स्टर्लिंग ग्लोब ग्रैंड -3 जाटखेड़ी रोड स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शीतला माता जी की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह शुक्रवार सुबह शुरू हुआ।
समारोह का शुभारंभ श्री गणेश व नवग्रह पूजन एवं भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।
आचार्यों के मंत्रोच्चार से गूंजा स्टर्लिंग
शाहगंज से आए आचार्य पंडित महेश भार्गव,शैलेष भार्गव,राकेश दुबे,मोनी व्यास व पंडित सूरज पांडे ने मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई।
जो श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर स्टर्लिंग ग्लोब ग्रैंड से शुरू होकर जाटखेड़ी रोड,हनुमान नगर होती हुई यहां के शिवालय पहुंची।
महिला श्रद्धालुओं ने यहां भोले नाथ की पूजा-अर्चना कर कलशों में नर्मदा जल संग्रहित किया। यात्रा वापस श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई।
धूमधाम से निकली कलश यात्रा कलश यात्रा बाजे गाजे के साथ धूमधाम से निकाली गई। लाल वस्त्रों में सजी महिलाएं अपने सिर पर कलश लिए देवी भजन गाते हुए इसमें शामिल हुईं।
बाद में उन्होंने हनुमान नगर शिवालय परिसर में नृत्य कर अपनी खुशी का इजहार किया व माता के भजन गए।
बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इनमें यजमान परिवार से सर्वश्री नरेंद्र विजयवर्गीय,पवन विजयवर्गीय,राजेंद्र विजयवर्गीय,राजा विजयवर्गीय,स्टर्लिंग ग्लोब ग्रैंड से बीएस राजपूत,प्रमोद कुमार सैनी, एचएस सोनी,सोनू खांबरा,रवि अवस्थी,श्री पटेल समेत बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं
पूरे दिन चलेंगे धार्मिक कार्यक्रम
समारोह के मुख्य यजमान श्रीमती योगिता एवं संजय विजयवर्गीय हैं। यजमान विजयवर्गीय दंपत्ति ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्रा से होगी।
माता की स्थापना के लिए भव्य मंदिर बनाया गया है। माता शीतला देवी की स्थापना से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला पूरे दिन जारी रहेगा।
शाम को भंडारा एवं प्रसादी वितरण होगा। प्रमुख कार्यक्रम यह इस प्रकार है..
प्रमुख कार्यक्रम:
हवन पूजन: 12:00 बजे तक नगर भ्रमण: 03:00–04:00 बजे प्राण प्रतिष्ठा: 04:30–06:00 बजे भंडारा प्रसादी: 07:30–10:30 बजे
कार्यक्रम स्थल: श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3, नर्मदापुरम रोड, भोपाल
🙏 शीतला माता कौन हैं?
Sheetala Mata हिंदू धर्म में शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। विशेष रूप से चेचक (माता), बुखार और संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए उनकी पूजा की जाती है।
🌼 शीतला माता का स्वरूप माता को आमतौर पर गधे (खच्चर) पर सवार दिखाया जाता है
हाथ में झाड़ू, कलश और नीम की पत्तियां रहती हैं
ये प्रतीक हैं — सफाई, शुद्धता और रोग निवारण के
🌿 पूजा का महत्व
माना जाता है कि शीतला माता की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इनकी विशेष मान्यता है
गर्मी के मौसम में इनकी पूजा अधिक होती है
🍛 शीतला माता और ‘बासी भोजन’ परंपरा
शीतला अष्टमी/सप्तमी पर ठंडा (बासी) भोजन चढ़ाया जाता है
मान्यता है कि इससे शरीर को ठंडक मिलती है और रोग दूर रहते हैं
📿 कब मनाया जाता है पर्व?
होली के बाद आने वाले सप्ताह में शीतला अष्टमी मनाई जाती है
अलग-अलग राज्यों में तिथि में थोड़ा अंतर हो सकता है
✨ धार्मिक और सामाजिक महत्व
शीतला माता की पूजा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोगों को एकजुट करते हैं और पारंपरिक मान्यताओं को जीवित रखते हैं।