रवि अवस्थी।भोपाल। विदिशा जिले की कुरवाई विधानसभा भी रोशन दीए की तरह है—- जो चहुं ओर उजाला करता है —- यह सीट विदिशा जिले का हिस्सा है तो सागर लोकसभा क्षेत्र से भी इसका उतना ही गहरा नाता है —- इसके चलते कुरवाई को खुरई के साथ मिलाकर एक अलग जिला बनाने की मांग भी जब-तब उठती रही है…
लेकिन कुरवाई के मतदाता विदिशा संसदीय सीट यानी भाजपा के गढ से भी नाता नहीं तोड़ना चाहते… यही वजह है कि यहां ज्यादातर चुनावों में कमल खिलता रहा है.. लेकिन 2023 के चुनाव में क्या रहेगा इस सीट का मिजाज..यह जानने से पहले डालते हैं सीट के इतिहास पर एक नजर…
———————————————————————- विदिशा जिले व सागर लोस का हिस्सा है कुरवाई कुरवाई में दलित व मुस्लिम मतों की है अधिकता मध्यप्रदेश गठन के साथ बनी यह विधानसभा सीट 1977 में कुरवाई अजा वर्ग के लिए हुई आरक्षित अब तक हुए 14 चुनाव में 10 बार जीती भाजपा
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वर्ष 1956 में मध्यप्रदेश का गठन हुआ तो कुरवाई भी नई विधानसभा सीट बनी….बुंदेलखंड से लगा हुआ क्षेत्र होने से इसे सागर संसदीय सीट में शामिल किया गया..लेकिन यह हिस्सा विदिशा जिले का ही रही…लिहाजा सियासी मिजाज भी राष्ट्रवादी विचारधारा से मेल खाता रहा…आलम यह कि वर्ष 1957 से अब तक हुए 14 चुनाव में कांग्रेस सिर्फ चार बार ही यहां विजय हासिल कर सकी..
शेष दस चुनाव में भाजपा या इसके पूर्ववर्ती अनुषांगिक संगठनों ने ही जीत दर्ज की…कांग्रेस को आखिरी बार 1998 में जीत मिली थी… वहीं पिछले चार चुनाव से इस सीट पर कमल ही खिलता रहा है..पिछले चुनाव में भी भाजपा के हरिसिंह सप्रे ने कांग्रेस के सुभाष बाहेती को 20 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी… आइए जानते हैं कुरवाई में किनके पक्ष में रहे कुरवाई सीट के नतीजे…
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Year MLA Party 1957 : तखतमल, कांग्रेस 1962ः तख्तमल , कांग्रेस 1967ः के.कुमार, जनसंघ 1972ः अवधनारायण, जनसंघ 1977ः रामचरण लाल, जेएनपी 1980ः पानबाई, कांग्रेस 1985ः श्यामलाल, भाजपा 1990ः श्याम लाल, भाजपा 1993ः चिरोंजीलाल भाजपा 1998ः रघुवीर सिंह, कांग्रेस 2003ः श्यामलाल पंथी, भाजपा 2008ः हरिसिंह सप्रे, भाजपा 2013ः वीरसिंह पंवार, भाजपा 2018ः हरिसिंह सप्रे, भाजपा ………………………………...
कुरवाई अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित
.कुरवाई सीट पर दलित व मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है..दरअसल,कुरवाई विधानसभा क्षेत्र की ज्यादातर आबादी गांवों में बसती है.. क्षेत्र की तीनों तहसील कुरवाई,सिरोंज व बसोड़ा अंतर्गत करीब पौने तीन सौ गांव आते हैं… इनमें बडी संख्या दलितों की है..इनकी बडी हुई आबादी को देखते हुए वर्ष 1977 में कुरवाई को अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया… हालांकि दलितों के अलावा दांगी व राजपूत समाज के मतदाताओं की भी यहां बडी संख्या है…
लेकिन अजा वर्ग के लिए आरक्षित सीट होने से भाजपा के हरिसिंह सप्रे दो बार विधायक चुने गए और उनके नेतृत्व में कुरवाई के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा को मिली भारी भरकम सफलता से एक बार उनकी दावेदारी फिर मजबूत बताई जा रही है..
बीते हुए निकाय चुनाव में भाजपा कुरवाई जनपद में भी निर्विरोध अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के चुनाव करा पाने में सफल रही.. कुरवाई सीट पर दांगी व राजपूत समाज के मतदाताओं की भी बडी संख्या है..यह वर्ग जिस दल के साथ रहा,कुरवाई का ताज उसी के सिर सजा.. जानते हैं कुरवाई में किस वर्ग के कितने हैं मतदाता …..
———————————————————————————————– कुल मतदाता 2,27,475 अजा 25 हजार अजजा 04 हजार कुशवाहा 19 हजार दांगी,राजपूत 24 हजार ब्राह्मण 14 हजार मुस्लिम 25 हजार
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* बीते तीन दशक में कुरवाई में हुए आठ चुनाव * सिर्फ एक चुनाव में जीत दर्ज करा सकी कांग्रेस * 08 में 1138 मतों से जीते भाजपा के हरिसिंह * 13 में 4081 से जीते बीजेपी के वीर सिंह पंवार * 18 में 14202 से जीते भाजपा के हरिसिंह सप्रे
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मौजूदा विधायक हरिसिंह सप्रे को लेकर एक चौंकाने वाली बात यह कि उनके अपनी जाति के क्षेत्र में सिर्फ 134 वोट हैं..लेकिन सप्रे की व्यवहार कुशलता,क्षेत्र पर पकड के चलते पिछले चुनाव में उन्होंने बीते दो दशक में रिकॉर्ड 17 हजार मतों से कांग्रेस को शिकस्त दी..जबकि इससे पहले 2008 के चुनाव में सप्रे सिर्फ 11सौ वोट से जीत हासिल कर पाए थे…
कुरवाई में मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच ही होता है लेकिन निर्दलीय ताल ठोकने वाले भी हर चुनाव में यहां वोट काटू साबित हुए …इनकी मौजूदगी ने जीत,हार के अंतर को ज्यादातर चुनाव में दस हजार से कम रखा…. पिछले तीन चुनाव में कांग्रेस इस सीट से लगातार हारी लेकिन उसके वोट प्रतिशत में चुनाव दर चुनाव इजाफा हुआ…
पिछले चुनाव में ही कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष बहोत ने 60 हजार से अधिक मत पाकर भाजपा को कड़ी टक्कर दी…ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आने वाले चुनाव में भी सुभाष एक बार फिर कांग्रेस की ओर से दावेदार हैं..ऐसे में कहा जा सकता है कि कुरवाई में 2023 का मुकाबला भी आसान नहीं रहने वाला….