जांच टली, सबूत धुले! सिंगरौली खनन विवाद 15 जुलाई को सिया के एजेंडे में

सिंगरौली में कथित अवैध रेत खनन की जांच लंबित रहने और समय पर रिपोर्ट न आने का मामला 15 जुलाई की सिया बैठक में उठ सकता है। मानसून के बीच साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

रवि अवस्थी,भोपाल।

(9826019364)
सिंगरौली में कथित अवैध रेत खनन और सहकार ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े आरोपों की जांच लंबित रहने का मामला अब राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) की आगामी 15 जुलाई की बैठक में प्रमुखता से उठ सकता है। सिया के सदस्य सचिव सुधीर कोचर ने संकेत दिए हैं कि जांच में हुई देरी और समिति की निष्क्रियता पर बैठक में चर्चा की जाएगी।

 

कोचर ने कहा कि सिया की सदस्य डॉ. सुनंदा रघुवंशी को 11 मई को गठित जांच समिति की अध्यक्षता सौंपी गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि समिति अध्यक्ष की ओर से जांच नहीं करने संबंधी कोई लिखित सूचना भी उपलब्ध नहीं कराई गई, इसलिए पूरे प्रकरण को आगामी बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाएगा।

 

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15 दिन में देनी थी रिपोर्ट, दो माह बाद भी जांच अधूरी

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर 11 मई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में डॉ. सुनंदा रघुवंशी के अलावा सिंगरौली के जिला खनिज निरीक्षक अशोक मिश्रा और मध्यप्रदेश खनिज निगम के जूनियर मैनेजर प्रेमलाल द्विवेदी को सदस्य बनाया गया था।

सूत्रों के अनुसार, समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी। डॉ. रघुवंशी ने पहले भोपाल से बाहर होने और बाद में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। हाल ही में उन्होंने जनप्रचार से  बातचीत में जांच से स्वयं को अलग करने और नई समिति गठित किए जाने की बात कही थी।

हालांकि, सदस्य सचिव सुधीर कोचर ने स्पष्ट किया कि जब तक समिति अध्यक्ष की ओर से औपचारिक रूप से लिखित सूचना नहीं दी जाती, तब तक दूसरी समिति के गठन का प्रश्न ही नहीं उठता।

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मानसून में साक्ष्य मिटने की आशंका

पर्यावरणविद् एवं शिकायतकर्ता विश्वमित्र शाह का आरोप है कि समय रहते जांच न होने से अवैध खनन से जुड़े साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि मानसून के दौरान नदियों के जलस्तर बढ़ जाने से अवैध उत्खनन के निशान और भौतिक प्रमाण तलाशना कठिन हो जाता है।

शाह ने जनवरी में जिला प्रशासन, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से शिकायत कर सोन, रिहंद, महान, गोपद और रेण नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन के आरोप लगाए थे। मंत्रालय के निर्देश के बाद ही सिया ने जांच समिति गठित की थी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच में हुई देरी से साक्ष्य नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे निष्पक्ष पड़ताल प्रभावित हो सकती है।

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स्थानीय जांच पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ता विश्वमित्र शाह ने मई में सिंगरौली एडीएम को आवेदन देकर मानसून से पहले जांच कराने की मांग की थी। प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर जांच कराई, लेकिन शाह का आरोप है कि जांच दल ने अवैध खनन के आरोपों की पड़ताल करने के बजाय संबंधित कंपनी के वैध खनन पट्टों का उल्लेख कर औपचारिकता पूरी की।

उन्होंने दावा किया कि जांच रिपोर्ट से असहमति के कारण उन्होंने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसके चलते रिपोर्ट अब तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है। शाह का कहना है कि मामला अभी भी एनजीटी में विचाराधीन है और वहां हुई स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष विभागीय जांच में सहायक हो सकते हैं।

क्या है पूरा मामला

सिंगरौली जिले की सोन, रिहंद, महान, गोपद और रेण नदी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। बैढ़न क्षेत्र के बलियरी गांव सहित कई इलाकों में ग्रामीणों ने मशीनों से निर्धारित सीमा से अधिक उत्खनन और बड़े पैमाने पर रेत परिवहन के आरोप लगाए हैं।

विश्वमित्र शाह का आरोप है कि भुड़ाखुद, राजामिलन और हर्राहवा क्षेत्र के खसरा क्रमांक 412 एवं 413 में नियमों से अधिक खनन किया गया। उनका कहना है कि यदि समयबद्ध जांच होती तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती थी। अब वे इस मुद्दे को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से विधानसभा में उठाने की तैयारी कर रहे हैं।