलहाल यह संभावित जवाबी कार्रवाई से जुड़ी चेतावनी है।
क्या दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है?
समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा, डिजिटल भुगतान, वीडियो कॉल, क्लाउड सेवाओं और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का ट्रैफिक पहुंचता है।
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के अनुसार, दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय डेटा संचार में समुद्र के नीचे बिछी केबलों की अहम भूमिका है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम बताया गया है।
इसलिए केवल होर्मुज क्षेत्र में केबलों को नुकसान पहुंचने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर कई महत्वपूर्ण केबल एक साथ क्षतिग्रस्त होती हैं, तो खाड़ी क्षेत्र और उससे जुड़े नेटवर्क में इंटरनेट की गति कम हो सकती है। डेटा ट्रांसफर, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स और क्लाउड सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट कंपनियां डेटा ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी तेजी से भेज पाती हैं और उन नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रैफिक संभालने की कितनी क्षमता है।
इंटरनेट केबलों की मरम्मत भी हो सकती है मुश्किल
युद्ध की स्थिति में समुद्र के नीचे बिछी केबलों की मरम्मत करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्षतिग्रस्त केबलों तक मरम्मत जहाजों की पहुंच, समुद्री क्षेत्र में काम करने की अनुमति और बीमा लागत जैसी परिस्थितियां बहाली की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं।
यदि मरम्मत में देरी होती है, तो प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं और डिजिटल कारोबार को लंबे समय तक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, इंटरनेट नेटवर्क में वैकल्पिक समुद्री केबल और जमीन के रास्ते डेटा पहुंचाने वाले मार्ग भी मौजूद हैं। इन विकल्पों की उपलब्धता के कारण व्यवधान का स्तर हर देश और नेटवर्क में एक जैसा नहीं होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से तेल बाजार पर भी नजर
ईरान के खिलाफ संभावित नई सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति, परिवहन लागत और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि अमेरिका युद्ध को तेजी से समाप्त करने में सक्षम है। वहीं, ईरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी ने संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ा दी है।
फ्रांस और तुर्की ने कूटनीति पर दिया जोर
ईरान पर नए हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी कि ईरान पर नया हमला संघर्ष को पूरे क्षेत्र में फैला सकता है। उन्होंने बातचीत और कूटनीति को युद्ध समाप्त करने का रास्ता बताया।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ऊर्जा की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।
खाड़ी देशों के डिजिटल निवेश पर भी खतरा
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देश तेल पर निर्भरता कम करने के लिए तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक कंपनियों के साथ इन देशों का सहयोग भी बढ़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च में ईरानी हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान होने की बात सामने आई थी।
ऐसे में अगर क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज होता है, तो इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ-साथ डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और तकनीकी निवेश की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश की योजना भी घोषित की है।
फिलहाल स्थिति क्या है?
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य अभियान का संकेत दिया है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी की अंडरसी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। किसी नए हमले या केबल काटे जाने की पुष्टि के बिना इसे संभावित खतरे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के कदम पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण होंगे।