Indore: मुआवजे पर अड़े किसान, सड़क बनी आंदोलन का मंच: सुंदरकांड के बीच सरकार तक संदेश पहुंचाने की कोशिश

भोपाल कूच रोके जाने के बाद किसान शिप्रा-सांवेर मार्ग पर डटे रहे। चार गुना मुआवजे की मांग के बीच सुंदरकांड पाठ कर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

इंदौर(Janprachar.com)।

इंदौर पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का आंदोलन अब नए चरण में पहुंच गया है। भोपाल कूच के दौरान प्रशासन द्वारा रोके जाने के बाद किसान शिप्रा-सांवेर मार्ग पर ही डेरा डालकर बैठ गए। रातभर सड़क किनारे भोजन बनाया गया और सरकार को “सद्बुद्धि” देने की कामना के साथ सुंदरकांड का पाठ किया गया।

भोपाल कूच रोका, सड़क पर ही धरना शुरू

करणी सेना परिवार और प्रभावित किसान चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर ट्रैक्टरों के साथ भोपाल रवाना हुए थे। शिप्रा चौराहे पर पुलिस और प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और किसान बरलाई जागीर के पास धरने पर बैठ गए।

बल प्रयोग के आरोप, कई किसानों के घायल होने का दावा

आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। किसान नेताओं के मुताबिक इस कार्रवाई में सात से दस किसान घायल हुए। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया गया। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

‘तीन साल से सुनवाई नहीं, इसलिए आंदोलन’

करणी सेना परिवार के इंदौर जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रख रहे हैं। करीब 50 ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं मिला। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने के लिए भोपाल कूच किया जा रहा था।

‘जमीन करोड़ों की, मुआवजा लाखों में’

आंदोलनकारियों का दावा है कि वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित होंगे और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। उनके अनुसार बाजार में जमीन की कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपए प्रति एकड़ तक है, जबकि प्रस्तावित मुआवजा 18 लाख से 42 लाख रुपए प्रति एकड़ के बीच है।

विकास का विरोध नहीं, उचित मुआवजे की मांग

किसानों का कहना है कि वे रिंग रोड परियोजना के खिलाफ नहीं हैं। उनका आग्रह केवल इतना है कि उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उचित मुआवजा दिया जाए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका धरना और विरोध जारी रहेगा।

 क्यों  अहम है रिंग रोड

इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के बाहर से निकालना और यातायात को सुगम बनाना है। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ को देखते हुए भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी कारण सरकार और किसानों के बीच मुआवजे का मुद्दा अब बड़ा विवाद बन गया है।