हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, पहले किसकी पूजा करें? जानें सही क्रम और शुभ मुहूर्त

14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। ऐसे में पहले हरतालिका तीज की पूजा और उसके बाद गणपति स्थापना करने का क्रम बताया गया है। मूल रिपोर्ट के अनुसार तीज पूजा का समय सुबह 6:05 से 7:06 बजे और गणेश स्थापना का मुहूर्त 11:11 बजे से 1:37 बजे तक है।

साल 2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर खास संयोग बन रहा है। 14 सितंबर को दोनों पर्व एक ही दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं और गणपति स्थापना की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के सामने सवाल है कि पहले हरतालिका तीज की पूजा की जाए या भगवान गणेश की स्थापना की जाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में सुबह हरतालिका तीज की पूजा और इसके बाद गणेश चतुर्थी की पूजा करना उचित माना गया है।

14 सितंबर को क्यों खास है?

हिंदू पंचांग के अनुसार सितंबर 2026 में कई प्रमुख व्रत और त्योहार हैं। इनमें हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी भी शामिल हैं। इस वर्ष 14 सितंबर को दोनों पर्व साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं के लिए दिन विशेष हो गया है। अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रों में पूजा के समय में थोड़ा अंतर संभव है।

हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।

पहले हरतालिका तीज की पूजा क्यों?

जब दोनों पर्व एक ही दिन पड़ते हैं तो पूजा के क्रम को लेकर असमंजस होना स्वाभाविक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले हरतालिका तीज का व्रत और पूजन किया जा सकता है। इसके बाद भगवान गणेश की स्थापना और पूजा की जाती है।

इसका कारण यह है कि हरतालिका तीज की पूजा सुबह के समय की जाती है और इसी दौरान व्रत का संकल्प लेकर शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है। मूल रिपोर्ट में भी पहले तीज पूजा और उसके बाद गणेश स्थापना का क्रम बताया गया है।

हरतालिका तीज पूजा का शुभ समय

14 सितंबर को हरतालिका तीज की मुख्य पूजा के लिए सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक का समय बताया गया है। इस दौरान महिलाएं स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान शिव व माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा में शिव-पार्वती का विधिवत पूजन करने के साथ हरतालिका तीज की कथा का पाठ और आरती की जा सकती है।

तीज के बाद करें गणपति की स्थापना

हरतालिका तीज की पूजा पूरी करने के बाद गणेश चतुर्थी की तैयारियां की जा सकती हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है।

मूल रिपोर्ट के मुताबिक, 14 सितंबर 2026 को गणेश स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:11 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक बताया गया है। इस दौरान गणपति की प्रतिमा को पूजा स्थल पर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।

गणेश जी को जल, अक्षत, फूल, दूर्वा और मोदक आदि अर्पित करने के बाद उनकी आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

ऐसे करें दोनों पर्वों की पूजा की तैयारी

अगर घर में दोनों पर्व एक साथ मनाए जा रहे हैं तो पूजा की तैयारी पहले से कर लेना बेहतर रहेगा।

सुबह हरतालिका तीज के लिए:

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को साफ करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • हरतालिका तीज की कथा पढ़ें या सुनें।
  • आरती के बाद पूजा पूरी करें।

इसके बाद गणेश चतुर्थी के लिए:

  • पूजा स्थल पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • जल और अक्षत अर्पित करें।
  • फूल और दूर्वा चढ़ाएं।
  • मोदक या अन्य भोग लगाएं।
  • गणेश मंत्र और आरती करें।
  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

दोनों त्योहार एक दिन पड़ने से क्या करें?

दोनों पर्वों के समय अलग-अलग होने के कारण श्रद्धालुओं को घबराने या जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। पहले सुबह हरतालिका तीज की पूजा पूरी करें और इसके बाद गणेश चतुर्थी के लिए निर्धारित मध्याह्न मुहूर्त में गणपति स्थापना करें।

ध्यान रखें कि धार्मिक अनुष्ठानों के मुहूर्त शहर और पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय विद्वान से समय की पुष्टि करना बेहतर होगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित है। पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।