महर्षि वैदिक विवि की याचिका खारिज: कोर्ट में टिक नहीं पाया ₹5 करोड़ की मानहानि का दावा

कटनी अदालत ने महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय का पूर्व कर्मचारी सुधाकर सिंह राजपूत के खिलाफ दायर 5.10 करोड़ रुपये का मानहानि दावा साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। विश्वविद्यालय हाईकोर्ट जाएगा।

भोपाल/कटनी।

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय कटनी को अपने पूर्व कर्मचारी सुधाकर सिंह राजपूत के खिलाफ दायर करीब 5 करोड़ 10 लाख रुपये के मानहानि दावे में बड़ा कानूनी झटका लगा है। कटनी के अष्टम जिला न्यायाधीश की अदालत ने विश्वविद्यालय की याचिका खारिज करते हुए माना कि वादी अपने लगाए गए आरोपों और कथित मानहानि को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका।

विश्वविद्यालय ने वर्ष 2022 में यह दावा दायर करते हुए आरोप लगाया था कि पूर्व कर्मचारी सुधाकर सिंह राजपूत ने विभिन्न शिकायतों, संदेशों और पत्राचार के माध्यम से विश्वविद्यालय एवं उसके अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया। इसके एवज में विश्वविद्यालय ने 5 करोड़ 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी।

अदालत ने सभी प्रमुख बिंदुओं पर दावा नकारा

23 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय यह साबित नहीं कर पाया कि प्रतिवादी ने झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाकर उसकी प्रतिष्ठा को वास्तविक नुकसान पहुंचाया है। अदालत ने क्षतिपूर्ति के दावे सहित विश्वविद्यालय के प्रमुख दावों को अस्वीकार करते हुए पूरा वाद ही खारिज कर दिया।

 

शिकायतों को बताया अधिकारों का इस्तेमाल

सुनवाई के दौरान सुधाकर सिंह राजपूत ने तर्क दिया कि उन्होंने विश्वविद्यालय की कथित अनियमितताओं की शिकायत सक्षम अधिकारियों के समक्ष की थी। उनका कहना था कि शिकायत करना किसी नागरिक का अधिकार है और इसे स्वतः मानहानि नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

विश्वविद्यालय का दावा था-प्रतिष्ठा और प्रवेश प्रभावित हुए

वाद में विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया था कि प्रतिवादी की शिकायतों और संदेशों से उसकी छवि धूमिल हुई, छात्रों के प्रवेश प्रभावित हुए तथा संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर करोड़ों रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई थी। हालांकि न्यायालय ने इन दावों को पर्याप्त प्रमाणों के अभाव में स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट जाने की तैयारी

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार संदीप शर्मा ने बताया कि उन्हें अभी न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हुई है। आदेश मिलने के बाद उसका विधिक परीक्षण किया जाएगा। यदि आवश्यकता हुई तो विश्वविद्यालय इस निर्णय को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देगा।