हनुमान जयंती 2026: आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है बजरंगबली की जयंती, जानिए महत्व, पूजा विधि और पौराणिक मान्यता

7 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जानें पूजा विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व।

नई दिल्ली: संकटमोचन भगवान हनुमान की आराधना का पर्व हनुमान जयंती 7 नवंबर 2026 को कुछ क्षेत्रीय पंचांग परंपराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मनाए जाने वाले इस जन्मोत्सव को कई जगह दीपावली से एक दिन पहले हनुमान जन्मोत्सव या कार्तिक हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करते हैं, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं तथा बजरंगबली से सुख, शांति और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

हनुमान जयंती की तारीख को लेकर एक जरूरी बात यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान हनुमान का जन्मोत्सव अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है। उत्तर भारत में प्रचलित मुख्य हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को होती है, जो वर्ष 2026 में 2 अप्रैल को मनाई गई थी। वहीं, अयोध्या के हनुमानगढ़ी सहित कुछ परंपराओं में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 7 नवंबर को पड़ रही है।

आज क्यों मनाई जा रही है हनुमान जयंती?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती के लिए पूरे देश में एक ही तारीख निर्धारित नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और पंचांग परंपराओं के आधार पर यह पर्व मनाया जाता है।

उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। वहीं, कुछ उत्तर और पश्चिम भारतीय परंपराओं में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव मनाने की मान्यता है।

साल 2026 में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 48 मिनट से 8 नवंबर की सुबह 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इसी तिथि के आधार पर कुछ पंचांगों में 7 नवंबर को हनुमान जयंती और हनुमान पूजा का दिन बताया गया है।

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यह तिथि काली चौदस और नरक चतुर्दशी से भी जुड़ी हुई है। इसलिए क्षेत्र और पूजा की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान का समय अलग हो सकता है।

भगवान हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर हुआ था। उन्हें पवनपुत्र, अंजनीपुत्र, केसरीनंदन, बजरंगबली और संकटमोचन जैसे अनेक नामों से जाना जाता है।

धार्मिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान हनुमान को पवनदेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त था। इसी कारण उन्हें पवनपुत्र कहा जाता है। बचपन से ही उनमें असाधारण शक्ति, साहस और अद्भुत तेज था।

बाल्यकाल में एक बार उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को फल समझकर उसे खाने के लिए छलांग लगा दी थी। उनकी इस अद्भुत शक्ति से देवता भी आश्चर्यचकित रह गए। यही बाल हनुमान आगे चलकर भगवान श्रीराम के परम भक्त और रामकाज के सबसे बड़े सेवक बने।

भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं हनुमान

भगवान हनुमान का संपूर्ण जीवन भक्ति, निष्ठा और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। रामायण में उनके चरित्र का विशेष महत्व है।

माता सीता की खोज में समुद्र लांघना, लंका पहुंचकर माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश देना, लंका दहन करना और लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी लाना उनके अद्भुत पराक्रम के प्रमुख प्रसंग हैं।

हनुमान जी ने कभी अपनी शक्तियों का अहंकार नहीं किया। उन्होंने अपनी प्रत्येक क्षमता को प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया। यही कारण है कि उन्हें भक्ति और सेवाभाव का सर्वोच्च आदर्श माना जाता है।

हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व

हनुमान जयंती केवल भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में साहस, संयम, विनम्रता और समर्पण का महत्व भी सिखाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों को भय और संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के कष्ट दूर करने वाले देवता माने जाते हैं।

भगवान हनुमान को कलियुग में जागृत देवता के रूप में भी पूजा जाता है। मान्यता है कि जहां भगवान श्रीराम का नाम और गुणगान होता है, वहां हनुमान जी की विशेष कृपा रहती है।

हनुमान जयंती पर कैसे करें पूजा-अर्चना?

हनुमान जयंती के दिन श्रद्धालु विधि-विधान से बजरंगबली की पूजा करते हैं। पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:

  1. सुबह जल्दी उठें: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा का संकल्प लें: भगवान हनुमान के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें।
  3. सिंदूर और फूल चढ़ाएं: बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करें।
  4. भोग लगाएं: बूंदी, बेसन के लड्डू या अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद चढ़ाएं।
  5. हनुमान चालीसा पढ़ें: श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
  6. श्रीराम नाम का जाप करें: भगवान राम के नाम का स्मरण करें।
  7. दान-पुण्य करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।

इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत भी रखते हैं।

हनुमान जयंती पर करें इन मंत्रों का जाप

बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त विभिन्न मंत्रों का जाप करते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

हनुमान मूल मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः॥

हनुमान गायत्री मंत्र

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥

श्रीराम नाम मंत्र

श्री राम जय राम जय जय राम॥

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इन मंत्रों का जाप करने से मन को शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का विशेष महत्व

हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ विशेष महत्व रखता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में बजरंगबली की महिमा, पराक्रम, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का वर्णन मिलता है।

वहीं, सुंदरकांड का पाठ भगवान हनुमान के साहस, बुद्धि, विवेक और कठिन से कठिन कार्य को पूरा करने की क्षमता का स्मरण कराता है।

इस अवसर पर कई मंदिरों में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

हनुमान जयंती हमें क्या संदेश देती है?

भगवान हनुमान का जीवन आज भी मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका चरित्र हमें पांच महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • भक्ति: ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और समर्पण रखें।
  • सेवा: निःस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करें।
  • साहस: कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारें।
  • विनम्रता: अपार शक्ति और सामर्थ्य होने पर भी अहंकार न करें।
  • निष्ठा: अपने कर्तव्य और संकल्प के प्रति सदैव ईमानदार रहें।

संकटमोचन की शरण में भक्तों की प्रार्थना

हनुमान जन्मोत्सव का यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक सामर्थ्य में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, चरित्र, भक्ति और सेवा भावना में भी निहित है।

भगवान हनुमान का जीवन सिखाता है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प, हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति और कर्म में निःस्वार्थ सेवा का भाव हो, तो जीवन की बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालु बजरंगबली के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन में साहस, सद्बुद्धि, सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।