उमरिया छात्रवृत्ति मामला: जांच तेज,आयुक्त बोले- दोषी मिले तो होगी एफआईआर

उमरिया छात्रवृत्ति मामले में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने दोषी मिलने पर एफआईआर के संकेत दिए हैं। एक माह बाद भी जांच पूरी नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।

भोपाल।
उमरिया जिले के पाली स्थित राजकीय कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति राशि के कथित अनियमित उपयोग के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितता या आपराधिक जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय आयुक्त ने संभागीय उपायुक्त जेपी यादव से प्रकरण की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की है। विभाग का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी की जाएगी और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

दो माह बाद भी जांच पूरी नहीं

इस मामले को सबसे पहले 6 जून को जनप्रचार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन माहभर बाद भी  जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

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बताया जाता है कि यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा विस्तृत किया जाए तो अन्य छात्राओं और अभिभावकों के बयान भी सामने आ सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि ढाई सौ छात्राओं की ​स्कॉलरशिप राशि हथियाने का यह मामला सिर्फ प्राचार्य तक सीमित नहीं है,बल्कि इसे संगठित तौर पर अंजाम दिया गया। यही वजह है कि जिम्मेदार पहले तो जांच को राजी नहीं हुए। मामला मीडिया के जरिए उजागर होने पर अब शिकायतकर्ताओं को साधने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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प्राचार्य का पक्ष भी चर्चा में

प्रकरण सामने आने के बाद विद्यालय की प्राचार्य सरिता जैन ने मीडिया से बातचीत में छात्राओं से राशि लेने की बात स्वीकार की। वहीं,विभागीय जिला संयोजक पूजा द्विवेदी ने भी शिकायतें मिलने की पुष्टि की थी। दूसरी ओर, कई छात्राओं और उनके अभिभावकों का आरोप है कि उनसे बैंक खातों से छात्रवृत्ति की राशि निकलवाई गई, लेकिन उसके बदले पुस्तकें या अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई।

मुफ्त मिलती हैं पाठ्यपुस्तकें

राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद द्वारा तैयार पुस्तकों का प्रकाशन मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम करता है। यह पुस्तकें प्रदेश के सभी सरकारी तथा जनजातीय कार्य विभाग के विद्यालयों में निशुल्क वितरित की जाती है। ऐसे में छात्रवृत्ति राशि से पुस्तकें खरीदने के आरोपों ने कई सवाल खड़े किए हैं।

विधानसभा तक पहुंच सकता है मामला
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को ध्यानाकर्षण या अन्य संसदीय माध्यमों से उठाने की तैयारी में है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आयुक्त बोले—जरूरत पड़ी तो एफआईआर भी कराएंगे

मामला संज्ञान में आने पर जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने भी इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने संभागीय उपायुक्त जेपी यादव से जानकारी तलब की। आयुक्त तरुण राठी ने कहा, “जांच पूरी होने दीजिए। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी। आवश्यकता पड़ी तो एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।”

क्या है पूरा मामला?

पाली स्थित राजकीय कन्या शिक्षा परिसर की कई छात्राओं और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षणिक मदों की राशि उनके बैंक खातों से निकलवाई गई। उनका कहना है कि राशि नहीं देने पर परीक्षा में फेल करने या पढ़ाई में परेशानी आने की आशंका जताई जाती थी।