इमरान खान की पार्टी को बड़ा झटका, खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू; प्रांतीय सरकार निलंबित

पाकिस्तान में राजनीतिक संकट के बीच खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू कर PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है। शहबाज शरीफ सरकार ने सुरक्षा और बढ़ते आतंकी हमलों को वजह बताया, जबकि इमरान खान की पार्टी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच टकराव के बीच खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार की सिफारिश पर इस फैसले को मंजूरी दी। इसके साथ ही PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने इस कदम के पीछे बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ते आतंकी हमलों को वजह बताया है। वहीं, PTI ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए फैसले का विरोध किया है।

खैबर पख्तूनख्वा में क्यों लागू किया गया आपातकाल?

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित खैबर पख्तूनख्वा प्रांत अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है। बीते कुछ समय से इस क्षेत्र में आतंकी हमलों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ी है।

पाकिस्तान की संघीय सरकार का आरोप है कि प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा रही थी। केंद्र ने सुरक्षा अभियानों में कथित असहयोग को भी आपातकाल लागू करने के फैसले से जोड़ा है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई संघीय कैबिनेट की बैठक के बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने आपातकाल संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह फैसला पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत लिया गया।

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हालांकि, PTI ने केंद्र सरकार के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि संघीय सरकार प्रांतीय प्रशासन पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

इमरान खान की पार्टी की सरकार पर क्या होगा असर?

आपातकाल लागू होने के बाद खैबर पख्तूनख्वा की निर्वाचित सरकार का कामकाज निलंबित कर दिया गया है। प्रांत का प्रशासन राज्यपाल और सलाहकार परिषद के माध्यम से चलाने की व्यवस्था की गई है।

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार के अनुसार, यह व्यवस्था शुरुआत में छह महीने के लिए लागू रहेगी। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाए जाने की संभावना भी बताई गई है।

इस फैसले से इमरान खान की पार्टी और संघीय सरकार के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। वर्ष 2024 के आम चुनाव के बाद PTI समर्थित नेताओं ने खैबर पख्तूनख्वा में सरकार बनाई थी। ऐसे में प्रांतीय सरकार का निलंबन पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

PTI ने बताया लोकतंत्र पर हमला

इमरान खान की पार्टी PTI ने आपातकाल लागू किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। पार्टी के नेताओं ने इसे आपातकाल की आड़ में तख्तापलट जैसी कार्रवाई बताया है।

PTI का आरोप है कि केंद्र सरकार इस कदम के जरिए निर्वाचित प्रांतीय नेतृत्व को कमजोर करना चाहती है। पार्टी ने सुरक्षा स्थिति के लिए प्रांतीय सरकार को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों को भी स्वीकार नहीं किया है।

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दूसरी ओर, संघीय सरकार का कहना है कि आतंकवाद से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप जरूरी हो गया था।

इस प्रकार, दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रांतीय स्वायत्तता और निर्वाचित सरकार के अधिकार भी हैं।

इस्लामाबाद में मार्च से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल का फैसला ऐसे समय आया है, जब PTI समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

राजधानी में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रमुख मार्गों पर कंटेनर और अवरोधक लगाए गए हैं तथा बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन से पहले PTI के कई समर्थकों और इमरान खान की तीन बहनों को भी हिरासत में लिया गया। पार्टी ने इन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई है।

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ विभिन्न कानूनी मामले चल रहे हैं। PTI का कहना है कि उनके खिलाफ मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, जबकि सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कहती रही है।

पाकिस्तान में आगे क्या हो सकता है?

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू होने से पाकिस्तान में केंद्र और प्रांतीय नेतृत्व के बीच संवैधानिक टकराव बढ़ने की आशंका है। एक तरफ सरकार सुरक्षा चुनौतियों को फैसले का आधार बता रही है, तो दूसरी तरफ PTI इसे राजनीतिक कार्रवाई मान रही है।

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आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में प्रस्तावित मार्च, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और आपातकाल के तहत प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रहेगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि PTI इस फैसले के खिलाफ कौन-से राजनीतिक या कानूनी कदम उठाती है।

फिलहाल, खैबर पख्तूनख्वा का घटनाक्रम पाकिस्तान के राजनीतिक और सुरक्षा संकट के बीच एक बड़ा मोड़ है। इसका असर केंद्र-प्रांत संबंधों और इमरान खान की पार्टी की आगे की रणनीति पर पड़ सकता है।