रवि अवस्थी,भोपाल। गुजरात में मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद मध्य प्रदेश में वहां के जिस मॉडल को अपनाने की बात कही जा रही है,वह सिर्फ चंद चेहरों को बदलने भर तक सीमित नहीं है। बल्कि संगठन में निचले स्तर तक ऐसी चाक -चौबंद व्यवस्था ,इस फॉर्मूले का वह महत्वपूर्ण अहम हिस्सा है,जिसे पूरा करना प्रदेश इकाई के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।
दरअसल ,गुजरात में मिली बंपर जीत के पीछे वहां की प्रदेश इकाई द्वारा तैयार करीब 85 लाख पन्ना समिति सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है। इनमें करीब 82 लाख पन्ना प्रमुख व समिति सदस्य तो पार्टी द्वारा सत्यापित हैं।
मय संपर्क नंबर इनका संपूर्ण ब्योरा पार्टी प्रदेश इकाई के केंद्रीयकृत डाटा सेंटर में दर्ज है। सिंगल क्लिक के जरिए न केवल प्रदेश इकाई बल्कि मैदानी स्तर के नेता की भी इन तक पहुंच आसान है ।
बताया जाता है कि चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत उम्मीद वारों व प्रचारकों ने इनकी भरपूर मदद ली। नतीजा सामने है,वर्ष 2017 के चुनाव की तुलना में मतदान प्रतिशत कम होने के बावजूद पार्टी सर्वाधिक सीट हासिल कर एक नया इतिहास रचने में सफल रही।
** मप्र में अभी यह स्थिति
गुजरात चुनाव का उक्त फॉर्मूला मध्य प्रदेश में अपनाया जाता है तो पार्टी की राज्य इकाई को आगामी दिनों में कड़ी मेहनत करनी होगी।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार , मप्र में भाजपा के वर्तमान में करीब चार लाख पन्ना प्रमुख हैं,जबकि उसका लक्ष्य मतदाता सूची के प्रत्येक पृष्ठ के मान से 5 सदस्यीय पन्ना समिति तैयार करने को लेकर रहा है। इस पर अमल होता है तो पार्टी को प्रदेश में बूथ स्तर तक करीब एक करोड़ सदस्य सिर्फ इस काम के लिए ही तैयार करने होंगे।
… तो 20 लाख पृष्ठों की होगी नई सूची मध्य प्रदेश की मौजूदा मतदाता सूची के ही करीब 16 लाख पृष्ठ हैं। जबकि नए साल 2023 की मतदाता सूची तैयार होने पर इनकी संख्या करीब 20 लाख होने का अनुमान है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मप्र में नई मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी है। इसके अंतर्गत नाम जुड़वाने की अंतिम तिथि गत 9 दिसंबर तक ही प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को 24 लाख 27 हजार आवेदन प्राप्त हुए।
इसमें 15.55 लाख आवेदन नाम जुड़वाने, 4.58 लाख आवेदन नाम,पता में संशोधन को लेकर मिले ,जबकि 4.13 लाख आपत्तियां वर्तमान नामों को लेकर दर्ज कराई गईं। प्राप्त दावे,आपत्तियों का आगामी 26 दिसंबर तक निराकरण उपरांत अगले माह 5 तारीख को नई मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इस लिहाज से नई सूची के करीब 20 लाख पन्नों की रहने का अनुमान है।
** कवायद यहां भी लेकिन गति धीमी मतदाता सूची के अनुमानित पृष्ठों के मान से पन्ना प्रमुख व समिति सदस्य बनाए जाने की कवायद मप्र इकाई भी कर रही है। बताया जाता है कि पार्टी ने इसके लिए संगठन एप का सहारा लेने की योजना बनाई है।
इसके माध्यम से पन्ना प्रमुख तैयार करने का दायित्व प्रत्येक मंडल के अध्यक्ष व बूथ स्तर पर बनाए गए ‘त्रिदेव’ को दिया गया है,लेकिन ज्यादातर पदाधिकारियों,मोर्चों के प्रशिक्षण वर्ग में व्यस्तता व अन्य दीगर कारणों से इस काम की गति अत्यंत धीमी बनी हुई है।
अलबत्ता, बूथों का डिजिटलीकरण एवं प्रत्येक बूथ पर आईटी में दक्ष दो कार्यकर्ताओं की तैनाती के लिए जारी सुघोष अभियान प्रदेश इकाई की एक बड़ी उपलब्धि (जैसा की दावा किया जाता रहा) कही जा सकती है। पार्टी को इसके माध्यम से पन्ना प्रमुखों की कमी की भरपाई होने की पूरी उम्मीद है।
**शुरू होगा घर-घर पहुंच अभियान
भाजपा के गुजरात मॉडल का एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु घर-घर पहुंच अभियान है। गुजरात में मिली जीत के तत्काल बाद पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपनी प्रतिक्रिया में इस बात पर जोर दिया कि हम पन्ना प्रमुख से आगे बढ़ कर अब घर-घर अभियान पर काम कर रहे हैं।
उनका इशारा नए साल में चुनाव वाले तीन राज्यों की ओर ही था। इनमें मध्य प्रदेश भी एक है। जाहिर है,केंद्रीय नेतृत्व के इस कार्यक्रम को जमीन पर उतारने का काम भी आने वाले दिनों में प्रदेश इकाई को करना होगा।
इस अभियान के माध्यम से पार्टी नेतृत्व की योजना केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार, लाभान्वित हितग्राहियों को पार्टी से जोड़ना व इनकी मैपिंग आदि शामिल है। उम्मीद की जानी चाहिए कि केंद्रीय नेतृत्व की मंशा को पूरा करने समय रहते उक्त लक्ष्यों को वास्तविक स्वरूप मेंमध्य प्रदेश की धरती पर उतारा जाएगा।