मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग में ट्रांसफर विवाद: 166 अफसरों के तबादलों पर रोक!

पशुपालन विभाग में सौदेबाजी के आरोपों के बाद 166 अफसरों के तबादलों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह विवाद जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी के 18 दिन बाद सामने आया है।

मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग में एक बड़ा विवाद सामने आया है। 166 अफसरों के तबादलों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह विवाद जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी के 18 दिन बाद सामने आया है। पशुपालन मंत्री लखन पटेल को विभाग से हटाया गया है और प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के सेवानिवृत्त होने के बाद ट्रांसफर आदेशों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। यह मामला अचानक सामने नहीं आया है, बल्कि यह एक जटिल समस्या का हिस्सा है जो कई महीनों से चल रही है।

पशुपालन विभाग में सौदेबाजी के आरोप

जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी के 18 दिन बाद यह विवाद सामने आया है। 14 जुलाई को पशुपालन मंत्री लखन पटेल से यह विभाग वापस ले लिया गया था। अब ट्रांसफरों में भी सौदेबाजी की शिकायतें सामने आई हैं। ये सभी तबादले प्रशासनिक स्तर पर किए गए थे।

एक और संयोग भी सामने आया है। 31 जुलाई को विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृत्त हुए। उसी दिन ट्रांसफर आदेशों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। उच्च स्तर के निर्देश के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। कई अफसरों ने शिकायत की है कि उनका तबादला जानबूझकर किया गया। उन्होंने इन आदेशों को निरस्त करने की मांग की है।

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पशुपालन विभाग का इतिहास

पशुपालन विभाग का यह पहला विवाद नहीं है। स्वावलंबी गौशाला योजना में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिल चुकी हैं। इस योजना के तहत पांच हजार गायों की क्षमता वाली 14 गौशालाओं के लिए टेंडर होना था। विभाग ने इनमें से सात की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही चार गौशालाओं के लिए एलओआई (Letter Of Intent) भी जारी की गई। इन्हीं एलओआई को लेकर कथित सौदेबाजी की शिकायत दिल्ली तक पहुंच गई थी।

विभाग में एक बड़ा डेयरी प्रोजेक्ट भी लंबित है। एनडीडीबी (National Dairy Development Board) के साथ मिलकर पांच साल में एक हजार 500 करोड़ रुपए का दुग्ध उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू होना है। सीएम (Chief Minister) की नाराजगी और साफ निर्देश के बावजूद अब तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है। कर्ज और परियोजना से जुड़े मसले अभी भी अटके हुए हैं।

ट्रांसफर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

ट्रांसफर से जुड़े दो आदेशों पर सीधी रोक लगाई गई है। पहले आदेश में 91 अफसरों के ट्रांसफर हुए थे। दूसरे आदेश में 75 अफसरों को इधर से उधर किया गया था। तबादलों पर लगा प्रतिबंध 01 जून से 15 जून के लिए हटाया गया था। इसी दौरान आखिरी दिन 166 ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए गए थे।

  • 166 ट्रांसफर आदेश जारी किए गए थे।
  • ट्रांसफर आदेशों पर लगा प्रतिबंध 01 जून से 15 जून के लिए हटाया गया था।
  • उच्च स्तर से यह भी कहा गया है कि कुछ जगहों पर एकतरफा रिलीव करने का दबाव बनाया जा रहा है।
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अगले कदम

सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। मध्यप्रदेश मंत्री लखन पटेल से विभाग वापस लेने के बाद जिम्मेदारी बदल गई है। प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के सेवानिवृत्त होने के बाद ट्रांसफर आदेशों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

इस मामले की जांच की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए काम करेगी।