सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, हर कोई भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद पाना चाहता है, मध्य प्रदेश का मंदसौर शहर आपका मन मोह लेगा
मंदसौर: सावन का महीना शुरू होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है, मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है, यहां की अनोखी प्रतिमा दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जिसमें आठ मुख यानी आठ चेहरे बने हुए हैं, इसके साथ ही इस मंदिर से जुड़ा एक बहुत बड़ा प्राकृतिक चमत्कार भी है, मानसून के दौरान जब शिवना नदी में जलस्तर बढ़ता है तो नदी का जल खुद-ब-खुद मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है, नदी का पानी भगवान शिव का जलाभिषेक करता है
मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास
मंदसौर का यह मंदिर अपनी अनूठी मूर्तिकला के लिए जाना जाता है, यहां का शिवलिंग आठ मुखों वाला है जो बहुत दुर्लभ है
दुनिया में कहीं भी ऐसा विशाल अष्टमुखी शिवलिंग देखने को नहीं मिलता, इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग साढ़े सात फीट से अधिक है
पशुपतिनाथ मंदिर की विशेषता
प्रतिमा का वजन कई टन बताया जाता है जो बेहद विशाल है, शिवलिंग को दो भागों में विभाजित करके देखा जा सकता है
ऊपरी भाग में चार मुख और निचले भाग में चार मुख हैं, यह प्रतिमा स्थापत्य कला का एक बेजोड़ और अद्भुत नमूना है
Pashupatinath Temple के आठ मुखों का रहस्य
शिवलिंग के आठों चेहरों पर इंसान के अलग-अलग भाव बने हैं, इन भावों में रौद्र, शांत, चिंतन और भक्ति शामिल हैं
एक मुख में भगवान शिव का बाल रूप दिखाई देता है, दूसरे मुख में उनका युवा रूप बहुत ही सुंदर दिखता है
- शिवलिंग के आठ मुखों को भगवान शिव के आठ रूपों का प्रतीक माना जाता है
- मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जिसमें आठ मुख यानी आठ चेहरे बने हुए हैं
- इस मंदिर से जुड़ा एक बहुत बड़ा प्राकृतिक चमत्कार भी है, मानसून के दौरान जब शिवना नदी में जलस्तर बढ़ता है तो नदी का जल खुद-ब-खुद मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है
मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर का महत्व
यह प्रसिद्ध मंदिर शिवना नदी के तट पर बना हुआ है, बारिश के दिनों में यहां एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है
जब शिवना नदी उफान पर होती है तो उसका जल बढ़ता है, नदी का पानी तैरता हुआ सीधे मंदिर के गर्भगृह में घुस जाता है, पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में और जानें