शिवराज की चौथी पारी,सबसे न्यारी     

                                                                                           रवि अवस्थी ,भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कार्यकाल आज 16 वर्ष 15 दिन का हो गया। शुरुआती पारी में 12वीं विधानसभा में उनका कार्यकाल सिर्फ 3 वर्ष 14 दिन रहा। इसके बाद दूसरी,तीसरी और अब चौथी पारी के तीन साल..यह संख्या मुख्यमंत्री चौहान के नाम एक रिकॉर्ड तो है ही। इससे अधिक कहीं यह प्रदेश के विकास को भी रेखांकित करती हैं। बतौर मुख्यमंत्री चौहान को विरासत में जो मध्यप्रदेश मिला , तब और अब की स्थिति में जमीन आसमान सा फर्क है।

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े किसी भी सरकार के कामकाज को आंकने का मापदंड होते हैं। इन्हें आधार माना जाए तो वर्ष 2001-02 में मध्यप्रदेश की विकास दर(जीएसडीपी)महज 71 हजार 594 करोड़ रुपए के साथ सिर्फ 4.43 प्रतिशत थी। बीते वित्तीय वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण में इसके 13 लाख 22 हजार 821 करोड़ रूपए के साथ 16.43 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। अर्थात तब और अब की जीडीपी में 18 गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी ।

करीब दो साल के कोविड काल के दौरान दुनिया में आर्थिक मंदी का दौर रहा,लेकिन इस अवधि में भी मप्र की जीएसडीपी 18 फीसद से अधिक बनी रही। बीते 18 सालों में राज्य का राजस्व संग्रहण बढ़ा तो पूंजीगत व्यय और प्रदेश की औद्योगिक विकास दर भी बढ़ी। साथ ही प्रति व्यक्ति आय भी 38 हजार रुपए से बढ़कर 1.40 लाख रु.से अधिक हुई।

मौजूदा सरकार पर राज्य पर कर्ज का बोझ लादने के आरोप लगते रहे हैं। ताजा आर्थिक सर्वेक्षण बताता है, कि वर्ष 2005 में जो ऋण जीडीपी अनुपात 39.5 प्रतिशत था। वह वर्ष 2020-21 में 22.6 प्रतिशत हो गया। अर्थात राज्य का पूँजीगत व्यय 37 हजार करोड़ से बढ़कर 23.18 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 45 हजार करोड़ रूपये हुआ।

वर्ष 2001-02 में प्रदेश की कृषि विकास दर सिर्फ 3 प्रतिशत थी, जो अब 19 प्रतिशत आंकी गई । साल दर साल अनाज की बंपर पैदावार और सिर्फ गेहूं के निर्यात में ही मप्र की 46प्रतिशत भागीदारी इसकी बानगी है।

प्रदेश की औद्योगिक विकास दर, जो वर्ष 2001-02 में 0.61 प्रतिशत थी, अब यह बढ़कर 24 प्रतिशत है। इन 18 सालों में प्रदेश की सिंचाई क्षमता में 585 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी यह दर्शाने के लिए काफी है कि इस हृदय प्रदेश ने बीते करीब डेढ़ दशक में मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में चौतरफा प्रगति की है।

आंकड़ों का अधिक उल्लेख आलेख को नीरस बनाता है,लेकिन तस्वीर बयां करने का ये एक बेहतर व पुख्ता माध्यम भी हैं। उक्त आंकड़े मुख्यमंत्री शिवराज के चारों कार्यकाल की तस्वीर बयां करते हैं। लेकिन उनकी चौथी पारी की उपलब्धियां ,इसे सबसे अलग ठहराती हैं। खासकर उन परिस्थितियों में जब इस कार्यकाल के शुरुआती  दो साल सरकार के लिए किसी इम्तहान की तरह रहे हों ।

