रिटायरमेंट आदेश पर रहस्य: मप्र आयुष विभाग ने अंतिम दिन तक रोकी कार्रवाई, उठे ‘पिछले दरवाजे’ से लाभ पहुंचाने के सवाल

उज्जैन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेपी चौरसिया की सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले तक आदेश जारी नहीं हुआ। देरी पर सवाल उठे हैं कि यह प्रशासनिक चूक है या सेवा विस्तार की तैयारी।

रवि अवस्थी,भोपाल।
(9826019364)

भोपाल। शासकीय स्वशासी धन्वंतरी आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन के प्राचार्य 62 वर्षीय डॉ. जे.पी. चौरसिया 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन आयुष विभाग 29 जून की शाम तक भी उनका सेवानिवृत्ति आदेश जारी नहीं कर सका। सामान्यतः किसी अधिकारी या कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने से छह माह पूर्व ही संबंधित आदेश जारी कर दिया जाता है, ताकि पेंशन और अन्य वित्तीय औपचारिकताएं समय पर पूरी हो सकें।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी विशेष उद्देश्य के तहत आदेश जारी करने में विलंब किया गया है।

प्रभारी प्राचार्य होने से बढ़ी चर्चाएं

डॉ. चौरसिया वर्तमान में उज्जैन के साथ-साथ पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय, बुरहानपुर के प्रभारी प्राचार्य का दायित्व भी संभाल रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि विभाग की ओर से जानबूझकर तकनीकी स्थिति पैदा की जा रही है, जिससे भविष्य में न्यायालय के समक्ष सेवा विस्तार का दावा मजबूत किया जा सके।

65 वर्ष सेवा आयु के फैसले का इंतजार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दो बार आयुष चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। इसी कारण निर्णय अमल में नहीं आ पाया है।

विभाग के लगभग 50 चिकित्सक सेवा विस्तार की उम्मीद लगाए हुए हैं। कुछ चिकित्सकों ने उच्च न्यायालय की शरण भी ली है और स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की तर्ज पर आयुष चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने की मांग की है।

न्यायालय से राहत मिलने के उदाहरण मौजूद

जानकारों के अनुसार, चिकित्सक पी.सी. शर्मा को न्यायालय से राहत मिलने के बाद विभाग मुख्यालय में सेवाएं जारी रखने का अवसर मिला है।

ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि डॉ. चौरसिया के मामले में भी विभागीय स्तर पर ऐसी स्थिति बनने दी जा रही है, जिसका लाभ न्यायिक प्रक्रिया में लिया जा सके।

जिम्मेदारों में समन्वय का अभाव

इस पूरे प्रकरण में विभागीय स्तर पर समन्वय की कमी भी सामने आई है। प्रमुख सचिव शोभित जैन ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कहते हुए कहा कि वे इसकी जानकारी प्राप्त करेंगे।

वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने अवकाश पर होने की बात कहकर जिम्मेदारी उप सचिव स्तर पर बताई। दूसरी ओर उप सचिव रंजना देवड़ा ने कॉलेज संबंधी मामलों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों पर डाल दी।

हालांकि विभागीय स्थापना और सेवा संबंधी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी उप सचिव स्तर पर ही मानी जाती है। ऐसे में सेवानिवृत्ति जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य में देरी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या अध्यापन संकट भी है देरी की एक वजह?

उज्जैन स्थित शासकीय स्वशासी धन्वंतरी आयुर्वेद महाविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं के संचालन के लिए वर्तमान में केवल दो प्राध्यापक उपलब्ध हैं। इनमें प्राचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि दूसरे प्राध्यापक डॉ. नितेंद्र मिश्रा भी इसी वर्ष नवंबर में सेवा निवृत्त होने वाले हैं।

ऐसी स्थिति में कॉलेज में संचालित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। संस्थान में फिलहाल पीजी चिकित्सा शिक्षा के तहत नौ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

हालांकि डॉ. चौरसिया ने भी स्वीकार किया कि अब तक उनका सेवानिवृत्ति आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संभवतः कुछ प्रशासनिक आपत्तियों (क्वेरी) के कारण आदेश लंबित है और उम्मीद है कि यह एक-दो दिन में जारी हो जाएगा।

जानकारों का मानना है कि महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी और पीजी कक्षाओं की निरंतरता बनाए रखने की चुनौती भी सेवानिवृत्ति आदेश में देरी के पीछे एक संभावित कारण हो सकती है।