राज्यसभा चुनाव:BJP तीसरी सीट पाने की तैयारी में,कांग्रेस में दिग्विजय समर्थक का इस्तीफा

रवि अवस्थी,भोपाल।

मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महेश केवट ने सोमवार को नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे दी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावा किया कि भाजपा अपने तीसरे उम्मीदवार को भी जीत दिलाने में सफल रहेगी।

नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा समाज के उन वर्गों को भी प्रतिनिधित्व देने का काम कर रही है, जिन्हें अब तक पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाए थे। उन्होंने महेश केवट की उम्मीदवारी को पार्टी की सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

तीसरी सीट पर भाजपा का आत्मविश्वास

भाजपा पहले ही तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बना चुकी है। अब महेश केवट के मैदान में उतरने के साथ पार्टी तीसरी सीट पर भी जीत का दावा कर रही है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों को भोपाल में रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी की गंभीरता स्पष्ट हो रही है।

निर्मला सप्रे को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

बीना विधायक निर्मला सप्रे का मुख्यमंत्री निवास पहुंचना भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि मुलाकात के विषय का खुलासा नहीं हुआ, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि सप्रे भाजपा के साथ रहेंगी।

इससे राज्यसभा चुनाव में संख्या बल को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

कांग्रेस: ज्ञानचंदानी ने दिया इस्तीफा

दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने प्रदेश नेतृत्व और विधायकों के साथ नामांकन दाखिल कर एकजुटता का संदेश दिया।

उन्होंने जीत का भरोसा जताया, लेकिन इसी बीच भोपाल की हुजूर सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके नरेश ज्ञानचंदानी ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी को झटका दे दिया।

बताया जा रहा है कि वे मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज थे।

चुनावी गणित पर टिकी नजर

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें विधायकों की एकजुटता और मतदान के दिन के राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं।

मप्र विधानसभा का गणित: तीसरी राज्यसभा सीट पर क्यों बढ़ी दिलचस्पी

मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 63 सदस्य हैं। हालांकि, विजयपुर से भाजपा विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान के पात्र नहीं हैं। वहीं दतिया विधानसभा सीट रिक्त है। यहां से कांग्रेस के विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता विधानसभा समाप्त कर चुकी है।

इसके अलावा बीना विधायक निर्मला सप्रे खुलकर भाजपा के साथ नजर आ रही हैं। ऐसे में कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 60 विधायकों तक सिमटती दिखाई दे रही है। सदन में एक निर्दलीय विधायक कमलेश डोडियार भी हैं।

तीसरी सीट का चुनावी गणित

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए न्यूनतम 58 विधायकों के वोट आवश्यक हैं। भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने के बाद भी लगभग 48 वोट अपने पास बचा रही है। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे करीब 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

कांग्रेस को भितरघात का डर

भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग का फायदा उसे मिल सकता है।

वहीं कांग्रेस को भितरघात की आशंका सताने लगी है। इसी वजह से पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की टूट-फूट रोकने के लिए बाड़ेबंदी की रणनीति पर काम कर रही है।

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