दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। जिस डॉ. नरोत्तम मिश्रा के टिकट को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और विरोध की चर्चा रही, अब उसी नेता को चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाकर पूरी चुनावी रणनीति की कमान सौंप दी गई है। इसे संगठन की ‘डैमेज कंट्रोल प्लस पावर कंट्रोल’ रणनीति माना जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और उपचुनाव प्रभारी सांसद भारत सिंह कुशवाह की सहमति से 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति घोषित की गई है। इस समिति का प्रमुख डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बनाया गया है। खास बात यह है कि समिति में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा सहित कई ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिनके बारे में टिकट को लेकर अलग राय और नाराजगी की चर्चाएं होती रही थीं।
दतिया उपचुनाव: भाजपा ने विरोध की चर्चाओं के बीच जिम्मेदारी का दांव चला
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। जिस डॉ. नरोत्तम मिश्रा के टिकट को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और विरोध की चर्चा रही, अब उसी नेता को चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाकर पूरी चुनावी रणनीति की कमान सौंप दी गई है। इसे संगठन की ‘डैमेज कंट्रोल प्लस पावर कंट्रोल’ रणनीति माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और उपचुनाव प्रभारी सांसद भारत सिंह कुशवाह की सहमति से 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति घोषित की गई है। इस समिति का प्रमुख डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बनाया गया है।
खास बात यह है कि समिति में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा सहित कई ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिनके बारे में टिकट को लेकर अलग राय और नाराजगी की चर्चाएं होती रही थीं। राजनीति में विरोध करना आसान होता है, लेकिन संगठन जिम्मेदारी देकर नेताओं की असली परीक्षा लेता है। भाजपा ने यही संदेश देने की कोशिश की है।
दतिया उपचुनाव: जिम्मेदारी का दांव और चुनावी रणनीति
भाजपा का दावा है कि यह फैसला पूरी तरह संगठनात्मक रणनीति के तहत लिया गया है। अब पूरी चुनावी जिम्मेदारी समिति और उसके नेतृत्व पर रहेगी। दतिया उपचुनाव में भाजपा की जीत के लिए समिति की रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की जीत के लिए समिति की रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।