मंदिरों में पूजा के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले कलावा का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे रक्षा सूत्र या मौली भी कहते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। मंदिरों में कौन-कौन से रंग के कलावे बांधे जाते हैं और उनका धार्मिक महत्व क्या है, आइए जानते हैं।
मंदिरों में कलावा बांधने का धार्मिक महत्व
मंदिरों में पूजा के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले कलावा का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे रक्षा सूत्र या मौली भी कहते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। मंदिरों में कलावा बांधने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। कथाओं में भी इसका वर्णन किया गया है।
साथ ही बताया गया है कि इससे जीवन में शुभता और सुरक्षा प्राप्त होती है। लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह देवी दुर्गा और हनुमान जी की ऊर्जा को दर्शाता है। कलाई पर लाल कलावा बांधने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है।
पीला कलावा और उसका धार्मिक महत्व
पीला रंग सात्विकता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को प्रिय होता है। पीला कलावा मुख्य रूप से सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक होता है। इसे अक्सर शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंदिरों में बांधा जाता है।
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काला कलावा और उसका धार्मिक महत्व
काला रंग नजर से बचाता है। इसे विशेष रूप से शनि देव या मां काली से जोड़ा जाता है। काला कलावा धारण करने से व्यक्ति पर बुरी नजर का प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही आपके कार्यों में कोई रुकावट नहीं आती है।
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- लाल कलावा शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।
- पीला कलावा सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
- काला कलावा नजर से बचाता है।
मंदिरों में कलावा बांधने की परंपरा
मंदिरों में कलावा बांधने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। कथाओं में भी इसका वर्णन किया गया है। साथ ही बताया गया है कि इससे जीवन में शुभता और सुरक्षा प्राप्त होती है।
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