“मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में यह कहते हुए स्कूली बच्चों को फिर से रेडीमेड यूनिफॉर्म देने का फैसला किया कि कई जगह अभिभावक यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली राशि अन्य कामों में खर्च कर देते हैं। लेकिन आदिवासी बहुल उमरिया जिले में सामने आया मामला इस धारणा से बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करता है। यहां आरोप अभिभावकों पर नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन पर लगे हैं।”
दीपक विश्वकर्मा,उमरिया/ रवि अवस्थी,भोपाल।
उमरिया जिले के पाली स्थित राजकीय कन्या शिक्षा परिसर की कई छात्राओं और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक मदों में मिलने वाली राशि स्कूल प्रबंधन द्वारा बैंक खातों से निकलवाई जाती है। छात्राओं का दावा है कि रकम नहीं देने पर उन्हें फेल करने या पढ़ाई में परेशानी खड़ी करने की चेतावनी भी दी जाती थी।
दबाव बनाकर बैंक खाते से निकलवाई रकम
शाला की एक छात्रा पूनम बैगा ने बताया कि शाला की प्राचार्य सरिता जैन ने उस पर बैंक से राशि निकालकर लाने का खासा दबाव बनाया। इसके बाद उन्हें बैंक खाते में छात्रवृति के तौर पर मिले करीब सात हजार रुपए में से आधी रकम निकालकर दी।
पूनम ने कहा कि पूरी रकम नहीं देने पर प्राचार्य ने खासा सख्त रुख अख्तियार करते हुए पूरी रकम लाने की चेतावनी दी।
वहीं आठवीं कक्षा की एक अन्य छात्रा खुशी बैगा व उनकी मां का आरोप है कि उन्हें मिली छात्रवृति की करीब 6500 रुपए की राशि प्राचार्य ने दबाव बनाकर बैंक खाते से निकलवाई और इसे स्वयं रख लिया।
रकम कम मिलने पर छात्राकी मां को बुलाया
कमोबेश यही आरोप, इसी शाला की एक अन्य छात्रा आकांक्षा आदिवासी व उनकी मां का है।
आकांक्षा ने बताया कि उसने जब सिर्फ 56 सौ रुपए निकालकर प्राचार्य को दिए तो उन्होंने इस पर सवाल-जवाब भी किए। वहीं आकांक्षा की मां ने बताया कि रकम कम मिलने पर शाला प्राचार्य ने उन्हें स्कूल में तलब किया और कम राशि को लेकर पूछताछ की।
यहां तक कि प्राचार्य ने कहा कि छात्रवृत्ति की राशि तो 68 सौ रुपए बैंक में आना चाहिए,कम क्यों आई? महिला ने बताया कि विद्यालय की प्राय: सभी छात्राओं से उनकी छात्रवृति व अन्य मदों में मिली राशि स्कूल प्राचार्य ने निकलवाई और दबाव बनाकर इसे स्वयं हथिया लिया।
जांच का दायरा बढ़ा तो खुल सकते हैं बड़े राज
उमरिया जिले में जनजातीय कार्य विभाग के तहत करीब 35 से 40 स्कूल, छात्रावास और आश्रम संचालित हैं। इनमें प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों के साथ कन्या शिक्षा परिसर जैसे आवासीय शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं, जहां ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
ये संस्थान जिले के पाली, करकेली और मानपुर विकासखंडों में संचालित हैं। पाली स्थित कन्या शिक्षा परिसर में ही लगभग 250 छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभिभावकों का आरोप है कि छात्रवृत्ति और अन्य मदों में मिलने वाली सरकारी राशि अधिकांश छात्राओं से ली गई।
फिलहाल शिकायतें एक ही विद्यालय से सामने आई हैं, लेकिन यदि जांच का दायरा अन्य संस्थानों तक बढ़ाया गया तो वित्तीय अनियमितताओं और संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़े बड़े खुलासे हो सकते हैं।
स्कूल प्रशासन ही खरीदता है ड्रेस
सूत्रों का दावा है कि सरकार भले ही यूनिफॉर्म के लिए बच्चों को नकद राशि देती रही,लेकिन इसकी खरीदी स्कूल प्रबंधन ही करता रहा है। बच्चों के अभिभावकों का दावा है कि स्कूल की ओर से खरीद कर दी गई यूनिफॉर्म बेहद घटिया गुणवत्ता वाली होती है।
बताया जाता है कि यूनिफॉर्म सप्लाई का ठेका उत्तरप्रदेश की एक फर्म का दिया गया है। जिसने रीवा में अपना पंजीयन कराया है और वह रीवा व शहडोल दोनों ही संभागों के सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म सप्लाई का कारोबार कर रही है।
हालांकि इसकी अधिकृत तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी,लेकिन बच्चों को दिए गए कपड़े यानी इस तथ्य का खुलासा करते हैं। अब यूनिफॉर्म की खरीदी व किताब-कापियों की खरीदी में स्कूल प्रबंधन का कौन सा स्वार्थ छिपा है। यह जांच का विषय है।
निर्माण कार्यों में भी गड़बड़ी के आसार
सूत्रों के मुताबिक,साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) अंतर्गत कन्या परिसर पाली को करीब 90 लाख रुपए विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए आवंटित किए।
बताया जाता है कि सीएसआर की अधिकांश राशि व्यय होने के बावजूद अब तक अपेक्षित निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए।
प्राचार्य ने माना, बच्चों से ली थी राशि
मामले में घिरी तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य सरिता जैन ने स्वीकार किया कि उन्होंने छात्राओं और उनके अभिभावकों से राशि ली थी। हालांकि उनका कहना है कि यह पैसा बच्चों के लिए पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने में खर्च किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्राएं छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई पर नहीं कर रही थीं, इसलिए यह कदम उठाया गया।
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या विभाग की ओर से ऐसी कोई अनुमति या निर्देश थे, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
सरिता जैन ने यह भी बताया कि उन्हें हाल ही में प्रभारी प्राचार्य के पद से हटा दिया गया है। वहीं,निर्माणाधीन कार्यों को लेकर उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड कलेक्टर के माध्यम से जारी होता है। इसमें शाला प्रबंधन का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं है।
जांच समिति करेगी पड़ताल
कलेक्टर राखी सहाय ने कहा कि उनके संज्ञान में अब तक यह बात नहीं आई हैं,लेकिन आप बता रहे हैं तो मैं इसे चेक करवा लेती हूं।
वहीं,जनजातीय कार्य विभाग की जिला संयोजक पूजा द्विवेदी ने स्वीकार किया कि विभाग को इस संबंध में शिकायतें मिली हैं।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए जल्द समिति गठित की जाएगी और आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जाएगी।