शिवराज स्वयं भी मानते हैं कि कोरोना महामारी उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। अब इसे पुराना अनुभव कहें या मुख्यमंत्री का धैर्य व संयम कि उन्होंने कोविड काल की सभी चुनौतियों का बेहद सूझबूझ से सामना किया और इस प्रदेश को एक बड़े संकट से उबारा। यही नही, आर्थिक विकास की गति को भी उन्होंने कम नहीं होने दिया।

मुख्यमंत्री शिवराज ने कोविड काल के आपदा प्रबंधन में जनभागीदारी का आदर्श स्थापित कर एक नई मिसाल पेश की। यह उनकी सूझबूझ व दीर्घ अनुभव के कारण ही संभव हो सका। कोविड काल की बंदिशों व व्यस्तता से मुक्ति मिलते ही शिवराज के समक्ष एक बड़ी चुनौती रही,मप्र को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने की।

आत्मनिर्भर मप्र का जो लक्ष्य व रोडमैप तैयार किया गया,उसे आगे बढ़ाने की। प्रदेश के मुखिया ने अपनी कड़ी मेहनत,कुछ कर गुजरने का जज्बा व दृढ इच्छाशक्ति से वह कर दिखाया जिसकी आमजन को दरकार होती है।

लोकतंत्र में प्रत्येक सरकार को पांच साल बाद चुनाव की कड़ी परीक्षा के दौर से गुजरना होता है। शिवराज ने इसकी तैयारी चौथी पारी की सत्ता संभालने के साथ ही शुरू कर दी थी। इसी माह 5 मार्च को उनके जन्मदिन पर लिखे एक लेख में मैंने उन्हें ‘सर्वस्पर्शी जननायक ‘ बताया था। सर्वस्पर्शी इसलिए क्योंकि चुनावी परीक्षा की इस तैयारी में मुख्यमंत्री ने हर वर्ग को साधने का पूरा जतन किया है।

दिग्विजय शासनकाल में कांग्रेस ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व संविदा शिक्षकों की फौज खड़ी कर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। मौजूदा मुख्यमंत्री ने इस ‘नेटवर्क’ का नियमितीकरण कर न केवल इसे अपने पाले में किया,बल्कि एक कदम आगे बढ़कर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 47 लाख से अधिक परिवारों को जोड़कर इनमें अपनी पैठ मजबूत की। नए मास्टर स्ट्रोक के तौर पर एक करोड़ महिलाओं को साधने वाली ‘लाड़ली बहना’ योजना की शुरुआत वह जल्दी ही करने जा रहे हैं।


पिछले चुनाव में भाजपा से छिटके अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति वर्ग को भी काफी हद तक वह पार्टी के पाले में वापस लाने में सफल दिखाई देते हैं। अन्य वर्गों के लिए आयोग या बोर्ड बनाकर व नीतियां लाने की तैयारी कर, उन्होंने इन्हें भी साधने का जतन किया है।

वहीं , रोजगार मेला व एक लाख सरकारी पदों के लिए ऐतिहासिक भर्ती शुरू कर युवा मतदाताओं पर डोरे डालने का प्रयास भी जारी है। मुख्यमंत्री शिवराज की चौथे कार्यकाल की उपलब्धियों की लम्बी फेहरिस्त है। इनके जरिये उन्होंने हर जाति ,वर्ग के मतदाताओं को अपना बनाने का जतन किया है।

कहते हैं ,शीर्ष पर पहुंचने से अधिक मुश्किल है, इस पर बने रहना। मुख्यमंत्री शिवराज ने इसे न सिर्फ कर दिखाया बल्कि वह दिनों दिन और अधिक लोकप्रिय हुए। विरोधियों को भी अपना बनाने की कला व समन्वय की सियासत कोई उनसे सीखे।

अपने हों या पराए,सभी को साधने का काम उन्होंने बखूबी किया है। यही नहीं,विनम्रता,सरलता व कठोर परिश्रम वाली कार्यशैली से उन्होंने भरोसा अर्जित किया,केंद्रीय नेतृत्व का भी और प्रदेश की जनता का भी। यह कायम रहे,चौथी पारी के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर यही शुभकामना है।

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