सिंगरौली की नदियों को न्याय का इंतजार, 15 दिन की जांच डेढ़ माह बाद भी शुरू नहीं

सिंगरौली में कथित अवैध रेत खनन की जांच के लिए गठित समिति डेढ़ माह बाद भी मौके पर नहीं पहुंची। 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश थे। शिकायतकर्ताओं ने जांच में देरी और प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।

मनु कुमार शाह,सिंगरौली,रवि अवस्थी,भोपाल।

ऊर्जाधानी सिंगरौली में अवैध रेत खनन को लेकर उठे सवालों के बीच अब जांच प्रक्रिया की धीमी रफ्तार भी चर्चा का विषय बन गई है। केंद्र और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंची शिकायतों के बाद गठित जांच समिति डेढ़ माह बीतने के बावजूद मौके का निरीक्षण तक नहीं कर सकी है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच जांच की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतों के बाद बनी समिति, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी

सहकार ग्लोबल लिमिटेड की रेत खदानों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और एनजीटी तक पहुंची थीं। इसके बाद मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (सिया) ने 11 मई 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

हालांकि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी समिति की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब जांच शुरू ही नहीं हुई, तो शिकायतों का निराकरण कब होगा।

नदियों में खनन को लेकर पर्यावरणीय चिंता

शिकायतों का केंद्र सोन, रिहंद, महान और गोपद जैसी प्रमुख नदियां हैं। पर्यावरणविदों का आरोप है कि कुछ खनन क्षेत्रों में निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है। शिकायत के समर्थन में जीपीएस टैग्ड फोटो, वीडियो और अन्य दस्तावेज भी संबंधित एजेंसियों को सौंपे गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी तंत्र में अनियंत्रित खनन होता है तो इससे जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, नदी की प्राकृतिक धारा और जलीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।

समिति और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

जांच समिति के एक सदस्य ने स्वीकार किया है कि अब तक भोपाल से कोई टीम निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची। दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले की गंभीरता के बावजूद जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है।

सिया के भीतर कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कई पर्यावरणीय मामलों में निर्णय और सुनवाई की प्रक्रिया पहले से ही लंबित चल रही है।

एनजीटी भी कर रहा है निगरानी

मामले में केवल सिया ही नहीं, बल्कि एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने भी संयुक्त जांच दल गठित कर छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले विभिन्न एजेंसियों और वन विभाग की जांचों में भी कुछ बिंदुओं पर शिकायतों को सही पाए जाने की बात सामने आ चुकी है।

वन विभाग की एक रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्र में वन स्वीकृतियों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की स्थिति पर सवाल दर्ज किए गए थे। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद भी चुनौती बरकरार

हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी जिलों को अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सिंगरौली में रेत खनन और परिवहन को लेकर शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट कब सौंपती हैं और शिकायतों में उठाए गए आरोपों पर क्या निष्कर्ष निकलता है। फिलहाल, सिंगरौली की नदियों से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक सक्रियता और पर्यावरणीय जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन गया है।

जांच अटकी, आदेश देने वाले अधिकारी विदेश दौरे पर

सिंगरौली में कथित अवैध रेत खनन की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने वाले सिया (SEIAA) के सचिव सुधीर कोचर पिछले कुछ समय से लगातार आधिकारिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण में व्यस्त हैं। पहले वे 8 जून तक मसूरी में मिड-टर्म करियर ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल रहे। इसके बाद वे पर्यावरण विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने के लिए पेरिस गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, श्री कोचर के 29 जून को भोपाल लौटने की संभावना है। इस बीच, उनके द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आ सकी है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच प्रक्रिया में अपेक्षित गति नहीं दिख रही, जबकि प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि जांच समिति स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए अधिकृत है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

इस मामले में जांच समिति की प्रमुख व सिया सदस्य सदस्य डॉ सुनंदा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया।