क्या बच्चे,क्या वृद्ध ? जंगेला में हर एक की चिंता एक घड़ा पानी को लेकर है। भले ही वह मटमैला व प्रदूषित हो।
उमरिया जिले की करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत जंगेला गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गांव का एकमात्र कुआं गर्मी बढ़ने के साथ ही सूख गया है, जिससे सैकड़ों ग्रामीणों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि महिलाएं और बच्चे रोजाना लंबी दूरी तय कर जंगल के बीच स्थित झिरिया से पानी लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि झिरिया में जमा पानी न केवल गंदा है, बल्कि उससे दुर्गंध भी आती है। इसके बावजूद पीने के लिए यही एकमात्र सहारा बचा है।
जंगेला की तस्वीरें सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का अंतर उजागर कर रही हैं।
इस संबंध में जब जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया से चर्चा की गई तो उन्होंने गांव में पेयजल संकट होने से इनकार करते हुए कहा कि वहां कुएं के माध्यम से जल उपलब्ध है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि यदि पानी की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है तो ग्रामीण आखिर दूषित झिरिया का पानी लाने और पीने को क्यों मजबूर हैं।