तीसरी संतान का खुला राज, विवादों में घिरे सिंगरौली उप पंजीयक अशोक परिहार की नौकरी गई

सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान संबंधी नियम उल्लंघन का दोषी मानते हुए विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उनके खिलाफ अन्य शिकायतें भी पहले से चर्चा में रही हैं।

987

मनु  कुमार शाह, सिंगरौली/भोपाल.

(7415621634)

सिंगरौली में वर्षों तक प्रभावशाली माने जाने वाले उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार आखिरकार सरकारी सेवा से बाहर हो गए हैं।

महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक कार्यालय ने लंबी विभागीय जांच के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

विभागीय जांच में यह आरोप प्रमाणित पाया गया कि सरकारी सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था, जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।

हालांकि कार्रवाई का आधार तीसरी संतान का मामला बना, लेकिन विभागीय और प्रशासनिक हलकों में परिहार लंबे समय से विवादित कार्यशैली और लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

जांच में सही पाया गया आरोप

विभागीय दस्तावेजों के अनुसार कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट, उपलब्ध अभिलेखों और स्वयं परिहार के स्पष्टीकरण के आधार पर तीसरी संतान का तथ्य प्रमाणित माना गया।

जांच अधिकारी ने भी आरोप को सही ठहराते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी।

जिसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

अज्ञानता की दलील नहीं आई काम

जांच के दौरान परिहार ने यह तर्क दिया कि उन्हें उस समय दो से अधिक संतानों संबंधी सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी। उनका यह तर्क भी रहा कि विभाग ने भी कभी इस बारे में अवगत नहीं कराया।

हालांकि जांच अधिकारी ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया है कि वर्ष 1992 से सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी के लिए यह दावा स्वीकार्य नहीं है कि उसे अपने सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद हुई रजिस्ट्रियां

उप पंजीयक का नाम इससे पहले संरक्षित वन भूमि की रजिस्ट्रियों को लेकर भी सुर्खियों में रहा है।

वर्ष 2022 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव ने सिंगरौली जिले में संरक्षित वन क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे।

इसकी जानकारी जिला प्रशासन के साथ-साथ पंजीयन विभाग को भी भेजी गई थी।

बताया जाता है कि संभाग के अन्य उप पंजीयकों ने निर्देशों का पालन करते हुए सावधानी बरती, लेकिन सिंगरौली में करीब 30 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। मामला न्यायालय तक पहुंचा और कोर्ट के निर्देश के बाद आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया।

आपराधिक प्रकरण दर्ज, फिर भी कार्रवाई नहीं

सूत्रों के अनुसार बैढ़न थाने में 8 अगस्त 2023 को अशोक परिहार सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराओं 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता लगातार कार्रवाई की मांग करते रहे, लेकिन आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस तीन वर्षों में परिहार के कथन तक दर्ज नहीं कर सकी। इससे पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मनमाने तरीके से काम करने के लगे आरोप

जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े कई लोगों ने भी उप पंजीयक कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों के समूह के माध्यम से जमीनों की रजिस्ट्रियां प्रभावित की जाती थीं।

मनमाने तरीके से रजिस्ट्री होल्ड करना, अतिरिक्त राशि की मांग करना और चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप भी विभाग तक पहुंचे थे।

हटाने की सिफारिश भी हुई थी

सूत्र बताते हैं कि लगातार मिल रही शिकायतों से परेशान होकर म​हानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने पिछले वर्ष अशोक परिहार को मैदानी पदस्थापना से हटाने की सिफारिश भी की थी।

हालांकि प्रभावशाली पहुंच के कारण यह प्रस्ताव मंत्रालय स्तर पर आगे नहीं बढ़ सका और फाइलों में ही दबकर रह गया।

अब जारी हुए सेवा समाप्ति के आदेश

महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने 11 जून 2026 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि तीसरी संतान संबंधी आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित पाया गया। इसके बाद उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सामान्य शर्तें) नियम 1961 और अन्य प्रासंगिक नियमों के तहत की गई। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी परिहार की सेवा समाप्ति की पुष्टि की।

आदेश के अनुसार यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू की गई। इसके चलते ​बैढ़न उप पंजीयक कार्यालय में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा रहा।

परिहार ने साधी चुप्पी
समाचार प्रकाशित करने से पहले अशोक सिंह परिहार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। फोन कॉल का उन्होंने जवाब नहीं दिया।

उन्हें व्हाट्सएप संदेश भी भेजा गया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।