मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अगर वैवाहिक विवाद में कोर्ट के सामने विधिवत समझौता हो चुका है, तो उसी विवाद से जुड़ा आपराधिक मुकदमा जारी रखना गलत है। यह फैसला मध्य प्रदेश के पन्ना निवासी तौसीफ राइन की याचिका पर सुनाया गया। तौसीफ ने साल 2020 में दर्ज दहेज प्रताड़ना की FIR रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे मामले में दोनों पक्षों के बीच पहले ही विधिवत समझौता हो चुका था। इसके बाद कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के आरोप में दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
वैवाहिक विवाद और समझौता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर वैवाहिक विवाद में कोर्ट के सामने विधिवत समझौता हो चुका है, तो उसी विवाद से जुड़ा आपराधिक मुकदमा जारी रखना गलत है।
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि सास और विवाहित ननद के खिलाफ शिकायत में केवल सामान्य आरोप लगाए गए हैं।
दहेज प्रताड़ना का मामला
कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे मामले में दोनों पक्षों के बीच पहले ही विधिवत समझौता हो चुका था।
इसके बाद कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के आरोप में दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
दहेज प्रताड़ना केस जारी रखना उत्पीड़न
कोर्ट ने कहा है कि जब वैवाहिक विवाद आपसी समझौते से सुलझ चुका है, तो मुकदमा जारी रखना सिर्फ अनावश्यक कानूनी लड़ाई और उत्पीड़न को बढ़ावा देगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ पारिवारिक रिश्ते के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
- दहेज प्रताड़ना का मामला रद्द करने का आदेश
- वैवाहिक विवाद में समझौते के बाद मुकदमा जारी रखना उत्पीड़न
- सास और विवाहित ननद के खिलाफ शिकायत में केवल सामान्य आरोप
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि वैवाहिक विवाद में समझौते के बाद मुकदमा जारी रखना उत्पीड़न है।
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ पारिवारिक रिश्ते के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दहेज प्रताड़ना के मामले में यह फैसला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। आप मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अन्य फैसलों के बारे में भी पढ़ सकते हैं।