स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में से एक है। हालांकि, समय पर पहचान और सही इलाज से इसके सफल उपचार की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए हर महिला को स्तन कैंसर के लक्षण और ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जाम (स्व-परीक्षण) की सही जानकारी होना जरूरी है।
स्तन कैंसर क्या है?
स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से महिलाओं में होती है, लेकिन दुर्लभ मामलों में पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण
यदि निम्न में से कोई भी बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- स्तन या बगल में नई गांठ महसूस होना।
- स्तन के आकार या आकृति में बदलाव।
- स्तन की त्वचा पर गड्ढे, सिकुड़न या मोटापन दिखाई देना।
- निप्पल का अंदर की ओर धंस जाना।
- निप्पल से खून या अन्य असामान्य तरल निकलना।
- स्तन या निप्पल की त्वचा का लाल होना, पपड़ी बनना या सूजन।
- लगातार रहने वाला दर्द या असामान्य असहजता।
ध्यान रखें कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन इनकी जांच कराना आवश्यक है।
घर पर स्तन का स्व-परीक्षण कैसे करें?
स्व-परीक्षण महीने में एक बार किया जा सकता है।
1. दर्पण के सामने देखें
दोनों स्तनों के आकार, त्वचा और निप्पल में किसी भी नए बदलाव पर ध्यान दें।
2. हाथों से जांच करें
उंगलियों के पोरों से पूरे स्तन और बगल के हिस्से को हल्के दबाव के साथ गोलाकार तरीके से महसूस करें। किसी गांठ या असामान्य कठोर हिस्से पर ध्यान दें।
3. लेटकर जांच करें
पीठ के बल लेटकर एक हाथ सिर के पीछे रखें और दूसरे हाथ से संबंधित स्तन की जांच करें। फिर दूसरी ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि आपको नई गांठ, निप्पल से असामान्य स्राव, त्वचा में बदलाव या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ या सर्जन से परामर्श लें। केवल स्व-परीक्षण पर्याप्त नहीं है; आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।
स्तन कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
- संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएं।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
- परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास होने पर नियमित स्क्रीनिंग कराएं।
स्तन कैंसर के लक्षण की समय पर पहचान और नियमित स्व-परीक्षण महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी भी प्रकार का असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। शुरुआती जांच और उपचार से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।