तेल अवीव/तेहरान,(एजेंसी)।
तेहरान पर मिसाइलों की बारिश: अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की पुष्टि, ईरान में 40 दिन का शोक
पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत होने की पुष्टि ईरान की सरकारी एजेंसियों ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने की है।
30 मिसाइलों से निशाना बना ऑफिस कॉम्प्लेक्स
शनिवार को तेहरान स्थित उनके हाई-सिक्योरिटी ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलें दागी गईं। हमले के वक्त खामेनेई शीर्ष सैन्य कमांडरों के साथ बैठक कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती समेत लगभग 40 कमांडर भी मारे गए।
नेतन्याहू और ट्रम्प का दावा
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देर रात उनके मारे जाने की घोषणा की थी। इसके तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी यही दावा दोहराया।
30 मिसाइलें, हाई-सिक्योरिटी कॉम्प्लेक्स निशाने पर
राजधानी तेहरान में स्थित ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर कथित तौर पर 30 मिसाइलें दागी गईं।
ईरानी एजेंसियों के अनुसार, हमले में खामेनेई के परिजनों और कई शीर्ष कमांडरों की भी मौत हुई।
स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सीमित है और हालात तेजी से बदल रहे हैं।
ईरान में मातम, IRGC का बयान
इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि “देश ने एक महान नेता खो दिया है।” सरकार ने 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी घोषित की है।
यह घटना क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर गहरे असर के संकेत दे रही है।
इधर ईरानी सेना ने कहा कि वह सबसे खतरनाक अभियान की शुरुआत करने जा रही है। हमला कुछ देर में शुरू होगा और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
अमेरिका-इजराइल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने का दावा; तेहरान में 40 दिन का शोक, सेना ने “सबसे खतरनाक बदले” की चेतावनी दी।
दो सौ की मौत,सैकड़ों घायल
हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों घायल होने की बात कही जा रही है। एक स्कूल पर हमले का भी दावा है, जिससे नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ी।
📊 सत्ता का सबसे लंबा साया: अयातुल्ला अली खामेनेई की पूरी कहानी
चार दशक से अधिक समय तक ईरान की राजनीति, सुरक्षा और विदेश नीति की धुरी रहे खामेनेई का
जीवन सिर्फ एक धार्मिक नेता का नहीं, बल्कि सत्ता के रणनीतिक खिलाड़ी का भी रहा।
साधारण परिवार से सर्वोच्च सत्ता तक
19 अप्रैल 1939 को मशहद, ईरान में जन्मे खामेनेई एक धार्मिक परिवार से थे। कम उम्र में ही इस्लामी शिक्षा की ओर रुख किया। 1960 के दशक में शाह के खिलाफ भाषणों के कारण कई बार जेल गए।
1979 की इस्लामी क्रांति ने उनकी राजनीतिक जमीन तैयार की। वे रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी बने।
राष्ट्रपति से ‘रहबर’ तक
1981 में बम हमले में घायल होने के बावजूद वे उसी वर्ष राष्ट्रपति बने और 1989 तक इस पद पर रहे।
खुमैनी के निधन के बाद संविधान में संशोधन कर उन्हें देश का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
सर्वोच्च नेता के रूप में सेना, न्यायपालिका, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम निर्णय का अधिकार उनके पास रहा।
अमेरिका और इजराइल से टकराव
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
पश्चिमी देशों से तीखे संबंध
क्षेत्रीय राजनीति में प्रभाव
उनकी नीतियों ने तेहरान को पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन की धुरी बना दिया।
आगे क्या?
यदि दावे पुष्ट होते हैं, तो पश्चिम एशिया की सुरक्षा, तेल बाजार और वैश्विक कूटनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। दुनिया की नजर अब तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव की अगली चाल पर टिकी है।