भारत में क्या सिर्फ दो ही प्राइवेट टेलीकॉम प्लेयर्स बचेंगे, VI की हालत दिनों-दिन हो रही खराब

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नई दिल्ली
हाल ही में हुई 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी में दो ही टेलीकॉम कम्पनियां Reliance Jio और एयरटेल ने बिजनेस टू कंज्यूमर सेगमेंट बड़ी भागीदारी करती नजर आई। जबकि, अडानी समूह ने अपने बिजनेस टू बिजनेस के लिए स्पेक्ट्रम खरीदा है। हालांकि बाद में वोडाफोन-आइडिया ने आने वाले समय मे कुछ सर्किल में 5जी सेवा शुरू करने की घोषणा की, लेकिन साथ ही यह भी कह दिया कि 5जी सेवाओं का मूल्य अधिक होना चाहिए।  इसके बाद जो चौंकाने वाली खबर थी, वह थी सरकार की वोडाफोन-आईडिया में भारत सरकार की 35 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी होने की।

क्यों हो रहा ऐसा
ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वोडाफोन आइडिया सरकार को लाइसेंस सहित अन्य फीस चुकाने में असमर्थ रही है। इसलिए अब कर्ज की राशि को सरकार के शेयर्स में बदल दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो कंपनी में वोडाफोन ग्रुप दूसरे नम्बर और आईडिया सेलुलर की हिस्सेदारी तीसरे नम्बर पर होगी और तकनीकी रूप से वोडाफोन-आईडिया बीएसएनएल की तरह सरकारी कंपनीं के रूप में काम करेगी। इस पूरे चक्र में वोडाफोन-आइडिया का दिनों-दिन कर्ज के दुष्चक्र में फंसना उसके ग्राहकों को बहुत बड़ा झटका देगा।

वोडाफोन-आइडिया की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए यही लगता है कि कंपनी फिलहाल अपना कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में मार्केट में कयास लगाए जा रहे हैं कि टेलीकॉम सेक्टर में अब दो ही बड़े प्राइवेट प्लेयर्स रह जाएंगे। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार 5जी नेटवर्क लॉन्च, उसके विस्तार और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए आवश्यक पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए, वोडाफोन आईडिया के सामने को पर्याप्त धन जुटाने की चुनौती है। भारी कर्ज और फंड की कमी के चलते भी वोडाफोन आईडिया कई क्षेत्रों में एयरटेल और जियो से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं है।

5जी के लिए एयरटेल, जियो तैयार पर…
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने वोडाफोन आईडिया के शेयरों के लिए अपना लक्ष्य मूल्य 9 रुपये रखा है। फर्म का कहना है कि 5 जी स्पेक्ट्रम की खरीद वोडाफोन-आइडिया की सेवाओं को बनाए रखने और नई तकनीक के लिए एक सहज परिवर्तन करने की क्षमता ही उसके अस्तित्व की गारंटी है।  जबकि, वहीं प्रतियोगी जियो और एयरटेल भारत में तेजी से 5G लॉन्च की तैयारियों में लगे हैं।  

आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने वोडाफोन आईडिया के  शेयरों के लिए 5 रुपये के लक्ष्य मूल्य की रेटिंग दी है।  फर्म के अनुसार  “अप्रैल-मार्च 2023 में, वोडाफोन आइडिया को एजीआर भुगतान, पिछली नीलामी की स्पेक्ट्रम किस्त, और ब्याज भुगतान आदि के रूप में 300 बिलियन रुपये का नकद भुगतान करना पड़ेगा।  एआरपीयू में महत्वपूर्ण वृद्धि के अभाव में, कंपनी कर्ज के जाल में फंस सकती है।"

बाजार के सूत्रों के अनुसार वोडाफोन आइडिया को इंडस को 6800 करोड़, नोकिया को 3000 करोड़, एटीसी को 2400 करोड़ और एरिक्सन को 400 करोड़ रुपयों का भुगतान करना है। भुगतान न कर पाने की स्थिति में 5जी सेवाओं के लिए आवश्यक नेटवर्क उपकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर मिलना असंभव होगा। रिपोर्ट के अनुसार वोडाफोन के सीईओ निक रीड ने  23 जुलाई को निवेशकों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान कहा कि वे कर्ज में डूबे वोडाफोन आइडिया (वीआई) में किसी नई इक्विटी का निवेश नहीं करेंगे।

शेयर बाजार में भी लड़खड़ा रहा वोडफोन-आइडिया
हाल ही में उपभोक्ताओं की संख्या के आंकड़े जारी होने के तुरंत बाद इसका सीधा असर शेयर मार्केट में भी देखने को मिला। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इस साल अब तक वोडाफोन-आइडिया के शेयर की कीमत 40 फीसद से अधिक गिर चुकी है। वहीं,  एयरटेल के शेयरों की कीमत इस साल अब तक 13 फीसद से अधिक उछली है।

नए उपभोक्ताओं को जोड़ने के मामले में भी पिछड़ा वीआई
नए उपभोक्ताओं को जोड़ने के मामले में भी वोडाफोन आईडिया पिछड़ता नजर आ रहा है। टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार जियो ने उपभोक्ताओं की संख्या के मामले में 35.50% की हिस्सेदारी के साथ बढ़त बनाए रखी है, भारती एयरटेल 31.61% शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है तो वोडाफोन आइडिया की हिस्सेदारी गिरकर 22.68% रह गई।

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