राष्ट्रपति हर्जोग ने इजरायल में आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए चुना, 6 हफ्ते में संसद में बहुमत साबित करना होगा

इजरायल में राष्ट्रपति हर्जोग ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का जनादेश देने का फैसला किया है। उनके सामने 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की चुनौती है।

तेल अवीव: इजरायल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को नई सरकार बनाने का मौका देने का फैसला किया है। 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। राष्ट्रपति के साथ राजनीतिक दलों के परामर्श में आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने सिफारिश की।

राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, आइजेनकोट को औपचारिक रूप से सरकार बनाने का जनादेश 8 नवंबर को शाम 5 बजे (इजरायली समय) राष्ट्रपति भवन में दिया जाएगा। इसके बाद उनके पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति उन्हें 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से नामित होना सरकार बन जाना नहीं है। आइजेनकोट के सामने बहुमत जुटाने की बड़ी चुनौती होगी।

67 सांसदों ने आइजेनकोट का समर्थन किया, नेतन्याहू को 46 की सिफारिश

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी संसदीय दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद बताया कि 67 सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की। वहीं, 46 सांसदों के प्रतिनिधित्व वाले दलों ने बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन किया। सात सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनाइटेड टोरा यहूदी पार्टी ने किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश नहीं की।

See also  सऊदी अरब के दो एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों का हमला, 3 की मौत और 36 घायल

इन आंकड़ों के आधार पर आइजेनकोट को पहला मौका मिला है, लेकिन 67 सांसदों की सिफारिश को तैयार गठबंधन का बहुमत नहीं माना जा सकता। सरकार बनाने के लिए उन्हें राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनानी होगी।

चुनाव में नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़ा, लेकिन बहुमत से दूर

27 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी बनकर उभरी। उसे 27 सीटें मिलीं। हालांकि, नेतन्याहू के धार्मिक और राष्ट्रवादी सहयोगी दलों को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 53 सीटें ही हैं। यह बहुमत के आंकड़े 61 से आठ कम है।

दूसरी तरफ, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले चार दलों के गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। उनकी पार्टी याशार को 21 सीटें हासिल हुईं।

इजरायल के अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दो दलों को कुल 19 सीटें मिलीं। इन दलों के समर्थन से नेतन्याहू विरोधी खेमे के सांसदों की संख्या 67 तक पहुंचती है। यही वजह है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया में अरब दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

कौन हैं गादी आइजेनकोट?

गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख हैं। वह 2015 से 2019 तक इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। उन्होंने 2022 में राजनीति में कदम रखा और याशार पार्टी के प्रमुख बने।

आइजेनकोट ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार और गाजा युद्ध से जुड़े फैसलों की आलोचना की है। वह नेतन्याहू के साथ सरकार में शामिल होने के खिलाफ भी अपना रुख जाहिर कर चुके हैं।

See also  डीएमके में ५००० से अधिक नए सदस्य शामिल, स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए तैयार रहने का आह्वान किया

सुरक्षा और सैन्य मामलों का अनुभव उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा है। वह खुद को राष्ट्रीय आपातकाल की सरकार बनाने के पक्षधर के रूप में पेश कर रहे हैं। राष्ट्रपति के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय है और वह इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे।

आइजेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

राष्ट्रपति से जनादेश मिलने के बाद आइजेनकोट को ऐसा गठबंधन तैयार करना होगा, जिसे नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल हो। लेकिन उनके सामने कई राजनीतिक मुश्किलें हैं।

अरब दलों का समर्थन: अरब दलों के 19 सांसदों के समर्थन से आइजेनकोट का खेमा बहुमत के करीब पहुंच सकता है। हालांकि, इन दलों को औपचारिक गठबंधन में शामिल करने को लेकर आइजेनकोट के कुछ सहयोगियों में मतभेद हैं। इसलिए बाहरी समर्थन या किसी अन्य व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।

धार्मिक दलों की भूमिका: नेतन्याहू के साथ रहे कुछ धार्मिक दलों के साथ समझौता करना भी एक विकल्प हो सकता है। लेकिन अनिवार्य सैन्य सेवा और धार्मिक समुदायों को मिलने वाली छूट जैसे मुद्दों पर मतभेद गठबंधन की राह कठिन बना सकते हैं।

नेतन्याहू के साथ राष्ट्रीय सरकार: एक व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने का विकल्प भी चर्चा में है। लेकिन आइजेनकोट और नेतन्याहू के बीच राजनीतिक मतभेद तथा नेतन्याहू के साथ सरकार में शामिल नहीं होने का आइजेनकोट का रुख इस विकल्प को मुश्किल बनाता है।

See also  ट्रंप का ऐलान: इजरायल को हर साल मिलने वाली 4 अरब डॉलर की अमेरिकी मदद होगी बंद, हथियारों की बिक्री जारी रहेगी

इसलिए राष्ट्रपति का जनादेश मिलने के बावजूद सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं है।

क्या नेतन्याहू की प्रधानमंत्री पद से विदाई तय है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। राष्ट्रपति ने आइजेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका देने का फैसला किया है, लेकिन उन्हें अभी संसद में बहुमत साबित करने लायक गठबंधन तैयार करना है।

अगर आइजेनकोट निर्धारित समय में सरकार बनाने में असफल रहते हैं, तो किसी दूसरे सांसद को भी मौका दिया जा सकता है। यदि सरकार गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो अंततः इजरायल में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता, बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे। इस तरह इजरायल की सत्ता का भविष्य आने वाले दिनों में होने वाली गठबंधन वार्ताओं पर निर्भर करेगा।

इजरायल की राजनीति में क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

इजरायल में अक्टूबर के चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़ा होने के बावजूद बहुमत से पीछे रह गया, जबकि आइजेनकोट को अरब दलों सहित अधिक सांसदों की सिफारिश मिली।

राष्ट्रपति का फैसला नेतन्याहू के लिए राजनीतिक चुनौती जरूर है, लेकिन इससे उनकी प्रधानमंत्री पद से विदाई तत्काल तय नहीं होती। असली फैसला इस बात से होगा कि आइजेनकोट अगले 28 दिनों में कितने दलों को साथ लाकर सरकार बनाने में सफल होते हैं।